चेन्नई पहुंची देश की पहली ड्राइवरलेस मेट्रो ट्रेन, इन सुविधाओं से है लैस, जानें कब से शुरु होगी सर्विस

देश की पहली ड्राइवरलेस मेट्रो ट्रेन जल्द ही बेंगलुरु ट्रायल के लिए पहुंचेगी। चीन में बने कुछ ड्राइवर रहित प्रोटोटाइप कोच चेन्नई बंदरगाह पर पहुंच गए हैं। इनका इस्तेमाल बेंगलुरु मेट्रो (नम्मा मेट्रो) की येलो लाइन पर ट्रायल रन के लिए किया जाएगा।

छह प्रोटोटाइप कोचों के साथ बेंगलुरु मेट्रो येलो लाइन पर ट्रायल रन शुरु किया जाएगा। दरअसल, इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी के टेक हब को साउथ बेंगलुरु में आरवी रोड से जोड़ने वाली 19 किलोमीटर की येलो लाइन के सितंबर 2024 तक चालू होने की उम्मीद है।

Driverless Metro Train

इन ड्राइवरलेस मेट्रो कोचों का निर्माण चीन की सीआरआरसी नानजिंग पुज़ेन कंपनी लिमिटेड द्वारा किया गया है। कंपनी ने कोच बनाने के लिए बेंगलुरु मेट्रो रेल के साथ 1578 करोड़ रुपये का समझौता किया है।

बता दें कि ये डील साल 2019 में हुई थी। इसके तहत 216 मेट्रो कोच बेंगलुरु मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन को दिए जाने हैं। वर्तमान में चेन्नई बंदरगाह पर प्रोटोटाइप कोचों को कस्टम क्लीयरेंस के बाद बेंगलुरु के लिए रिलीज किया जाएगा।

रिपोर्ट की माने तो इसमें लगभग 5 दिन तक का समय लग सकता है। इसके बाद उन्हें भारी वाहनों से सड़क मार्ग से बेंगलुरू पहुंचाया जाएगा। इसमें 3 से 4 दिन और लग सकते हैं।

माना जा रहा है कि ये ड्राइवरलेस मेट्रो कोच 20 फरवरी से पहले बेंगलुरु पहुंच सकते हैं। बेंगलुरु पहुंचने के बाद, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक सिटी के पास हेब्बागोडी डिपो में ले जाया जाएगा।

मेट्रो कोच के लिए करीब 32 तरह के अलग-अलग टेस्ट किए जाते हैं। एक बार जब यह बेंगलुरु पहुंच जाएगी, तो लगभग तीन महीने तक टेस्टिंग की जाएगी। इनमें 8-10 स्टैटिक टेस्टिंग और 15 टेस्टिंग मेनलाइन में आयोजित किए जाएंगे।

इसके अलावा 7-8 इंटरपेस टेस्ट और कई डायनेमिक टेस्ट आयोजित किए जाने हैं। बता दें कि ये परीक्षण रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड ऑर्गेनाइजेशन की देखरेख में आयोजित किये जायेंगे।

बेंगलुरु मेट्रो के ड्राइवरलेस ट्रेन परीक्षण के नतीजे मुख्य रेलवे सुरक्षा आयुक्त समेत रेलवे बोर्ड को भेजने होंगे। वहां से अनुमति मिलने में करीब 5-6 महीने लगने की संभावना है। ड्राइवरलेस मेट्रो ट्रेन की असेंबली और टेस्टिंग की निगरानी के लिए चीन से 5 इंजीनियर पहले ही बेंगलुरु पहुंच चुके हैं।

फरवरी के अंत तक 10 और इंजीनियर बेंगलुरु पहुंचेंगे। चीनी कंपनी ने कहा कि समझौते के तहत एक कोच की आपूर्ति 7.31 करोड़ रुपये में की जाएगी। मई तक हर माह दो ट्रेनें बेंगलुरु आने की संभावना है।

रिपोर्ट की मानें तो बेंगलुरु में मेट्रो येलो लाइन शुरू करने के लिए कम से कम आठ ट्रेनों की जरूरत है। यह ड्राइवरलेस मेट्रो 90 सेकंड की फ्रीक्वेंसी के साथ चल सकती है। इस कोच की लंबाई 21 मीटर है और वजन 32 से 37 टन तक है।

इन ड्राइवर लेस ट्रेनों को चलाने के लिए टेक्नोलॉजी सिग्नल की आवश्यकता होगी। यह ट्रेन 80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती है। रिपोर्ट की मानें तो ये मेट्रो ट्रेनें ऑटोमैटिक टेक्नोलॉजी, जीपीएस, सिग्नल रीडिंग, टाइमिंग सीक्वेंस तकनीक के आधार पर चलेंगी।

Article Published On: Friday, February 9, 2024, 9:35 [IST]
English summary
Chinese made driverless train for testing in bangluru metro yellow line reaches in chennai
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