सिर्फ महामारी ही नहीं ‘कोरोना’ के नाम से बसें भी हैं उपलब्ध, जानिए इस भारतीय कंपनी के बारे में
आज हम बात करेंगे एक ऐसी बस मैन्युफैक्चरिंग कंपनी के बारे में जो भारत में हाई एंड बसों का निर्माण करती है। ये कंपनी न केवल भारतीय है बल्कि इसकी बनाई गई बसों में उतना ही लोकलाइजेशन है जितना की टाटा, अशोक लेलैंड या आयशर की बसों में होता है। भारत में बसों की मैन्युफैक्चरिंग करने वाली इस कंपनी के बारे में कम ही लोगों को पता है। सभी भारतीय कंपनियों की बसों से अलग इस कंपनी की बस में रियर इंजन कॉन्फिगरेशन का इस्तेमाल किया जाता है।

तेलंगाना में स्थित डेक्कन ऑटो (Deccan Auto) की बसें कोरोना की ब्रांडिंग के साथ बेचा जाता है। जी हां! संयोग से इन बसों की ब्रांडिंग विश्व भर में चल रही कोरोना महामारी के नाम पर की गई है। डेक्कन की बसें हैदराबाद में बनाई जाती हैं और इनमे लगने वाले इंजन से ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन तक, सभी को भारत में ही बनाया जाता है।

2004 में शुरू हुई इस बस कंपनी ने चीन की बस कंपनी जोंगटोंग से तकनीकी सहयोग के लिए साझेदारी की थी। इस साझेदारी के तहत इस चीनी कंपनी की कुछ बसों को भारत में असेंबल भी किया गया था। लेकिन कोरोना ब्रांड के तहत अब जितनी भी बसों का निर्माण किया जाता है उनमें भारत में बने पार्ट्स और उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है।

कोरोना बसों में लगने वाले इंजन को दिग्गज ऑटोमोबाइल कंपनी कमिंस से लिया जाता है। इन बसों में चेसी का इस्तेमाल न करके मोनोकॉक फ्रेम का इस्तेमाल किया जाता है जिसकी मैन्युफैक्चरिंग भी भारत में ही की जाती है। इसके अलावा बस के सस्पेंशन सिस्टम और ऐसी का निर्माण भी भारत में किया जाता है। कुल मिलकर यह कंपनी उतनी ही स्वदेशी है जितनी भारत में बानी महिंद्रा, टाटा और आयशर की बसें हैं।

बात करें भारत में इस कंपनी की मार्केट को लेकर, तो इस कंपनी को देश के कुछ चुनिंदा शहरों से ही बसों के आर्डर मिलते हैं। कंपनी की खराब मार्केटिंग स्ट्रेटजी की वजह से इस कंपनी का नाम बहुत कम लोग जानते हैं। मौजूदा समय में इंदौर में डेक्कन की कोरोना बसों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके अलावा कंपनी आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और गुजरात में भी बसों की डिलीवरी की थी।

कोरोना की बसों की बात करें तो, कंपनी चार तरह के मॉडलों का निर्माण करती है। इनमे स्काईपैक 009, स्काईपैक 009 बीआरडी, फॉर्च्यून 007 और मल्टायर प्लस स्लीपर जैसे मॉडल्स शामिल हैं। एयर सस्पेंशन के साथ आने वाली इन सभी बसों में क्यूमिंस के 5900cc के सुपर रिफाइंड इंजन का इस्तेमाल किया जाता है।

कोरोना उन कुछ शुरुआती भारतीय कंपनियों में शामिल थी, जिन्होंने यात्रियों की सेफ्टी को ध्यान में रखते हुए मोनोकॉक स्ट्रक्चर पर निर्माण की शुरुआत की थी। कोरोना की बसों में लो सेंटर ऑफ ग्रेविटी होने के चलते हाईवे पर भी ज्यादा स्टेबल मानी जाती हैं। रियर इंजन और हलके स्ट्रक्चर के चलते कोरोना की बसें फ्यूल एफ्फिसिएंट होती हैं।

डेक्कन ऑटो की कमजोर मार्केटिंग स्ट्रेटजी के चलते यह कंपनी मीडिया या न्यूज में काफी कम कम जगह बना पाई है। इसलिए अभी यह जानकारी उपलब्ध नहीं है कि मौजूदा समय में ये कंपनी मैन्युफैक्चरिंग कर रही है या नहीं।


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