नए मुख्य न्यायाधीश रंंजन गोगोई के पास अपनी कार तक नहीं, लेकिन क्यों?
आज जस्टिस रंजन गोगोई ने देश के 46वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदभार संभाल लिया है। पदभार संभालने के पहले ही जस्टिस गोगोई ने अपनी संपत्ति को सार्वजनिक कर दिया था। जानकारी के मुताबिक जस्टिस रंजन गोगोई के पास अपनी कोई कार नहीं है और न ही उनके पास अपना कोई घर है। लेकिन ऐसा क्यों, बता दें कि रंजन गोगोई असम के पूर्व मुख्यमंत्री रहे और मां भी जानी-मानी सामाजिक कार्यकर्ता। खुद रंजन गोगोई ने लंबे समय तक गुवाहाटी हाइकोर्ट में वकीली की और बाद में हाइकोर्ट के जज, हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और अब सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बन चुके हैं। इतने संपन्न परिवार से आने और शानदार सफल करियर होने के बाद आज भी रंजन गोगोई के पास अपना कोई घर या कोई कार क्यों नहीं है, आइये जानते हैं।

जस्टिस रंजन गोगोई के पिता केशब चंद्र गोगोई कई बार असम सरकार में मंत्री रहे और 1982 में दो महिने के लिए मुख्यमंत्री भी। उनकी मां असम में समाजसेवी के रूप में जानी जाती हैं। हाल ही में रिलीज़ हुई एक किताब 'गुवाहाटी हाईकोर्ट, इतिहास और विरासत' में जस्टिस गोगोई के बारे में दावा किया गया है कि एक बार जस्टिस गोगोई के पिता केशब चंद्र गोगोई से उनके एक दोस्त ने पूछा कि क्या उनका बेटा भी उनकी ही तरह राजनीति में आएगा? इस सवाल पर जस्टिस गोगोई के पिता ने कहा कि उनका बेटा एक शानदार वकील है और उसके अंदर इस देश के मुख्य न्यायाधीश बनने की क्षमता है। सभी मां-बाप अपने बच्चों के बारे में ऐसी भविष्यवाणी करते हैं लेकिन रंजन गोगोई ने इसे सच कर दिखाया है।

रंजन गोगोई काफी और अनुशाशन प्रिय माने जाते हैं। वो लोगों से मीठा बोलते हैं लेकिन कोर्ट में वे काफी सख्त रहते हैं। लोग बताते हैं कि जज बनने से पहले भी कानूनी और कानूनी फैसलों का काफी गहराई से अध्यन करते थे। जस्टिस रंजन गोगोई ने 28 फरवरी 2001 को गुवाहाटी हाई कोर्ट के जज बने थे और 23 अप्रैल 2012 को सुप्रीम कोर्ट जज के रूप में शपथ ली थी और अब वो देश के मुख्य न्यायधीश बन गए हैं। इतने लंबे समय से जज होने के कारण उन्हें सरकारी गाड़ी, घर और अन्य सुविधाएं मिली हुई हैं। ऐसे में अनुमान है कि रंजन गोगोई को कभी घर या कार खरीदने की जरूरत नहीं महसूस हुई होगी। हालांकि जानकारी के मुताबिक रंजन गोगोई और उनकी पत्नि के बैंक अकाउंट में 30 लाख रुपए जरूर हैं, इसमें LIC की रकम भी शामिल है।

रंजन ने हाल ही में दिये घोषणापत्र में ये बताया था कि उनकी मां ने उनके और पत्नि के नाम एक जमीन लिख दी है जो पहले उनके नाम थी। इसके अलावा उनके पास एक जमीन और थी जिसे उन्होंने अपने वकालत के दिनों में खरीदा था, उसे भी वो 65 लाख रुपए में बेच चुके हैं।

क्यों चर्चा में रहे रंजन गोगोई?
वैसे तो नए चीफ जस्टिस को लेकर पुरे देश में उत्साह रहता ही है लेकिन रंजन गोगोई के मामले में ये कुछ खास है। क्योंकि रंजन गोगोई को लेकर काफी अटकलें लगाई जा रही थी कि उन्हें अगला चीफ जस्टिस बनाया जाएगा या नंबर दो होते हुए भी उन्हें दरकिनार कर दिया जाएगा। अब सारी अटकल बाजियों को विराम देते हुए रंजन गोगोई भारत के नए मुख्य न्यायधीश बन गए हैं। पूर्व मुख्य न्यायधीश 2 अक्टूबर 2018 को रिटायर हो गए और आज राष्ट्रपति ने रंजन गोगोई को नए चीफ जस्टिस को शपथ दिलाई। दरअसल रंजन गोगोई उन चार जजों में शामिल थे जिन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके पूर्व सीजेआई जस्टिस दीपक मिश्रा पर कोर्ट को तानाशाही तरीके से चलाने और कई सेंसेटिव केस को मनमानी तरीके से आवंटीत करने के लिए चिंता जाहिर की थी। इसके बाद लगातार कयास लगाए जा रहे थे कि रंजन गोगोई को सिनियर होते हुए भी दरकिनार किया जा सकता है। लेकिन अगले साल लोकसभा का चुनाव है और इस चुनावी साल में सरकार ये संदेश नहीं देना चाहती की वो कोर्ट के मामले में दखलअंदाजी कर रहे हैं।

कम नहीं हैं चुनौतियां
नए चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के सामने चुनौतियां कम नहीं हैं, इस बात को वो बखूबी जानते हैं और कई बार सार्वजनिक रूप से जाहिर भी कर चुके हैं। अब उनपर ये जिम्मेदारी होगी कि कोर्ट की प्रक्रिया में तेजी लाई जाई, पेंडिंग केसेस से जल्दी निपटा जाए, नए कोर्ट खोले जाएं ईत्यादि। हालांकि जस्टिस गोगोई का कार्यकाल ज्यदा लंबा नहीं होने वाला है क्योंकि 18 नवंबर, 2019 को वो रिटायर होंगे और इस बीच उन्हें काफी तेजी से काम करना है।


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