Car Towing Jugaad In Mumbai: भारत में कार टोइंग का ऐसा जुगाड़, ट्रैफिक नियमों की उड़ी धज्जियां
भारत जुगाड़ से भरा देश है, लोग यहां पर हर काम को करने का एक देसी तरिका खोज ही लेते है। हालांकि कभी यह सही भी होते है तो कभी इनमें बहुत ही खतरा रहता है। हाल ही में लॉकडाउन के दौरान मुंबई की सड़कों पर कार टोइंग का जुगाड़ करते देखा गया है।

मुंबई में अभी भी लॉकडाउन को पूर्ण रूप से नहीं खोला गया है, ऐसे में कार रिपेयर या कार टोइंग जैसी सुविधा हर इलाके में उपलब्ध नहीं हो पायी है। अब ऐसे हालात में आपकी कार खराब हो जाए तो आप क्या करेंगे? आप शायद थोड़ा सा कंफ्यूज हो जाए लेकिन मुंबई के इस व्यक्ति ने खूब दिमाग लगाया है।

आप दो बाइक वालों से अपनी कार को पीछे से धक्का लगवाएंगे? ट्विटर पर दिवाकर शर्मा द्वारा व्यक्ति ने एक वीडियो शेयर किया है जिसमें मारुति वैगनआर को दो बाइक वालों द्वारा पीछे से धक्का लगाते देखा जा सकता है, कार को ठीक कराने ले जाया जा रहा है।

इस तरह का जुगाड़ इमरजेंसी के समय में भी ठीक नहीं है, ऐसे हालत में धक्का देने वालों को चोट लग सकती है। साथ ही मुंबई में जैसे ट्रैफिक वाले शहर में इस तरह की हरकत करना और भी खतरनाक हो सकता है, इससे सड़क पर चलने वाले दूसरे लोगों को भी खतरा रहता है।

इसके साथ ही पीछे धक्का दे रहे केटीएम बाइक सवार व स्कूटी सवार चालक ने हेलमेट भी नहीं पहनी है। सामने आये वीडियो में देखा जा सकता है कि इस दौरान सड़क पर कई कार आ जा रही है, ऐसे में लोगों को परेशानी तो हो ही रही है, साथ खतरा भी बढ़ जाता है।

ऐसे में कुछ लोग सोशल मीडिया पर इसे टैलेंट बता रहे है तो कई लोग भारत में सड़क सुरक्षा का मजाक बनाये जाने पर गुस्सा हो रहे हैं। इसके साथ ही इस तरह की हरकत करने व बिना हेलमेट चलने पर ट्रैफिक पुलिस का भी कोई डर इनमें नहीं दिख रहा है।

भारत में सड़क सुरक्षा को लगातार कई कदम उठाये जा रहे हैं लेकिन कुछ लोग अभी भी इस तरह की हरकत दिख रहे है। ट्रैफिक पुलिस भी ऐसे लोगों पर किसी तरह की फाइन नहीं लगा रही है जो कि ऐसे लोगों को थोड़ा और छूट दे देता है।

कुछ समय पहले ही देश के परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने यह कहा था कि वह देश में इस साल सड़क दुर्घटनाएं 25 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं, लेकिन सामने आती ऐसी तस्वीरों व ट्रैफिक पुलिस की नाकामी से ऐसे लक्ष्य पर संदेह होता है।

भारत में हर साल लगभग 5 लाख सड़क हादसे होते हैं, जिनमें करीब 1.5 लाख लोगों की मौत हो जाती है। सरकार का प्रयास है कि 31 मार्च 20221 तक इन आंकड़ों को 20-25 प्रतिशत तक नीचे लाया जायें। इसके लिए खतरनाक जगहों की पहचान करके उनमें सुधार किया जा रहा है।


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