Budget 2024 से ऑटो इंडस्ट्री को क्या हैं उम्मीदें? इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए हो सकता है बजट में ये बड़ा ऐलान..
भारत में अधिक से अधिक इलेक्ट्रिक वाहन की बिक्री हो सकें, इसके लिए केंद्र सरकार सब्सिडी देकर जनता को प्रोत्साहित कर रही है। लेकिन FAME-2 अवधि के बाद, सरकारी सब्सिडी में भारी कटौती के कारण इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में कमी देखने को मिली है। अगर ऐसा ही चलता रहा तो देश को कार्बन मुक्त बनाने का सरकार का लक्ष्य हासिल करना मुश्किल हो जाएगा।
तो अब FAME-3 की घोषणा के साथ, आगामी बजट में इलेक्ट्रिक वाहनों के बुनियादी ढांचे पर उम्मीदें अधिक हैं। इस बार 23 जुलाई को बजट 2024 पेश किया जायेगा। ऐसे में चलिए जानते हैं कि आगामी बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री से क्या कुछ उम्मीदें हैं।

उम्मीद है कि FAME-III (Faster Adoption and Manufacturing of Electric Vehicles.) सब्सिडी स्कीम की शुरुआत कर दी जाएं, जिससे देश की इलेक्ट्रिक व्हीकल इंडस्ट्री को तेजी से आगे बढ़ाया जा सकें। बता दें कि जून 2024 में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बिक्री में गिरावट देखने को मिली है।
उम्मीद जताई जा रही है कि आगामी बजट में बैटरी इकाइयों को स्थानीयकृत करने के लिए प्रोत्साहन, तरजीही ऋण योजना का कार्यान्वयन, FAME-3 नीति की घोषणा, चार्जिंग बुनियादी ढांचे के लिए धन का आवंटन, ईवी चार्जिंग सेवाओं पर जीएसटी दरों में कमी आदि की जा सकती है।

इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के निर्माताओं का प्रतिनिधित्व करने वाली सोसाइटी ऑफ मैन्युफैक्चरर्स ऑफ इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (SMEV) का मानना है कि केंद्र सरकार को FAME 2 अवधि के बाद (जो कि 31 मार्च 2024 तक था) इलेक्ट्रिक दोपहिया और तिनपहिया सेगमेंट में गिरावट को देखने की जरूरत है।
इस मामले पर बोलते हुए SMEV के अध्यक्ष आरके मिश्रा ने कहा कि इलेक्ट्रिक टैक्सियों और इलेक्ट्रिक वाणिज्यिक वाहनों को बढ़ाने के लिए कई विशेष उपाय करने की जरूरत है।
ईवी चार्जिंग और स्वैपिंग बुनियादी ढांचे के तेजी से विस्तार को प्रोत्साहित करने के लिए बैटरी पैक पर जीएसटी 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत किया जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि सार्वजनिक चार्जिंग पर लागू जीएसटी दरों को कम करने और जीएसटी असमानता को ठीक करने की जरूरत है।
वहीं ऑटो उद्योग का मानना है कि इलेक्ट्रिक घटकों पर कस्टम ड्यूटी कम करने और बैटरी प्रौद्योगिकी में अनुसंधान एवं विकास को प्रोत्साहित करने से स्थानीय विनिर्माण में तेजी आएगी और नौकरियां पैदा होंगी।


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