Bengaluru Suburban Rail Project से ट्रैफिक की समस्या होगी खत्म, जानें कैसे और क्या है ये प्रोजेक्ट
Bengaluru Suburban Rail Project: बेंगलुरु की ट्रैफिक समस्या से भला कौन अवगत नहीं है। यही वजह है कि यहां डबल डेकर पूल से लेकर लगातार सड़कों का विस्तार किया जा रहा है। साथ ही यहां मेट्रो लाइन के विस्तार का काम भी लगातार जारी है। अब इसी कड़ी में बेंगलुरु उपनगरीय रेल परियोजना (Bengaluru Suburban Rail Project, BSRP) को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है।
Bengaluru Suburban Rail Project शहर की यातायात समस्याओं से निपटने के लिए सरकार की एक बहुत ही महत्वपूर्ण योजना है। यह नया ट्रेन प्रोजेक्ट बेंगलुरु और इसके आसपास के क्षेत्रों के विभिन्न हिस्सों को जोड़ेगा, जिससे रोजाना की यात्रा आसान हो जाएगी। चलिए इस प्रोजेक्ट के बारे में विस्तार से जानते हैं।

Bengaluru Suburban Rail Project के बारे में जानकारी: इस परियोजना का लक्ष्य चार रेलवे कॉरिडोर को विकसित करना है। उम्मीद है कि यह पूरी तरह से तैयार होने के बाद रोजाना लगभग 9.8 लाख यात्रियों को बैंगलोर से उसके आसपास के उपनगरो से जोड़ने का काम करेगी।
जैसा कि हमने ऊपर बताया कि इस परियोजना के तहत चार कॉरिडोर बनाएं जायेगें। इसमें पहला कॉरिडोर संपीगे(Sampige), दुसरा मल्लिगे (Mallige), तीसरा पारिजात (Parijatha) और चौथा कनक (Kanaka) है। चलिए इस चारों कॉरिडोर की खासियत जानते हैं।

1. संपीगे(Sampige): यह मार्ग KSR बेंगलुरु से देवनहल्ली तक चलेगा, जो 41 किलोमीटर की दूरी तय करेगा। यह Kempegowda अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से भी जुड़ेगा, जिससे एयरपोर्ट जाने वालों यात्रियों के लिए सुविधाजनक होगा।
2. मल्लिगे (Mallige): यह मार्ग बेंगलुरु के पूर्वी और उत्तरी भागों में यात्रा को बेहतर बनाने में मदद करेगा। यह बैयाप्पनहल्ली (Baiyappanahalli) से चिक्कबनवारा (Chikkabanavara) तक जाता है और 25.14 किलोमीटर लंबा है।
3. पारिजात (Parijatha): इस 35.52 किलोमीटर के रास्ते से केंगरी को वाइटफ़ील्ड से जोड़ा जाएगा, जो आईटी कंपनियों का हब है। इस रास्ते से बहुत सारे IT कर्मचारियों को फायदा होगा।
4. कनक (Kanaka): यह सबसे लंबा कॉरिडोर होने वाला है जो हीलालीगे से राजनकुंटे तक 46.24 किलोमीटर तक फैला होगा। इस लाइन के दिसंबर 2026 तक तैयार होने की उम्मीद है, जो उत्तरी और दक्षिणी उपनगरों की सेवा करेगी।
Bengaluru Suburban Rail Project की लागत: सभी चार कॉरिडोर को कवर करने वाली पूरी परियोजना की अनुमानित लागत 15,767 करोड़ रुपये है। यह परियोजना 148.17Km की दूरी तय करेगी और इसमें कुल 57 स्टेशनों के साथ 4 मुख्य मार्ग होंगे।
हालांकि इस परियोजना को बनने में देरी हो रही है लेकिन जब ये बनकर तैयार हो जायेगी तो इससे ट्रैफिक की समस्या कम होगी। उम्मीद है कि 2026 तक कॉरिडोर 2 मल्लिगे (Mallige) और कॉरिडोर 4 कनक (Kanaka) बनकर तैयार होगा। इन दोनों कॉरिडोर की कुल लागत 1,900 करोड़ से अधिक है।
अभी हाल ही में केंद्रीय रेल राज्यमंत्री वी. सोमन्ना ने बेंगलुरु उपनगरीय रेल परियोजना (Bengaluru Suburban Rail Project, BSRP) के दो कॉरिडोर (2 और 4) को पूरा करने की समयसीमा को बढ़ाकर नयी समयसीमा निर्धारित किया है। इसके लिए नई समयसीमा अब दिसंबर 2026 निर्धारित की गई है।
इसके साथ ही केंद्रीय रेल राज्यमंत्री वी. सोमन्ना ने बताया कि कॉरिडोर 1 और 3 के लिए समय-सीमा अगले तीन महीनों में तय कर दी जाएगी। बता दें, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जून 2022 में अगस्त 2025 तक इसे पूरा करने के वादे के साथ लॉन्च किया था।
लेकिन इस परियोजना में देरी होने के कई सारे कारण हैं जिसमें फंडिंग के मुद्दे, भूमि अधिग्रहण में देरी सहित कई समस्याएं है। बेंगलुरू उपनगरीय रेल परियोजना से निवासियों के दैनिक आवागमन में काफी वृद्धि होगी, साथ ही बेंगलुरू के आसपास के प्रमुख क्षेत्रों के बीच संपर्क भी बढ़ेगा।
अतिरिक्त रेलवे परियोजनाएं: बेंगलुरू उपनगरीय रेल परियोजना के अलावा, रेलवे की अन्य पहलों का उद्देश्य औद्योगिक क्षेत्रों और बंदरगाहों के बीच संपर्क बढ़ाना है। इनमें बेंगलुरु-मंगलुरु और हुबली-अंकोला जैसी लाइनों पर ट्रैक दोहरीकरण परियोजनाएं शामिल हैं, जो मंगलुरु और कारवार बंदरगाहों तक पहुंच में सुधार करेंगी।


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