दिल्ली में शुरू हुई पहली इलेक्ट्रिक बस, सीएम केजरीवाल ने दिखाई हरी झंडी
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आज हरी झंडी दिखा कर राज्य में पहली इलेक्ट्रिक बस सेवा का सुभारम्भ किया। इन इलेक्ट्रिक बसों को चलाने का प्रमुख कारण दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण के स्तर को कम करना है। इलेक्ट्रिक बसों को आईटीओ, सफदरजंग, आश्रम के रास्ते प्रगति मैदान से आईपी डिपो तक 27 किलोमीटर लंबे रूट पर चलाया जाएगा। बता दें कि दिल्ली सरकार की योजना 2,300 इलेक्ट्रिक बसों को चलाने की है। इनमें से 1,300 की खरीद डीटीसी द्वारा की जाएगी और बाकी 1,000 क्लस्टर योजना के तहत काम करेंगे।

अगले महीने 50 और ई-बसों को डीटीसी बेड़े में शामिल किए जाने की उम्मीद है, जब बड़े पैमाने पर सार्वजनिक परिवहन के लिए रोल आउट शुरू होगा। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री कैलाश गहलोत के मुताबिक, फरवरी से हर महीने करीब 50 बसों को ई-बसों के जत्थे में जोड़ा जाएगा। दिल्ली सरकार इन ई-बसों के लिए बस डिपो को चार्जिंग स्टेशनों से लैस करेगी। यह काम कई चरणों में किया जाएगा।

इसके अलावा, डीटीसी चार हाइब्रिड बस डिपो बनाएगी, जो इलेक्ट्रिक और सीएनजी बसों का एक संयोजन होगा। ये हाइब्रिड डिपो सुभाष प्लेस, राजघाट, हसनपुर और बवाना में बनाए जाएंगे। दिल्ली में ई-बसों को शामिल करने की योजना की घोषणा पहली बार जुलाई, 2018 में की गई थी। भविष्य में, दिल्ली सरकार केवल इलेक्ट्रिक बसों की खरीद करेगी।

इस बीच, सार्वजनिक गतिशीलता को और बढ़ाने के लिए, केजरीवाल ने शुक्रवार को 100 लो-फ्लोर एसी सीएनजी बसों को हरी झंडी दिखाई थी, जिससे सार्वजनिक परिवहन बस बेड़े का आकार 6,900 हो गया। नई एसी सीएनजी बसें दिल्ली के नौ क्लस्टर बस रूटों पर बाहरी दिल्ली के घुमनहेरा डिपो से दिल्ली के ग्रामीण इलाकों में चलेंगी।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए दिल्ली सरकार कैब एग्रीगेटर कंपनियों के लिए नई नीतियों की घोषणा की है, जिसके तहत अब दिल्ली में कैब कंपनियों को अपने वाहनों के जत्थे में 50 फीसदी इलेक्ट्रिक वाहनों को रखना होगा। दिल्ली सरकार की एक सूचना के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मार्च 2023 तक सभी कैब एग्रीगेटर कंपनियों को अपने दो-पहिया वाहनों के बेड़े में 50 फीसदी और चार-पहिया वाहनों के बेड़े में 25 फीसदी इलेक्ट्रिक वाहनों को शामिल करना अनिवार्य होगा।

दिल्ली के ट्रांसपोर्ट मंत्री कैलाश गहलोत ने शनिवार को एक ट्वीट में कहा है कि यह निर्णय एग्रीगेटर उद्योग को पर्यावरण के अनुकूल बनने के लिए लिया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने 60 दिनों तक आपत्तियों का मूल्यांकन करेगी, जिसके बाद बाद अधिसूचना जारी की जाएगी।

एग्रीगेटर्स नीति के मसौदे के अनुसार, अंतिम नीति की अधिसूचना के तीन महीने के भीतर नए दोपहिया वाहनों में से 10 प्रतिशत और नए चार पहिया वाहनों के 5 प्रतिशत इलेक्ट्रिक वाहन चलाना अनिवार्य होगा। इसके बाद, सभी नए दोपहिया वाहनों में से 50 प्रतिशत और सभी नए चार पहिया वाहनों में से 25 प्रतिशत को मार्च 2023 तक इलेक्ट्रिक होना आवश्यक होगा।

बता दें कि दिल्ली परिवहन विभाग ने प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए पिछले साल दिल्ली में 1 लाख से ज्यादा पुराने वाहनों का पंजीकरण रद्द किया है। दिल्ली राज्य क्षेत्र में 10 साल से अधिक पुराने डीजल और 15 साल से अधिक पुराने पेट्रोल वाहनों का पंजीकरण रद्द किया जा रहा है।

राष्ट्रीय राजधानी में बढ़ते प्रदूषण के स्तर को देखते हुए दिल्ली सरकार ने 2016 में 10 साल से ज्यादा पुराने डीजल वाहनों पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी। वर्तमान में दिल्ली में 10 साल से ज्यादा पुराने डीजल और 15 साल से ज्यादा पुराने पेट्रोल वाहनों को एनओसी नहीं दिया जा रहा है लेकिन सरकार उन्हें अन्य राज्यों में चलाने के लिए एनओसी दे रही है जहां ऐसे वाहन प्रतिबंधित नहीं है।


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