हाई कोर्ट जज की कार को चुपके से ले गया पुलिसवाला, सड़क पर कर दिया क्रैश
जज का पद एक बड़ा पद होता है और हाई कोर्ट का जज हो तो उन्हें कई तरह की सुविधाएं भी मिलती है। हाई कोर्ट के जज को बहुत से गार्ड भी मिलते हैं और इस गार्ड की ड्यूटी में पुलिस वालों के लिए लगाया जाता है।
हाल ही में नागपुर में हाई कोर्ट के जज के घर पर नाईट ड्यूटी पर लगे महाराष्ट्र के एक कांस्टेबल को नौकरी से निकाल दिया गया है। दरअसल जब हाई कोर्ट के जज परिवार सहित घर पर नहीं थे तो यह पुलिसवाला उनकी कार को चलाने ले गया।

यह घटना 5 अप्रैल को बताई जा रही है जब यह पुलिसवाला कार को चलाने ले जाता है लेकिन कार का एक्सीडेंट हो जाता है लेकिन वह कार को वापस घर पर लाकर उसी जगह पर रख देता है। पुलिस ने कांस्टेबल अमित जिल्पे को दोषी पाया है।
महाराष्ट्र हाई कोर्ट के नागपुर बेंच के प्रोटोकॉल विभाग ने जस्टिस वाल्मीकि एसए मेंजेंस के वाहन में अज्ञात डैमेज को लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज की है। जब पुलिस ने जांच के दौरान सीसीटीवी फूटेज चेक किया तब सच्चाई सामने आ गयी।
फूटेज में देखा गया कि यह 32-वर्षीय कांस्टेबल हाई कोर्ट के जज के परिवार के जाने के कुछ देर बाद ही जज की कार को सिविल लाइन बंगले से बाहर लेकर गया। वह फुटाला लेक, वायुसेना नगर जैसे इलाकों में कार को लेकर गया।
एक बार इस कांस्टेबल ने कार को इलेक्ट्रिक पोल से टक्कर मार दी जिस वजह से वाहन के बांये दरवाजे पर डेंट पड़ गया। इसके बाद कांस्टेबल ने कार को ले जाकर चुपचाप रख दिया और कार को ले जाने या एक्सीडेंट के बारें में कुछ नहीं कहा।
इसके बाद अगले दिन बंगले के एक अन्य स्टाफ ने कार में हुए डैमेज को देखा। कार के ड्राईवर ने प्रोटोकॉल विभाग को जानकारी दी और लोकल सदर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज की। कार को रिपेयर के लिए भेजा गया और इसमें 2.28 लाख रुपये का खर्चा आया।
विभाग की जांच के बाद पता चला कि इसमें अमित जिल्पे का हाथ है, फिर पुलिस कमिश्नर अमित कुमार ने सोमवार को इस कांस्टेबल को सर्विस से हटाने का आर्डर जारी किया। इसके साथ ही जिल्पे से खर्च वसूलने के लिए कार्यवाही शुरू कर दी गयी है।
इस कांस्टेबल अमित जिल्पे की बात करें तो यह 2016 में सर्विस में आया था और लोक सभा चुनाव के दौरान 90 दिन से अधिक एब्सेंट रहने के लिए उन्हें सस्पेंड किया गया था। इस सर्विस रिकॉर्ड से पता चलता है कि वह गैर जिम्मेदार है।
*Images Representative


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