Vehicle Crash Test: वाहनों की मजबूती जांचने के लिए बनेगी स्वदेशी क्रैश टेस्ट रेटिंग एजेंसी
भारत सरकार बहुत जल्द ही वाहनों के लिए स्वदेशी क्रैश टेस्ट रेटिंग एजेंसी का गठन कर सकती है। यह मौजूदा समय में चल रहे NCAP क्रैश टेस्ट रेटिंग के समान हो सकता है। हाल ही में केंद्रीय परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने ऑटोमोबाइल सेफ्टी इकोसिस्टम से संबंधित एक प्रेस कांफ्रेंस में भाग लिया, जिसमें उन्होंने जल्द ही वाहन सुरक्षा रेटिंग के लिए देश का पहला क्रैश टेस्ट रेटिंग एजेंसी का गठन करने की बात कही।

भारत सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने दुनिया भर में सिस्टम के अनुरूप सुरक्षा रेटिंग होने पर बोलते हुए कहा, "यह बहुत महत्वपूर्ण है कि कार निर्माता भारत में भी वैश्विक सुरक्षा मानकों का पालन करें, और इस कारण से, सरकार जल्द ही भारत एनसीएपी, एक स्वतंत्र कार दुर्घटना परीक्षण निकाय पेश करेगी, जो विभिन्न मानदंडों के आधार पर कार की सुरक्षा रेटिंग निर्धारित करेगी, और संयुक्त राज्य अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, यूरोपीय संघ और में चल रहे कार्यक्रमों के बराबर होगी। यह एक खरीदार को कार खरीदते समय एक सूचित निर्णय लेने में सक्षम करेगा।"

केंद्र सरकार देश में वाहन सुरक्षा के लिए स्टार रेटिंग सिस्टम बनाने के अलावा कारों में पीछे की बीच वाली सीट सहित सभी यात्रियों के लिए छह एयरबैग और तीन सूत्री सीटबेल्ट अनिवार्य करने पर भी काम कर रही है। भारत में मौजूदा सुरक्षा प्रोटोकॉल को पुराना और असंगत बताते हुए, गडकरी ने भारत में वाहनों के सुरक्षा मानकों में सुधार के लिए सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर दिया, हालांकि, इस मामले में उन्होंने जनता से भी सुझाव आमंत्रित किए हैं।

वर्तमान में, अधिकांश कारों में केवल आगे की सीटों के लिए तीन सूत्री सुरक्षा बेल्ट होते हैं, जबकि पीछे की सीटों में विमान की सीट बेल्ट के समान एक बेल्ट होती है जो कमर के ऊपर से पहनी जाती है। जानकारी के अनुसार, प्रस्तावित आदेश केवल यात्री कारों पर लागू होगा। इस कदम के पीछे का उद्देश्य भारत में निर्मित यात्री कारों की समग्र सुरक्षा रेटिंग बढ़ाना है। यह पाया गया है कि दुर्घटना की स्थिति में, ओवर-द-लैप सीट बेल्ट कम प्रभावी होते हैं, इस प्रकार दुर्घटना के समय पीछे की सीट पर बैठे व्यक्ति के लिए जोखिम बढ़ जाता है।

केंद्र सरकार जल्द ही जनता से सुझाव और टिप्पणियां प्राप्त करने के लिए एक मसौदा अधिसूचना जारी कर सकती है। फीडबैक के आधार पर परिवहन मंत्रालय मसौदा अधिसूचना जारी करने के एक महीने बाद आधिकारिक आदेश जारी करेगा।

वाई (Y)-आकार की सीट बेल्ट सबसे पहले स्वीडिश कार निर्माता वोल्वो द्वारा पेश की गई थी। इन सीट बेल्ट को ओवर-द-लैप वाले सीट बेल्ट की तुलना में अधिक सुरक्षित माना जाता है क्योंकि ये टक्कर के समय छाती, कंधों और पेट पर शरीर की ऊर्जा को समान रूप से फैलाते हैं, जिससे कम चोटें आती हैं।

हाल ही में सरकार ने सभी यात्री वाहनों के लिए छह एयरबैग अनिवार्य करने का भी प्रस्ताव रखा था। जनता से टिप्पणी लेने के लिए 14 जनवरी को इस संबंध में एक मसौदा अधिसूचना जारी की गई थी। यह आदेश इस साल 1 अक्टूबर से लागू होने की संभावना है।

भारत में सीट बेल्ट नहीं पहनना एक दंडनीय अपराध है। हालांकि, बड़े पैमाने पर पीछे बैठने वाले कार यात्री सीट बेल्ट का इस्तेमाल नहीं करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कार की सवारी को सुरक्षित बनाने के लिए सरकारी हस्तक्षेप तभी कारगर होगा जब पीछे बैठे यात्रियों को भी सीट बेल्ट न पहनने के लिए दंडित किया जाएगा।

एक सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, भारत में कारों की पिछली सीट पर बैठने वाले लगभग 90% यात्री बेल्ट नहीं लगाते हैं। सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने वाले गैर-लाभकारी संगठन 'सेवलाइफ' के अनुसार, विभिन्न राजमार्गों पर संगठन द्वारा कराए गए एक जांच में सामने आया कि 30% से अधिक घातक दुर्घटनाओं में पिछली सीटों पर बैठने वाले यात्रियों ने बेल्ट का उपयोग नहीं किया था।

सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) के अधिकारियों ने सहमति व्यक्त करते हुए सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इसे एक अच्छा कदम बताया, लेकिन मोटर वाहन नियमों के प्रवर्तन पर भी सवाल उठाया। सियाम ने कहा कि ऑटोमोबाइल निर्माता सरकार के निर्देशों का पालन करेंगे, लेकिन यह ज्यादा जरूरी है कि कार के अंदर सीटबेल्ट पहनने के लिए यात्रियों को जागरूक किया जाए।


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