Cyclone Remal Viral Video: यहां तूफान से बचाव के लिए ट्रेनों के पहिए को जंजीरों से बांधा गया ! देखें वीडियो
बंगाल की खाड़ी में बने रेमल तूफान ने कल रात पश्चिम बंगाल के कई इलाकों में पहुंचकर भारी तबाही मचाई। तूफान के आगमन से पहले ही रेलवे विभाग ने एहतियात बरतते हुए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए थें।
इनमें से एक महत्वपूर्ण कदम था पश्चिम बंगाल के शालीमार रेलवे स्टेशन पर रेलवे कर्मचारियों द्वारा स्टेशन पर खड़ी सभी ट्रेनों के पहियों को पटरियों से जंजीरों से बांधना। इसका वीडियो अब तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो को एएनआई ने शेयर किया है। लोग इस वीडियो को देखकर हैरानी और चिंता जाहिर कर रहे हैं।
दरअसल, मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि इस चक्रवात की वजह से 110 से 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने की संभावना है और अधिकतम हवा की गति 135 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।
इसी कारण से, वीडियो देखकर कुछ लोगों ने सोचा होगा कि ट्रेनों के उड़ने और किसी प्रकार की दुर्घटना होने की संभावना के कारण उन्हें जंजीरों से बांध दिया गया है। लेकिन बता दें कि ऐसा नहीं है। इसके पीछे वैज्ञानिक कारण है।

चक्रवात से उड़ जाने के डर से रेलवे कर्मचारियों द्वारा ट्रेनों को जंजीर/बोल्ट से नहीं बांधा गया। इसका कारण जानने से पहले यह समझना जरूरी है कि रेलवे कर्मचारी ट्रेनों को कैसे पार्क करते हैं। जैसे हम गाड़ी पार्क करते हैं वैसे ही ट्रेनों को भी पार्क किया जाता हैं।
आमतौर पर हम कार पार्क करते समय हैंड ब्रेक का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, अगर हमें कार को लंबे समय तक पार्क करना पड़ता है, तो हम हैंडब्रेक लगाने के बजाय पहियों के नीचे टॉय (लकड़ी या पत्थर के टुकड़े) रख देते हैं ताकि पहियों को हिलने से रोका जा सके।

ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि लंबे समय तक ब्रेक चालू रखने से ब्रेक खराब हो सकते हैं। ठीक इसी तरह, ट्रेन को पार्क करते वक्त भी हमेशा ब्रेक नहीं लगाया जाता। अगर बहुत देर तक ब्रेक लगा रहेगा, तो ब्रेक खराब होने का भी खतरा रहता है।
इसलिए, वे पहले ट्रेन को एक विशेष रुकने की स्थिति में लाते हैं, ब्रेक लगाकर उसे रोकते हैं, और फिर पहियों को हिलने से रोकने के लिए पहिए पर लोहे के ब्लॉक रख देते हैं। उसके बाद ब्रेक जारी कर दिया जाता है। ये ब्लॉक ट्रेन को चलने से रोकते हैं।
इसलिए, सबसे पहले ट्रेन को एक खास जगह पर लाकर खड़ा किया जाता है। फिर ब्रेक लगाकर उसे रोका जाता है। इसके बाद पहियों के नीचे लोहे के ब्लॉक रख दिए जाते हैं ताकि ट्रेन हिल न सके। आखिर में ब्रेक हटा लिया जाता है। इस तरह ट्रेन को हिलने से रोका जाता है।
लोहे के ये ब्लॉक सीमित संख्या में होते हैं। इनके न होने पर जंजीरों का इस्तेमाल करके पहियों को सुरक्षित किया जाता है। तूफान के दौरान हवाएं बहुत तेज चलती हैं जिससे ट्रेनों के हिलने-डुलने का खतरा ज्यादा रहता है।


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