भारतीय सेना को मिला कल्याणी एम4 बख्तरबंद वाहन, 50 किलो आईईडी विस्फोट भी कुछ बिगाड़ न पाएगा इसका
भारत फोर्ज ने भारतीय सेना को भारत में बने कल्याणी एम4 बख्तरबंद वाहन की 16 यूनिट्स भेजी हैं। इसका उपयोग संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना के लिए किया जाएगा। कल्याणी एम 4 एक अत्याधुनिक बख्तरबंद कार्मिक वाहक है। इसके बारे में दावा किया जाता है कि यह गंभीर माइन विस्फोटों, ग्रेनेड के हमले जैसे खतरों से पूरी तरह सुरक्षा प्रदान करता है।

कल्याणी एम4 एक क्विक रिएक्शन फाइटिंग वाहन है जो फुल कॉम्बैट गियर में एक इन्फैंट्री प्लाटून को ले जाने में सक्षम है। कंपनी का कहना है कि वाहन ने भारत के कुछ सबसे कठिन वातावरणों में कठिन परीक्षणों की एक सीरीज को सफलतापूर्वक पूरा किया, जिसमें लेह और लद्दाख के ठंडे इलाके और न भूले जाने वाला कच्छ का रण रेगिस्तान शामिल हैं।

कल्याणी एम4 का कॉम्बैट रेडियस लगभग 800 किलोमीटर है, जो सभी प्रकार के इलाकों में कम से कम समय में लड़ाकू शक्ति को बढ़ाने में मदद करेगा। यह आधुनिक मिलिट्री-ग्रेड पावर से लैस है जो हर समय चौकन्ना रखेगा।

वाहन में ऐसी क्षमता है कि यह अपने पहियों के नीचे तीन 10 किलो टीएनटी चार्ज और एक तरफ 50 किलो आईईडी विस्फोट का झेल सकता है। कल्याणी समूह के रक्षा व्यवसाय प्रमुख कर्नल राजिंदर भाटिया (सेवानिवृत्त) के मुताबिक यह क्षमता यह चालक दल और पैदल सेना के सैनिकों के लिए STANAG-3 रेटेड सुरक्षा के बराबर है।

पैदल सेना के सैनिकों को जंगलों और मिट्टी की सड़कों में दबे विस्फोटक उपकरणों से बचते हुए इसमें 10 सैनिक सुरक्षित यात्रा कर सकते हैं। यह आधुनिक प्रकाशिकी और दृष्टि उपकरणों से लैस है जो चालक दल को चौकन्ना रखने में मदद करते हैं। यह एपीसी कमिंस के 460 हॉर्सपावर के इंजन पर बेस्ड है।

हाल ही में, भारतीय सेना की उत्तरी कमान ने चीन-भारत सीमा के बीच अपने बख्तरबंद वाहनों के बेड़े में कल्याणी एम4 को शामिल किया। इसके पहले पुणे स्थित भारत फोर्ज ने भारतीय सेना को एम्बुलेंस और कमांड पोस्ट वाहन भी उपलब्ध कराए थे।

भारत फोर्ज लिमिटेड के उप प्रबंध निदेशक, श्री अमित कल्याणी ने कहा, "चालक दल की सुरक्षा और प्रदर्शन के लिहाज से कल्याणी एम 4 को एर्गोनॉमिक डिजाइन दिया गया है ताकि चालक दल अपने काम को बहुत ही अच्छे तरीके से कर सके।"

भारत की सेना का दुनिया भर में संयुक्त राष्ट्र शांति अभियान (यूएनपीकेओ) में सबसे ज्यादा योगदान करने का रिकॉर्ड है। 1961 में कांगो के विद्रोहियों के साथ युद्ध में कैप्टन गुरबचन सिंह सलारिया ने वीरता का प्रदर्शन किया था, जिसेक बाद उनको सर्वोच्च वीरता पुरस्कार, परम वीर चक्र से पुरस्कृत किया गया था। यहां तक कि कुछ समय पहले तक, भारतीय दल अंतरराष्ट्रीय शांति अभियानों में जाते थे।


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