रेड ट्रैफिक लाइट में अब बंद करना होगा गाड़ी का इंजन, दिल्ली सरकार ने की लोगों से अपील
दिल्ली में वाहनों से बढ़ते प्रदूषण की स्थिति को देखते हुए दिल्ली सरकार ने लोगों से रेड लाइट पर इंजन को बंद रखने की अपील की है। इसके लिए दिल्ली सरकार ने शहर की मुख्य सड़कों पर 'रेड लाइट ऑन गाड़ी ऑफ' नाम के अभियान को शुरू करने का ऐलान किया है। दिल्ली में यह अभियान 28 अक्टूबर से शुरू किया जाएगा।

दिल्ली सरकार ने सर्दियों में प्रदूषण से निपटने के लिए 15 पॉइंट एक्शन प्लान बनाया गया है। जिसके तहत वाहनों से होने वाले प्रदूषण के साथ-साथ निर्माण कार्यों से होने वाले प्रदूषण और पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण से भी निपटने की रणनीति तैयार की गई है। इसका मुख्य लक्ष्य दिल्ली में वायु गुणवत्ता मानक (एक्यूआई) के स्तर को ऊपर उठाना है।

इस अभियान को लोगों एक पहुंचाने के लिए दिल्ली सरकार 2,500 सिविल डिफेंस वालंटियर की सहायता ले रही है। इन वालंटियर्स को लगभग 100 ट्रैफिक इंटरसेक्शन पर लगाया जाएगा। इनमें से 10 वालंटियर को हरेक ट्रैफिक सिग्नल में तैनात किया जाएगा।

एक रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के वायु प्रदूषण के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार पेट्रोल और डीजल से चलने वाले वाहन हैं। दिल्ली में पीएम 2.5 के 28 प्रतिशत उत्सर्जन के लिए वाहन जिम्मेदार हैं। आपको बता दें कि हर साल सर्दियों के दौरान राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वायु गुणवत्ता खतरनाक रूप से निम्न स्तर पर पहुंच जाता है।

दिल्ली के पड़ोसी राज्य हरियाणा और पंजाब में पराली जलाने के कारण पार्टिकुलेट मैटर 2.5 (पीएम 2.5) सबसे खतरनाक स्तर को भी पार कर जाता है। दिल्ली में वायु प्रदूषण से सांस लेने में दिक्कत और फेंफड़े से जुड़ी कई बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं।

हवा की गुणवत्ता के लिए सीपीसीबी वायु गुणवत्ता सूचकांक जारी करती है जो कि हवा में पार्टिकुलेट मैटर और कई अन्य तरह की गैसों और प्रदूषण के स्तर को माप कर तैयार किया जाता है। एक्यूआई इंडेक्स के अनुसार, शून्य से 50 के बीच एक्यूआई को 'अच्छा', 51 और 100 को 'संतोषजनक', 101 और 200 को 'मध्यम', 201 और 300 को 'खराब', 301 और 400 के बीच 'बहुत खराब' और 401 और 500 को 'गंभीर' माना जाता है।

राष्ट्रीय राजधानी में बढ़ते प्रदूषण के स्तर को देखते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने 2016 में 10 साल से ज्यादा पुराने डीजल वाहनों पर प्रतिबंध लगाने का फैसला सुनाया था। एनजीटी के दिशानिर्देशों के अनुसार दिल्ली सरकार ने 10 साल से ज्यादा पुराने डीजल और 15 साल से ज्यादा पुराने पेट्रोल वाहनों पर प्रतिबंध लगा दिया है। दिल्ली परिवहन विभाग अब ऐसे वाहनों को पीयूसी जारी नहीं कर रहा है।

प्रतिबंधित किए गए पुराने वाहनों को सरकार ने स्क्रैप (कबाड़) घोषित कर दिया है जिससे इन वाहनों की खरीद बिक्री भी नहीं होगी। हालांकि, अब ऐसे वाहनों को स्क्रैप से बचाने के लिए इलेक्ट्रिक में बदला जा सकता है। इसके लिए दिल्ली सरकार ने कंपनियों को इलेक्ट्रिक व्हीकल रेट्रोफिटिंग किट (EV Retrofitting Kit) बेचने की अनुमति दी है।


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