बेंगलुरु से चेन्नई अब सिर्फ एक घंटे में पहुंच सकेंगे आप! जल्द चलने वाली है हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन...
भारत का रेलवे सेक्टर बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसका उदाहरण वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनें हैं। वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों के बाद भारत बुलेट ट्रेन चलाने की भी तैयारी कर रहा है। भारत की पहली बुलेट ट्रेन मुंबई-अहमदाबाद के बीच चलेगी इसके लिए फिलहाल काम जोरों पर चल रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह बुलेट ट्रेन साल 2026 तक सफर शुरू कर देगी।
लेकिन भारत सरकार इस एक बुलेट ट्रेन से रुकने वाली नहीं है। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन के बाद चेन्नई-बैंगलोर-मैसूर रूट पर एक और बुलेट ट्रेन (चेन्नई-बैंगलोर-मैसूर बुलेट ट्रेन) चलाई जाएगी। यह कुछ ऐसा है जिसे हममें से बहुत से लोग पहले से ही जानते हैं। लेकिन अगर आप नहीं जानते हैं तो चलिए इसकी पूरी डिटेल्स जानते हैं।

दक्षिण भारत के इतिहास में मील का पत्थर माने जाने वाले इस बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को लेकर कई नई जानकारियां सामने आई हैं। यह बुलेट ट्रेन परियोजना 463 किमी की दूरी तय करेगी। यह बुलेट ट्रेन मौजूदा ट्रैक पर नहीं चल सकती। इसलिए इसके लिए अलग से ट्रैक बनाई जाएगी।
इस अलग रूट में फ्लाईओवर और सुरंग समेत तमाम सुविधाएं होंगी। मेट्रो ट्रेन इसका उदाहरण है। जिस तरह मेट्रो ट्रेनों के फ्लाईओवर और सुरंग के लिए जैसे अलग रूट होते हैं, उसी तरह यह बुलेट ट्रेन भी अलग रूट पर चलेगी।

यह मार्ग तीन राज्यों तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक से होकर गुजरेगा। इस बुलेट ट्रेन को तमिलनाडु में 132 किमी, आंध्र प्रदेश में 73 किमी और कर्नाटक में 258 किमी के साथ कुल 463 किमी की दूरी तय करेगी।
यह बुलेट ट्रेन कुल 11 जगहों पर रुकेगी। इसमें चेन्नई, पूनतमल्ली, चित्तूर, कोलार, कोडाहल्ली, व्हाइटफील्ड, बैयप्पनहल्ली, इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी, केंगेरी, मांड्या और मैसूर शामिल है। इस प्रोजेक्ट से न सिर्फ इन इलाकों को बल्कि आसपास के इलाकों के लोगों को भी फायदा होगा।

यह बुलेट ट्रेन 350 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने में सक्षम होगी। लेकिन सुरक्षा कारणों से ट्रेन अधिकतम 320 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी। हालांकि, हमें इसमें कोई संदेह नहीं है कि यह भी उच्च गति है।
इससे आप करीब 1 घंटे में चेन्नई से बेंगलुरु जा सकते हैं। वहीं, बेंगलुरु से मैसूर तक आप महज आधे घंटे में जा सकते हैं। चेन्नई से मैसूर तक कुल यात्रा का समय केवल 1.30 घंटा लगेगा।
ड्राइवस्पार्क की राय: यह बुलेट ट्रेन परियोजना दक्षिण भारत के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। लेकिन चूंकि यह एक भव्य योजना है, इसलिए इसे लागू होने में कई साल लगेंगे। लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं है कि इस बुलेट ट्रेन के आने के बाद तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक का विकास अगले स्तर पर चला जाएगा।


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