दिल्ली कैंट हादसा: तेज रफ्तार थार ने ली पति-पत्नी की जान, CCTV में कैद हुआ खौफनाक मंजर
दिल्ली के दिल्ली कैंट इलाके से एक बेहद खौफनाक सीसीटीवी फुटेज सामने आया है। 2 सितंबर (बुधवार) के इस वीडियो में एक तेज रफ्तार महिंद्रा थार बाइक सवार पति-पत्नी को जोरदार टक्कर मारती दिख रही है। हादसे में दंपति की मौके पर ही मौत हो गई। 3 सितंबर को यह रोंगटे खड़े कर देने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। घटना के तुरंत बाद वहां मौजूद लोगों ने आरोपी ड्राइवर का पीछा किया और पुलिस को सूचना दी। पुलिस के मुताबिक, यह हादसा शाम करीब 5 बजे इंडियन ऑयल (IOC) रेड लाइट के पास हुआ। फिलहाल पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगालकर हादसे की पूरी कड़ी और जिम्मेदारी तय करने में जुटी है।
मौके पर मौजूद लोगों ने हरियाणा के झज्जर के रहने वाले 26 साल के ड्राइवर भूपेंद्र को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। गाड़ियों के तकनीकी निरीक्षण और गवाहों के बयानों के आधार पर पुलिस एफआईआर दर्ज कर रही है। आरोपी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106(1) (लापरवाही से मौत) और धारा 281 के तहत मामला दर्ज हो सकता है। इसके अलावा मोटर वाहन अधिनियम (MVA) की धारा 184 (खतरनाक ड्राइविंग) और 187 (हादसे के बाद कर्तव्य न निभाना) भी लगाई जा रही है। बता दें कि बीएनएस की धारा 106(2), जिसमें हिट-एंड-रन के मामलों में 10 साल की सजा का प्रावधान है, वह साल 2026 में भी अभी लागू (अधिसूचित) नहीं हुई है।

दिल्ली कैंट थार हादसा CCTV: अपराध और कानूनी सजा (BNS/MVA)
| कानून | धारा | अधिकतम सजा (वर्तमान) |
|---|---|---|
| BNS | 106(1) लापरवाही से मौत होना | 5 साल तक की जेल और जुर्माना |
| BNS | 281 सार्वजनिक सड़क पर खतरनाक ड्राइविंग | 6 महीने तक की जेल या 1,000 रुपये तक जुर्माना |
| MVA | 184 खतरनाक तरीके से गाड़ी चलाना | 1 साल तक की जेल; 5,000 रुपये तक जुर्माना |
| MVA | 187 साथ में 134 हादसे की सूचना न देना/मदद न करना | 6 महीने तक की जेल; 5,000 रुपये जुर्माना |
| MVA | 185 शराब पीकर गाड़ी चलाना (साबित होने पर) | 6 महीने तक की जेल; 10,000 रुपये जुर्माना |
डैशकैम और CCTV सबूत: इंश्योरेंस पर असर और वीडियो जमा करने का तरीका
पीड़ित परिवार को थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस के तहत मुआवजा पाने का पूरा हक है। बीमा कंपनी को यह राशि देनी ही होगी, जिसे वह बाद में वाहन मालिक से वसूल सकती है। हालांकि, अगर ड्राइवर नशे में था, बिना लाइसेंस गाड़ी चला रहा था या गाड़ी का गलत इस्तेमाल कर रहा था, तो ओन-डैमेज क्लेम खारिज हो सकता है। अगर आपने इस हादसे का वीडियो बनाया है, तो ओरिजिनल फाइल को बिना किसी एडिट के सुरक्षित रखें। भारतीय साक्ष्य अधिनियम के तहत बिना छेड़छाड़ वाला वीडियो ही प्राथमिक सबूत माना जाता है। इस फुटेज को संबंधित थाने के SHO को सौंपें या जीरो एफआईआर के जरिए जमा करके उसकी रसीद जरूर लें।
रोड सेफ्टी चेक: ABS/ESC, हेलमेट और रात के सफर में रिफ्लेक्टर क्यों हैं जरूरी?
बाइक सवारों को हमेशा BIS-सर्टिफाइड फुल-फेस हेलमेट ही पहनना चाहिए। यही नियम पीछे बैठी सवारी (पिलियन राइडर) पर भी लागू होता है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस बिना हेलमेट वाले राइडर और पिलियन दोनों का चालान काटती है। 2019 के बाद से बनने वाली सभी कारों और बाइक्स में ABS या CBS अनिवार्य कर दिया गया है। अचानक मोड़ पर बेहतर कंट्रोल के लिए इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल (ESC) वाले वाहन चुनें। इसके अलावा, रात के वक्त विजिबिलिटी बढ़ाने के लिए अपने सामान, गार्ड्स और जैकेट पर रिफ्लेक्टर या रिफ्लेक्टिव टेप जरूर लगाएं।
दिल्ली के इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर ओवरस्पीडिंग की सनक, लचर पुलिसिंग और सड़कों के डिजाइन पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। कानून सख्त हो चुके हैं, लेकिन इनका लगातार पालन और आम नागरिकों द्वारा सही सबूत देना ही ऐसे हादसों पर लगाम लगा सकता है। अगर आप इस घटना के चश्मदीद हैं, तो फुटेज को जिम्मेदारी से शेयर करें; वीभत्स कंटेंट को सोशल मीडिया पर न फैलाएं। अगर आप आज रात सड़क पर निकल रहे हैं, तो रफ्तार धीमी रखें, सेफ्टी गियर पहनें और ट्रैफिक सिग्नल का पालन करें। आपकी एक छोटी सी सावधानी किसी की जिंदगी बचा सकती है।


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