दिल्ली में सर्दियों के पहले प्रदूषण से निपटने की कोशिश शूरू, रेड लाइट पर इंजन बंद रखने की अपील
सर्दियों के आने के पहले राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में प्रदूषण से निपटने की कोशिश तेज हो गई है। एक तरफ दिल्ली में वैद्य पीयूसी सर्टिफिकेट को अनिवार्य कर दिया है वहीं दूसरी तरफ लोगों को रेड ट्रैफिक लाइट में गाड़ी का इंजन बंद रखने की नसीहत भी दी जा रही है। दिल्ली में सोमवार को राज्य ट्रांसपोर्ट विभाग ने 'रेड लाइट ऑन, इंजन ऑफ' अभियान की शुरूआत की है। शहर में प्रदूषण को कम करने के लिए यह अभियान एक महीने तक 100 प्रमुख ट्रैफिक लाइट पर चलाया जाएगा।

18 नवंबर तक चलने इस अभियान में 2,500 से ज्यादा नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों को तैनात किया गया है जो शहर के 100 ट्रैफिक जंक्शनों पर सुबह 8 से दोपहर 2 बजे और दोपहर 2 से 8 बजे तक दो पालियों में काम करेंगे। स्वयंसेवक शहर में प्रदूषण के बारे में जागरूकता बढ़ाएंगे और ट्रैफिक लाइट के लाल होने पर मोटर चालकों से स्वेच्छा से इंजन बंद करने का आग्रह करेंगे।

अभियान को शुरू करने के लिए, राज्य के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने आज आईटीओ क्रॉसिंग का दौरा किया और जनता से अपील की कि वे प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई में सफलता हासिल करने के लिए अपना समर्थन दें। बता दें कि सर्दियों के महीनों में दिल्ली में वायु प्रदूषण खतरे के स्तर से भी ऊपर चला जाता है।

राय ने पेट्रोलियम संरक्षण अनुसंधान संघ (पीसीआरए) के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि अगर लोग ट्रैफिक सिग्नल पर इंजन बंद करने की कवायद का पालन करते हैं, तो प्रदूषण को 13-20 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा, "यह एक सार्वजनिक अभियान है। प्रदूषण को मात देने के लिए हम सभी को मिलकर लड़ना होगा। मैं जनता से अभियान का पालन करने की अपील करता हूं।"

बता दें कि दिल्ली में इसी तरह का अभियान पिछले साल भी चलाया गया था। बता दें कि दिल्ली में सर्दियों के आने के पहले प्रदूषण को नियंत्रित करने और वायु गुणवत्ता में सुधार करने का प्रयास शुरू कर दिया गया है। पिछले महीने (सितंबर में) ही दिल्ली में पीयूसी (PUC) सर्टिफिकेट को अनिवार्य कर दिया गया है। अब दिल्ली में बगैर वैद्य पीयूसी के वाहन चलाते पकडे जाने पर 10,000 रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

दिल्ली में परिवहन विभाग द्वारा 900 से अधिक अधिकृत प्रदूषण जांच केंद्र हैं, जो शहर भर में फैले पेट्रोल पंपों और कार्यशालाओं में स्थापित हैं। दिल्ली सरकार ने सभी मोटर वाहन चालकों से अनुरोध किया गया है कि वे अपने वाहनों को वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र के साथ चलाएं।

बता दें कि कार्बन मोनोऑक्साइड और कार्बन डाइऑक्साइड जैसे विभिन्न प्रदूषकों को जांचने के लिए उत्सर्जन मानकों के लिए समय-समय पर परीक्षण किया जाता है जिसके बाद उन्हें पीयूसी प्रमाणपत्र दिया जाता है। पीयूसी सर्टिफिकेट केंद्रीय मोटर वाहन एक्ट, 1989 के तहत जारी किया जाता है। पीयूसी की जांच के लिए पेट्रोल पंप पर ऑटोमेटेड पीयूसी सेंटर स्थापित किये गए हैं, जहां जांच के बाद तुरंत सर्टिफिकेट जारी किया जाता है। सीमा से ज्यादा उत्सर्जन पाए जाने पर रिजेक्शन स्लिप जारी किया जाता है।

सड़क एवं परिवहन मंत्रालय ने इस संबंध में जून 2021 में एक अधिसूचना जारी की थी। इसमें बताया गया था कि केंद्र सरकार वाहन पीयूसी के लिए एक केंद्रीय डाटाबेस तैयार कर रही है, देशभर में समान प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) को लागू किया जाएगा। वाहनों के डेटाबेस को नेशनल रजिस्टर से जोड़ा जाएगा।

बता दें कि कोरोना महामारी के दौरान RTO की अधिकतर सेवाएं ऑनलाइन हो चुकी हैं। लर्नर लाइसेंस बनवाने से लेकर रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट, परमिट और रोड टैक्स से जुड़ी सभी सेवाएं ऑनलाइन कर दी गई हैं। अब ड्राइविंग लाइसेंस के लिए मेडिकल प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया को भी ऑनलाइन कर दिया गया है।


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