कोर्ट ने सुनाया 91,000 रुपये का पार्किंग चार्ज देने का फैसला, जानें क्या है मामला
गांधीनगर उपभोक्ता न्यायालय ने एक वकील को रिपेयरिंग के लिए दी गई कार की समय पर डिलीवरी नहीं लेने के मामले में 91,000 रुपये का पार्किंग शुल्क देने का फरमान सुनाया है। कार वर्कशॉप मालिक ने 910 दिनों तक रिपेयर की गई कार को अपने यहां रखने के लिए पार्किंग शुल्क लेने की मांग की थी।

दरअसल, वकील ने गांधीनगर के एक कार रिपेयर सेंटर में अपनी टाटा नैनो कार को जून 2018 में रिपेयर के लिए दिया था। हालांकि, जब रिपेयर सेंटर के मालिक ने कार ले जाने को कहा तब वकील ने आरोप लगाया की कार की रिपेयरिंग ठीक से नहीं की गई है और कार के कई पुर्जे गायब हैं।

यह आरोप लगाते हुए वकील ने कार को वहीं छोड़ दिया और तब से कार रिपेयरिंग सेंटर के गैराज में लगी है। 2019 में वकील ने गांधीनगर उपभोक्ता फोरम में रिपेयर सेंटर के मालिक के खिलाफ धोखाधड़ी और लापरवाही करने की शिकायत दर्ज करवाई थी।

हालांकि, इस मामले में रिपेयर सेंटर का कहना था कि उनके तरफ से किसी भी तरह की धोखाधड़ी नहीं की गई है। उन्होंने कार को ले जाने के लिए वकील को 58 बार मेल भी किया था।

रिपेयर सेंटर के मालिक ने बताया कि वकील को कई बार नोटिस भी भेजा गया लेकिन उनके तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। इस वजह से उनकी टाटा नैनो दो साल से सर्विस सेंटर के गैराज में पड़ी हुई है।

रिपेयर सेंटर के मालिक ने वकील से 100 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से 910 दिनों के लिए पार्किंग चार्ज वसूलने की गुहार कोर्ट से लगाई। मामले की पूरी तरह जांच होने पर वकील के आरोपों को गलत पाया गया और फोरम ने 910 दिनों के लिए 91,000 रुपये का पार्किंग चार्ज देने का फैसला सुना दिया।

कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए टिप्पणी किया कि कानून सबके लिए बराबर और एक समान लागू होता है फिर वह कोई वकील क्यों न हो। कोर्ट ने बताया कि बिना सर्विस चार्ज का भुगतान किये कोई भी व्यक्ति उपभोक्ता नहीं कहलाता।

रिपेयरिंग के लिए दी गई कार का भुगतान किये बगैर सर्विस सेंटर पर छोड़ देने पर पार्किंग चार्ज ही लगाया जाता है। कोर्ट ने वकील को 9,900 रुपये के रिपेयरिंग चार्ज का भुगतान करने का भी आदेश दिया।
नोट: तस्वीरों का इस्तेमाल सांकेतिक तौर पर किया गया है


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