चंद्रयान-3 से आज अलग होगा विक्रम लैंडर, जानें किस तारीख को हो सकता है चाँद पर लैंड
चंद्रयान-3, इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन का चाँद मिशन, अब अपने अंतिम चरणों में है और जल्द ही चंद्रमा पर लैंडिंग कर सकती है। चंद्रयान-3 ने चंद्रमा के ऑर्बिट में चक्कर लगा लिया है और अब प्रोपल्सन मॉडल से विक्रम लैंडर अलग होने वाला है।
आज विक्रम लैंडर चंद्रयान-3 के प्रोपल्सन मॉडल से अलग होकर चंद्रमा में लैडिंग नके लिए आगे बढ़ेगा। चंद्रयान-3 लूनर ऑर्बिट में लगातार घूमने के बाद अब लक्षित पोजीशन में आ चुकी है और अब विक्रम लैंडर द्वारा 23 अगस्त को सॉफ्ट लैंडिंग की कोशिश हो सकती है।

अलग होने के बाद लैंडर डीबूस्ट प्रोसेस से होकर गुजरेगा ताकि खुद को चंद्रमा के ऐसे ऑर्बिट में स्थापित कर सके जहां से चंद्रमा से न्यूनतम दूरी 30 किलोमीटर तथा अधिकतम दूरी 100 किमी ही हो। आखिरी लैंडिंग की कोशिश इसी ऑर्बिट से की जायेगी।
लैंडर के अलग होने की प्रक्रिया बहुत मुश्किल प्रक्रिया है, क्योकि इसके तहत लैंडर की वेलोसिटी को होरिजोंटल से वर्टिकल करना है। वहीं लैंडर की वेलोसिटी को भी कम करना चानौतिपूर्ण होगा। आज से 6 दिन बाद लैंडर को चाँद के साथ पर लैंड कराने की कोशिश की जायेगी।

चंद्रयान-3 मिशन को भारत में श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से 14 जुलाई को लॉन्च किया गया था। यह चंद्रमा के साउथ पोल में लैंड करने वाली है जो बहुत ही कम एक्सप्लोर किया गया है। इसके बाद वह साथ की स्टडी करने का काम करेगा।
आज मिलाकर चंद्रयान-3 ने कुल 34 दिन पूरे कर लिए है। 15 से 25 जुलाई के बीच चंद्रयान-3 ने धरती के पांच चक्कर लगाये थे। इसके बाद वह चंद्रमा के ऑर्बिट के लिए निकल गया था और अब चंद्रमा के ऑर्बिट में भी चक्कर पूरे कर लिए है।

चंद्रयान-3 में प्रोपल्सन मोड्यूल, एक लैंडर व एक रोवर है, जिसका उद्देश्य इंटर-प्लानेटरी मिशन के लिए जरूरी नए तकनीक विकसित व डेमो करना है। यह चंद्रयान का तीसरा मिशन है, इससे पहले चंद्रयान-1 व चंद्रयान-2 भी भेजा चुका है।
चंद्रयान-3 के लिए धरती से चंद्रमा तक पहुंचने का मिशन 42 दिन का है। चंद्रयान-3 में स्पेक्ट्रो-पोलिमेट्री ऑफ हैबिटेबल प्लानेटरी अर्थ पेलोड है जो चाँद के ऑर्बिट से धरती की स्पेक्ट्रल व पोलारिमीट्रिक गणना लेगा। इसके साथ ही कई रोवर द्वारा कई स्टडी की जायेगी।
इसरो ने बताया कि लैंडर को इस तरह से डिजाईन किया गया है कि यह चाँद के एक नियत जगह पर सॉफ्ट लैंडिंग कर सके व रोवर को रिलीज कर सके। इसके बाद रोवर कई जगह पर घूमकर चाँद के सर्फेस पर ऑन-साईट केमिकल परीक्षण करने वाला है।


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