दिल्ली ड्रोन एक्सपो: क्या सच में उड़ने वाली हैं फ्लाइंग कारें? जानें 2027 का सच
राजधानी दिल्ली के द्वारका स्थित यशोभूमि में आज यानी 28 सितंबर से 'ड्रोन एक्सपो' (Drone Expo) की शुरुआत हो रही है। एक्सपो के खास 'DEMOex' एरिना में दर्शकों को लाइव आउटडोर ड्रोन डेमो देखने को मिलेंगे, जिन्हें तय अनुमतियों के साथ उड़ाया जा रहा है। विजिटर्स के लिए यह शो सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक खुला रहेगा। सबसे अच्छी बात यह है कि यशोभूमि द्वारका सेक्टर-25 मेट्रो स्टेशन सीधे इस कॉम्प्लेक्स से जुड़ा है। यहां आप सिम्युलेटर के जरिए "फ्लाइंग कार" और eVTOL (इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ एंड लैंडिंग) की उड़ानों का अनुभव ले सकते हैं, हालांकि फ्री-फ्लाइट्स पर सख्त नियंत्रण रखा गया है।
आज की ज्यादातर सार्वजनिक उड़ानों में मल्टीरोटर ड्रोन ही नजर आएंगे, इंसानों को ले जाने वाले पैसेंजर eVTOLs नहीं। भारत की प्रमुख eVTOL डेवलपर कंपनी 'द ई-प्लेन कंपनी' (The ePlane Company) ने इस साल अपना फुल-स्केल प्रोटोटाइप पेश किया है। कंपनी का लक्ष्य अप्रैल 2027 तक सर्टिफिकेशन मानकों के तहत अपनी पहली टेस्ट फ्लाइट आयोजित करना है। इस बीच, DGCA ने वर्टिकल टेक-ऑफ वाले एयरक्राफ्ट्स के टाइप सर्टिफिकेशन के लिए गाइडलाइंस जारी कर दी हैं, ताकि सुरक्षा के मानक तय किए जा सकें। इसीलिए एक्सपो में इंसानों द्वारा उड़ाई जाने वाली टेक-ऑफ फ्लाइट्स के बजाय स्टैटिक मॉक-अप और सिम्युलेटर ही देखने को मिलेंगे।

दिल्ली ड्रोन एक्सपो में eVTOL के लाइव डेमो
अगर आप इस एक्सपो में जा रहे हैं, तो उन भारतीय टीमों के स्टॉल्स जरूर देखें जो निकट भविष्य में इस तकनीक को धरातल पर उतारने में जुटी हैं। ePlane अपनी 'e200X' की अब तक की यात्रा को प्रदर्शित कर रही है, जो DGCA के दिशानिर्देशों के तहत तेजी से आगे बढ़ रही है। वहीं, एक्सपो में शामिल 'याली एयरोस्पेस' (Yali Aerospace) लंबी दूरी की मेडिकल लॉजिस्टिक्स पर फोकस कर रही है। ये कंपनियां सिर्फ रोजमर्रा के हवाई सफर के बड़े-बड़े वादे नहीं कर रहीं, बल्कि एयर एम्बुलेंस और जरूरी सामानों की अर्जेंट डिलीवरी जैसी जमीनी जरूरतों पर काम कर रही हैं—जिनकी टाइमलाइन और सीमाएं पूरी तरह स्पष्ट हैं।
DGCA की अनुमतियां और हवा में उड़ान के कानूनी नियम
ड्रोन संचालन के लिए भारत का 'डिजिटल स्काई मैप' पूरे एयरस्पेस को तीन हिस्सों—ग्रीन, येलो और रेड जोन में बांटता है। ग्रीन जोन में 400 फीट तक की ऊंचाई पर बिना किसी पूर्व मंजूरी के ड्रोन उड़ाया जा सकता है, येलो जोन में एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) की अनुमति जरूरी होती है, जबकि रेड जोन में उड़ान पूरी तरह प्रतिबंधित है। हालांकि, पैसेंजर eVTOL के नियम आम शौकिया ड्रोन से बिल्कुल अलग होंगे। इनके लिए DGCA से एयरवर्दीनेस सर्टिफिकेशन, लाइसेंस्ड पायलट, ऑपरेटर परमिट और अप्रूव्ड वर्टीपोर्ट्स (Vertiports) की जरूरत होगी।
किराया, रेंज और ट्रायल कॉरिडोर्स: कितना होगा खर्च?
ट्रैफिक जाम से बचकर हवा में सफर करने का कितना खर्च आएगा? 'इंटरग्लोब-आर्चर' (InterGlobe–Archer) के अनुमान के मुताबिक, कनॉट प्लेस से गुरुग्राम की दूरी कार से तय करने में करीब ₹1,500 का खर्च आता है, जबकि फ्लाइंग कार से यह सफर महज 7 मिनट में और ₹2,000 से ₹3,000 प्रति व्यक्ति में पूरा हो सकेगा। दूसरी ओर, हिमालयी राज्यों में ड्रोन कॉरिडोर्स के जरिए डिलीवरी का समय दो-तिहाई से भी ज्यादा कम हो चुका है। इससे साफ है कि शहरों में पैसेंजर सर्विस शुरू होने से पहले मेडिकल लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में इसका बड़ा इस्तेमाल देखने को मिलेगा।
| सफर का जरिया | समय | अनुमानित किराया |
|---|---|---|
| eVTOL (कनॉट प्लेस-गुरुग्राम) | ~7 मिनट | ₹2,000–₹3,000 |
| कार (कनॉट प्लेस-गुरुग्राम) | 60–90 मिनट | ~₹1,500 |
दिल्ली ड्रोन एक्सपो में डेमो कैसे और कहां देखें?
दिनभर लाइव डेमो और सिम्युलेटर का अनुभव लिया जा सकता है। अलग-अलग स्लॉट की टाइमिंग जानने के लिए आप 'ड्रोन एक्सपो ऐप' या बाहर लगे 'DEMOex' बोर्ड को देख सकते हैं। आम लोगों के लिए एंट्री का समय सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक है। यहां पहुंचने का सबसे तेज तरीका एयरपोर्ट एक्सप्रेस मेट्रो पकड़ना है—आप सीधे यशोभूमि द्वारका सेक्टर-25 स्टेशन पर उतरकर सीधे वेन्यू में एंट्री ले सकते हैं।
यह एक्सपो सिर्फ हवा-हवाई वादों के बजाय जमीनी हकीकत पर ज्यादा केंद्रित है। यहां आप समझ सकते हैं कि कौन से ड्रोन वास्तव में उड़ान भरने के योग्य हैं, उन टीमों से मिल सकते हैं जो भारत का पहला सर्टिफाइड पैसेंजर eVTOL बनाने में जुटी हैं, और अर्बन एयर मोबिलिटी के नियम-कायदों को समझ सकते हैं। अगर सब कुछ तय योजना के मुताबिक रहा, तो 2027 तक देश में शुरुआती एयर एम्बुलेंस सेवाएं शुरू हो सकती हैं, जिसके बाद छोटे कम्यूटर रूट पर फ्लाइंग कारें भी उड़ती दिखाई देंगी।


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