महज ढाई घंटे में चेन्नई से मैसूर पहुंचायेगी बुलेट ट्रेन
देश में बुलेट ट्रेन के आगमन की तैयारी जोरो से हो रही है। योजनाओं के अनुसार देश की पहली बुलेट ट्रेन मुंबई के थावें से अहमदाबाद के बीच चलेगी।
देश में बुलेट ट्रेन के आगमन की तैयारी जोरो से हो रही है। योजनाओं के अनुसार देश की पहली बुलेट ट्रेन मुंबई के थावें से अहमदाबाद के बीच चलेगी। वहीं इंडियन रेलवे इस समय चेन्नई वाया बेंगलुरु से मैसूर के बीच बुलेट ट्रेन चलाने की योजना बना रही है। इस योजना के मूर्तिरूप लेने के बाद चेन्नई और बेंगलुरु के बीच यात्रा तकरीबन 5 घंटे कम हो जायेगी, जिसके बाद बुलेट ट्रेन से ये दूरी महज 2 घंटे 25 मिनट में पूरी की जा सकेगी।

ये ट्रेन चेन्नई से बेंगलुरू होते हुए मैसूर तक जायेगी। यदि टाइम की बात करें तो चेन्नई और बेंगलुरू के बीच लगने वाला समय तकरीबन 100 मिनट तक कम हो जायेगा। इसके अलावा बेंगलुरू से मैसूर के बीच की यात्रा में 40 मिनट की कटौती देखने को मिलेगी। जर्मन सरकार ने इंडियन रेलवे को एक प्रपोजल रिपोर्ट सौंपी है। इस सर्वे रिपोर्ट में बताया गया है कि, 'इस मार्ग पर हाई स्पीड रेल चलाना संभव है। यहां हाई स्पीड रेल चलाना फायदेमंद रहेगा।

आपको बता दें कि, ये सर्वे पिछले 18 महीनों से किया जा रहा था। ये प्रोजेक्ट में चेन्नई-आराकोनम-बेंगलुरू-मैसूर रूट पर बुलेट ट्रेन चलाने के लिए तैयार किया गया है। देश की पहनी बुलेट ट्रेन जो कि मुंबई से अहमदाबाद के बीच चलायी जायेगी उसे जापान फंडिंग कर रहा है। इस प्रोजेक्ट को 2023 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं देश की दूसरी बुलेट ट्रेन परियोजना जिसे चेन्नई से मैसूर के बीच चलाने की बात की जा रही है उसे जर्मनी फंडिंग करेगा। इस प्रोजेक्ट को आगामी 2030 तक पूरा करने का प्रस्ताव रखा गया है।

गौरतलब हो कि, इस समय चेन्नई से मैसूर की दूरी वाया नेशनल हाइवे 48 से 9 घंटे में पूरी की जाती है। सड़क मार्ग द्वारा चेन्नई से मैसूर की दूरी तकरीबन 482 किलोमीटर है। वहीं चेन्नई से बेंगलुरू की दूरी 347 किलोमीटर है जिसे इसी हाइवे के माध्यम से 7 घंटे में पूरा किया जाता है।

इस प्रोजेक्ट की सर्वे रिपोर्ट जर्मन अम्बेस्डर मॉर्टिन के ने रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अश्विनी लोहानी को सौंपी है। इस रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि इस रूट पर बुलेट ट्रेन का संचालन आसानी से किया जा सकता है। यदि 320 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार वाली बुलेट ट्रेन को इस रूट पर संचालित किया जाता है तो वर्तमान में 7 घंटे की दूरी को 3 घंटे तक कम किया जा सकता है।

बताते चलें कि, प्रस्तावित मार्ग का 85% इलेवेटेड यानि कि उंचाई वाला होगा जबकि 11% हिस्सा टॅनल यानि कि सुरंग वाला होगा। अध्ययन में बताया गया है कि लागत और भूमि अधिग्रहण को कम करने के लिए मौजूदा रेलवे लाइनों का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, इस योजना को भारतीय रेलवे ने खारिज कर दिया था, जिसमें कहा गया था कि मौजूदा लाइनें इस तरह के बदलाव करने के लिए बहुत जटिल हैं। इससे नुकसान भी हो सकता है।

जर्मन सरकार ने बुलेट ट्रेनों के लिए संयुक्त और व्यक्तिगत रेल लाइनों दोनों की व्यवहार्यता का अध्ययन किया है। भारतीय रेलवे अधिकारियों के अनुसार, व्यक्तिगत रेलवे लाइनें ज्यादा बेहतर हैं। इस परियोजना के लिए सरकार को लगभग एक लाख करोड़ रुपये और रोलिंग स्टॉक के रूप में अतिरिक्त 150 करोड़ रुपये खर्च होंगे। फिलहाल इस प्रस्ताव की समीक्षा की जा रही है।

हालांकि बुलेट ट्रेन से यात्रा करना आपके समय की बचत तो करेगा लेकिन ये वर्तमान में टॉप क्लॉस एसी कोच से भी ज्यादा महंगा होगा। यानि कि इस समय आप चेन्नई से मैसूर के बीच यात्रा करने के लिए जितना पैसा फस्र्ट क्लॉस एसी के लिए खर्च करते हैं बुलेट ट्रेन से यात्रा करना और भी महंगा होगा। इस रूट के अलावा नई दिल्ली-मुंबई, दिल्ली-कोलकाता, दिल्ली-नागपुर, मुंबई-चेन्नई के बीच भी बुलेट ट्रेन संचालित करने की योजना पर विचार हो रहा है।

चेन्नई-बेंगलुरू-मैसूर बुलेट ट्रेन परियोजना पर ड्राइवस्पार्क के विचार:
बुलेट ट्रेन का संचालन इंडियन रेलवे का शुरू से सपना रहा है। भारतीय रेलवे एशिया की सबसे बड़ी रेलवे सर्विस प्रोवाइडर है। बुलेट ट्रेन के आ जाने के बाद इंडियन रेलवे के कंधे पर एक तमगा और भी लग जायेगा। फिलहाल सरकार और इंडियन रेलवे दोनों इस दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं। उम्मीद है कि इस परियोजना को समय रहते हरी झंडी मिलेगी और जर्मन सरकार इस प्रोजेक्ट को आगामी 2030 तक तय समय में पूरा कर सकेगी। इस समय देश भर में बुलेट ट्रेन के आगमन को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।

हालांकि कुछ लोगों का ये भी मानना है कि बुलेट ट्रेन के संचालन से पहले इंडियन रेलवे को अपनी सिक्योरिटी और ट्रैक्स को और भी बेहतर करना चाहिए। दरअसल ये बातें इसलिए की जा रही हैं क्योंकि आये दिन रेल हादसे होते रहते हैं।

लेकिन सरकार ने इस बात की पूरी तस्दीक की है कि इस प्रोजेक्ट को कम्पलीट सिक्योर रखा जायेगा जिससे किसी भी तरह के हादसे आदि की कोई भी संभावना नहीं होगी। जापानी कंपनी ने भी इस बात पर जिम्मेदारी लेते हुए मुहर लगाई कि बुलेट ट्रेन सुरक्षित है और इसका संचालन लाइफस्टाइल को और भी आसान बनायेगा।


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