मुंबई की सड़कों में जल्द दौड़ेंगी 2,000 इलेक्ट्रिक बसें, डीजल बसों को किया जाएगा बाहर
मुंबई की बेस्ट (BEST) सार्वजनिक परिवहन सेवा जल्द ही शहर में 1,900 इलेक्ट्रिक बसों को उतारने वाली है। इन बसों को पुराने हो चुके डीजल बसों के जगह पर काम में लाया जाएगा। मुंबई की सड़कों में पहले से ही 386 पूरी तरह इलेक्ट्रिक बसें चल रही हैं। अब नए बसों के जुड़ने से मुंबई अपनी परिवहन प्रणाली में सबसे ज्यादा इलेक्ट्रिक बसों को शामिल करने वाला पहला शहर होगा।

महाराष्ट्र सरकार राज्य के अन्य जिलों की परिवहन प्रणाली में इलेक्ट्रिक बसों को जल्द शामिल करने की योजना बना रही है। महाराष्ट्र के पर्यावरण मंत्री, आदित्य ठाकरे ने ट्वीट कर कहा, "मुझे खुशी है कि बेस्ट ने 1,900 इलेक्ट्रिक बसों का आर्डर दिया है। वर्तमान में मुंबई में 386 इलेक्ट्रिक बसें चलाई जा रही हैं। जल्द ही राज्य के अन्य शहरों में भी इलेक्ट्रिक बसों को उतारने का काम शुरू किया जाएगा।"

अपनी इलेक्ट्रिक वाहन नीति के हिस्से के रूप में, राज्य सरकार का लक्ष्य सड़क परिवहन निगम (MSRTC) के मौजूदा बस बेड़े में 15 प्रतिशत बसों को इलेक्ट्रिक में बदलना है। इलेक्ट्रिक वाहन नीति का उद्देश्य 2025 तक ई-कॉमर्स कंपनियों, डिलीवरी, लॉजिस्टिक्स जैसे फ्लीट एग्रीगेटर्स द्वारा संचालित कम से कम 25 प्रतिशत वाहनों को इलेक्ट्रिक में बदलना है।

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य को सबसे ज्यादा ईवी का उपयोग करने वाले शीर्ष राज्यों में शामिल करने का लक्ष्य बनाया है। इसके लिए सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन दे रही है। सरकार ने मार्च 2025 तक सभी नए वाहन पंजीकरण में 10 प्रतिशत इलेक्ट्रिक वाहनों का लक्ष्य रखते हुए अपनी ईवी नीति के लिए 930 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है।

सरकार राज्य के सात प्रमुख शहरों और चार राष्ट्रीय राजमार्गों में 2,375 सार्वजनिक और अर्ध-सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन विकसित करने की भी योजना बना रही है। इससे पहले अगस्त में, आदित्य ठाकरे ने मुंबई में कोहिनूर भवन में एक ईवी सक्षम पार्किंग स्थल का उद्घाटन किया था।

पीएलआई योजना में इलेक्ट्रिक वाहनों को प्राथमिकता
केंद्र सरकार ने हाल ही में ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए 26,000 करोड़ रुपये के उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना को मंजूरी दी है। पीएलआई स्कीम का मुख्य लक्षय स्वच्छ ऊर्जा से चलने वाले वाहनों को बढ़ावा देना है। इसमें बैटरी से चलने इलेक्ट्रिक वाहनों के साथ-साथ हाइड्रोजन फ्यूल पर चलने वाले वाहनों को लक्षित किया गया है।

बता दें कि घरेलू निर्माण को बढ़ावा देने और आयात में कटौती करने के लिए केंद्र सरकार ने पीएलआई योजना (PLI Scheme) को शुरू किया है। इसका कंपनियों को प्रोत्साहन देकर घरेलू उत्पादन को बढ़ाने के लिए प्रेरित करना है। इसके लिए केंद्रीय बजट 2020-21 में सरकार ने 13 उद्योग क्षेत्रों के लिए 1.97 लाख करोड़ रुपये की पीएलआई योजना की घोषणा की थी।

वर्तमान में ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री पूरी तरह घरेलू बाजार पर निर्भर नहीं है। भारत में बनाने वाली गाड़ियों के कई उपकरण चीन से मंगाए जाते हैं। ऐसे में भारत को इलेक्ट्रिक वाहन (EV) क्षेत्र में ग्लोबल लीडर बनाने के लिए चीन पर निर्भरता कम करनी होगी।
नोट: तस्वीरों का उपयोग सांकेतिक तौर पर किया गया है।


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