Delhi-Meerut Expressway हुआ टोल फ्री, अब जुलाई तक कर सकेंगे मुफ्त में सफर
कोरोना की दूसरी लहर के बीच दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे पर वाहनों को टोल मुक्त कर दिया गया है। 82 किलोमीटर लंबे दिल्ली- मेरठ एक्सप्रेसवे देश का पहला एक्सप्रेसवे है जिसमे फास्टैग आधारित ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रीडर का इस्तेमाल किया गया है। एक्सप्रेसवे को आम जनता के लिए 1 अप्रैल से शुरू किया गया था।

जुलाई तक फ्री में चलेंगे वाहन
एक्सप्रेसवे पर लगे ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रीडर को ट्रायल के आधार पर चलाया जा रहा था, जो अब समाप्त हो चुका है। यहां पर बता दें कि एनएचएआइ द्वारा नए टोल दरों का निर्धारण नहीं किया गया है। इसके अलावा एक्सप्रेसवे पर कुछ जगह आरओबी का निर्माण पूरा होने में कुछ समय लग सकता है। ऐसे में जून और जुलाई में वाहनों की आवाजाही टोल मुक्त हो जाएगी।

35 दिन में 55 लाख वाहनों का हुआ आवागमन
वहीं, ट्रायल की रिपोर्ट के अनुसार एक अप्रैल को वाहनों के लिए खोले गए दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे पर विगत पैंतीस दिनों में 55 लाख वाहनों का आवागमन हुआ है। आटोमैटिक नंबर प्लेट रीडर सिस्टम के जरिए ट्रेस किए गए वाहनों का पूरा विवरण कंट्रोल रूम को मिल गया है। यह विवरण टोल दरों का निर्धारण होने के साथ ही फास्टैग के जरिए टोल वसूली में सहायक होगा।

टोल वसूली का ट्रायल जल्द होगा
एनएचएआइ द्वारा टोल वसूली का ट्रायल करने की तैयारी की जा रही है। इसके तहत जीरो टोल कटने का संदेश संबंधित वाहन चालक के मोबाइल पर आएगा। एक्सप्रेस-वे पर सबसे अधिक वाहनों का दिल्ली से मेरठ की ओर जाना हो रहा है। शुरू में एक लाख, बाद में डेढ़ लाख और विगत दस दिनों से दो लाख वाहन रोज दौड़ रहे हैं।

परियोजना की लागत 8,346 करोड़ रुपये
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे में 60 किलोमीटर एक्सप्रेसवे और 22 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग है। परियोजना को 8,346 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया गया है। एक्सप्रेस-वे पर वाहनों के आवागमन की सुविधा के लिए एम्बुलेंस, क्रेन, पेट्रोल पंप, रेस्तरां, वाहनों के रखरखाव की दुकानों जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं।

ऐसी सुविधाओं के अलावा, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे में साइकिल चालकों और पैदल यात्रियों के लिए भी प्रावधान हैं। एक्सप्रेसवे के फेज 1 और फेज 2 की सड़कों पर 2.5 मीटर साइकल कॉरिडोर और 2 मीटर चौड़ा फुटपाथ है।


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