आखिर क्यों दिया जाता है कार में ग्लवबॉक्स? क्या आप जानते हैं इसका इतिहास? जानें यहां
आज के समय में जब लोग कार खरीदते हैं तो उसके इंजन, परफॉर्मेंस, माइलेज, डिजाइन और फीचर्स सहित बहुत सी चीजों का ध्यान रखते हैं। लेकिन बहुत से लोग एक खास चीज पर ध्यान देना भूल जाते हैं और वो है कार का ग्लवबॉक्स। जब आपको कार में एक्स्ट्रा स्पेस की जरूरत होती है, तो कार का ग्लवबॉक्स काम आता है।

लेकिन जिस चीज को आप कार खरीदते समय कुछ हद तक नजरअंदाज कर देते हैं, क्या आप जानते हैं कि उसका अपना एक समृद्ध इतिहास है। आपमें से ज्यादातर लोगों को इसके इतिहास के बारे में नहीं पता होता, तो चलिए आज हम आपको बताते हैं कि आखिर इसका इतिहास क्या है।

क्या है ग्लवबॉक्स
लेकिन आगे बढ़ने से पहले आपको यह जानना जरूरी है कि आखिर एक ग्लवबॉक्स है क्या? आमतौर पर इसे लोग एक चौकोर होल के तौर पर जानते हैं, लेकिन यह उससे कहीं बढ़कर है। तकनीकी रूप से यह एक कार में एक सीलबंद या बिना मुहरबंद किया हुआ एक कंटेनर है।

मौजूदा समय में इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से आवश्यक वस्तुओं जैसे दस्तावेजों, खाद्य पदार्थों, चश्मे और बहुत कुछ अन्य चीजें रखने के लिए किया आता है। लेकिन इतिहास की बात करें तो ग्लवबॉक्स को एसी जगह के तौर पर डिजाइन किया गया था, जहां दस्तानों को रखा जा सके।

ग्लवबॉक्स के पीछे का इतिहास
तो अब इसके इतिहास के बारे में बात करते हैं। दरअसल 17वीं और 18वीं शताब्दी के अंत में कारों में छत नहीं हुआ करती थी। इसके बाद जब छतों को जोड़ा गया, तो खिड़कियां नहीं लगाई गईं थीं। इसके बाद जब खिड़कियों को लगाया गया तो कार में एयर कंडीशनर और हीटर नहीं थे।

इसके चलते उस दौरान कार को ड्राइव करना उतना आसान नहीं था। जिसके चलते तेज हवाओं, बदलते मौसम और ठंड से बचने के लिए दस्ताने की अच्छी जोड़ी रखी जाती थी। इन दस्तानों को रखने के लिए एक ऐसे डिब्बे की जरूरत थी, जिसमें ये सूखे और सुरक्षित रहे।

इस डिब्बे को ऐसे डिजाइन किया जाना था कि इसमें छींटे, बारिश और नमी न जाए, जिससे ये दस्ताने सूखे बने रहे। काफी समय की कोशिशों के बाद पहला ग्लवबॉक्स डिजाइन किया गया और इसे लिए एक स्टोरेज बॉक्स को इसका नाम ग्लवबॉक्स मिला।

20वीं शताब्दी के ग्लवबॉक्स
20वीं शताब्दी के दौरान कार निर्माता कंपनियों ने ऐसे ग्लवबॉक्स बनाने में सफलता पाई थी, जिनमें हीटिंग सिस्टम दिया गया था, क्योंकि उस दौरान ड्राइविंग के दौरान ग्लव्स पहनने का चलन था। यह चलन 1950-60 तक चला था। जिसके बाद कार निर्माताओं ने पेय पदार्थ रखने के लिए इंडेंटेशन के साथ ग्लव बॉक्स पेश करना शुरू कर दिया।

ग्लवबॉक्स का आधुनिकीकरण
भले ही ग्लवबॉक्स बहुत ज्यादा बदले नहीं हैं, लेकिन जिन उद्देश्यों के लिए इनका इस्तेमाल किया जाता है, उनका कोई अंत नहीं है। शायद यही कारण है कि कई निर्माताओं ने इसमें कई सारी चीजें जैसे सेल्फ, स्टीरियो कनेक्शन और यहां तक की चार्जिंग सॉकेट का भी विकल्प दिया है।


Click it and Unblock the Notifications








