इलेक्ट्रिक वाहन के लिए नहीं कोई समय सीमा, नितिन गडकरी ने दिया बयान
देश में सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने में लिए लगातार प्रयास कर रही है तथा इसे लाने में जल्दीबाजी करने का आरोप भी वाहन निर्माता कंपनियों द्वारा सरकार पर लगाया जा रहा था।

वर्तमान में भारतीय ऑटो इंडस्ट्री सबसे खराब दौरा से गुजर रहा है, कार व बिक्री की बिक्री में जबरदस्त गिरावट आयी है। साथ ही इसमें सुधार आने की भी कोई संभावना नहीं दिख रही है।

वाहन निर्माता कंपनियों की हालत खस्ता हो चुकी है। इसके साथ ही आगामी समय में बीएस-6 मानक अपडेट की वजह से वाहनों के दाम और बढ़ने वाले है, जिससे बिक्री में और गिरावट की उम्मीद की जा रही है।

ऑटो इंडस्ट्री में मंदी से लाखों नौकरियां दांव पर है। वहीं दूसरी तरफ भारत सरकार इलेक्ट्रिक वाहन को भारत में लाने के लिए समयसीमा लेकर आयी थी। हाल ही में प्रस्ताव लाया गया था कि देश में 2025 तक 150cc से नीचे सभी वाहन अनिवार्य रूप से इलेक्ट्रिक होने चाहिए।

एक तरफ जहां इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए इनके रोड टैक्स व रजिस्ट्रेशन चार्ज माफ कर दिए गए है, तो वहीं दूसरी तरफ सरकार ने इंटरनल कम्बशन इंजन (पेट्रोल, डीजल आदि) वाहनों के रजिस्ट्रेशन व रिन्यूवल चार्ज को 600 से 10,000 रुपयें कर दिया है।

हालांकि ऑटो इंडस्ट्री की हालत को देखते हुए सरकार ने रजिस्ट्रेशन की बढ़ी फीस पर कुछ समय के लिए रोक लगा दी है। नितिन गडकरी ने अब बयान दिया है कि इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रचलन में कोई समयसीमा नहीं है।

उन्होंने कहा कि परिवहन मंत्रालय देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को लाने के लिए कोई समय सीमा नहीं तय कर रहा है। कई राज्य सरकारें अपने से ही इलेक्ट्रिक बसें अपना रही है, यह परिवर्तन एक स्वाभाविक रूप से होगा।

कुछ समय पहले देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को लाने व बैटरी उत्पादन से जुड़ी योजना का प्रस्ताव नीति आयोग ने पेश किया था। इसके बाद से अधिकतर वाहन कंपनियों ने इसे नामुमकिन करार दिया था।

हालांकि नितिन गडकरी ने इस पर बयान देते हुए कहा था कि इस पर कंपनियों ने विचार विमर्श करके निर्णय लिया जाएगा। लेकिन अब सरकार ने अपना यह कदम पीछे ले लिया है।

इसके साथ ही सूत्रों से यह भी पता चला है कि सरकार डीजल इंजन को हटाने के लिए भी कोई समय सीमा नहीं तय करन वाली है। डीजल इंजन को चलन से हटाने के लिए कोई दबाव नहीं डाला जाएगा।

बतातें चले कि बीएस-6 उत्सर्जन मानक के चलते मारुति, टाटा सहित कई कंपनियों ने 1 अप्रैल 2020 से डीजल इंजन का उत्पादन बंद करने की बात कही है। यह निर्णय डीजल इंजन को बीएस-6 में बदलने की लागत को देख कर लिया गया है।

ड्राइवस्पार्क के विचार
देश में ऑटो इंडस्ट्री बहुत ही बुरे हालात में पहुंच चुकी है, ऐसे में इस स्थिति को और खराब ना करते हुए सरकार को इसे बेहतर करने में मदद करनी चाहिए। इलेक्ट्रिक वाहनों की ही तरह पेट्रोल-डीजल वाहनों में भी जीएसटी को कम किये जाने की जरूरत है, सियाम सहित कई संस्था इसकी मांग भी कर चुकी है।


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