क्या होगा जब कार के बुलेटप्रूफ ग्लास पर चढ़ेगी टोयोटा फॉर्च्यूनर, देखें हैरान करने वाला वीडियो
इन दिनों बाजार में कुछ ऐसी कार निर्माता कंपनियां हैं, जो अपने ग्राहकों की मांग पर बुलेटप्रूट कार बनाकर उन्हें डिलिवर करती हैं। बुलेटप्रूफ कार की सबसे खास चीज होती है, इसमें लगने वाली विंडस्क्रीन, क्योंकि यह विंडस्क्रीन कोई आम विंडस्क्रीन नहींं होती है, बल्कि बुलेटप्रूफ होती है।

यह विंडस्क्रीन इतनी मजबूत होती है कि किसी बंदूक की गोली को आसानी से रोक लेती है। लेकिन कुछ लोगों के दिमाग में सवाल आता है कि यह विंडस्क्रीन कितना दबाव झेल सकती है। क्या यह किसी कार का भार झेल सकती है।

तो ऐसा ही कुछ एक वीडियो में सामने आया है, जिसमें एक व्लॉगर एक बुलेटप्रूफ विंडस्क्रीन की मजबूती चेक रहा है। इस वीडियो में इस बुलेटप्रूफ विंडस्क्रीन पर एक महिंद्रा बोलेरो, एक ट्रैक्टर और एक टोयोटा फॉर्च्यूनर को चढ़ाया गया है।

यहां इस्तेमाल किया गया ग्लास 50 मिमी का बुलेटप्रूफ ग्लास है, जिसका मतलब है कि इसकी मोटाई 50 मिमी है। कांच एक एक्सपायर वाहन की विंडशील्ड से लिया गया लगता है। इसके चारों ओर रबर सीलेंट को लगाया गया है।

कांच की ताकत का परीक्षण करने के लिए इसके ऊपर से सबसे पहले महिंद्रा बोलेरो को गुजारा जाता है। बता दें कि महिंद्रा बोलेरो का वजन लगभग 1,600 किलोग्राम है। बोलेरो का राइड-साइड व्हील ग्लास के ऊपर से गुजरता है।

लेकिन इसके बाद भी इस ग्लास को एक खरोंच तक नहीं आती है। बोलेरो के गुजरने के बाद भी इस ग्लास को कोई भी नुकसान नहीं होता है। बोलेरो के बाद इस बुलेटप्रूफ विंडस्क्रीन के ऊपर से ट्रैक्टर को भी गुजारा जाता है।

ट्रैक्टर के चढ़ने से इसके सामने का पहिया कोई प्रभाव नहीं डाल पाता है, लेकिन वहीं ट्रैक्टर के पिछले पहिये को ब्रेक लगा-लगा कर चलाया जाता है, जिससे इस बुलेटप्रूफ विंडस्क्रीन की बीच की परतों में कुछ दरारें आ जाती हैं।
आपको बता दें कि ट्रैक्टर का वजन बोलेरो से लगभग 200 किलोग्राम ज्यादा होता है। इसके बाद आखिर में बारी आती है टोयोटा फॉर्च्यूनर की, जिसका वजन बोलेरो और ट्रैक्टर से काफी ज्यादा करीब 2,200 किग्रा होता है।

जब टोयोटा फॉर्च्यूनर ग्लास के ऊपर से गुजरती है, तो इस बुलेटप्रूफ विंडस्क्रीन को पूरी तरह से बिखेर देती है। यह ध्यान देने वाली बात यह भी है कि ऊपर बताए गए वाहनों के वजन को पूरी तरह से बुलेटप्रूफ ग्लास पर नहीं डाला गया था।

आपको बता दें कि वाहन के वाहनों के पूरे वजन को सभी चारों टायरों पर समान रूप से वितरित किया जाता है और इस टेस्ट के दौरान बुलेटप्रूफ ग्लास पर एक समय में एक ही टायर चढ़ रहा था।
Image Courtesy: MR. INDIAN HACKER


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