मोटरिंग के लिए भारत का चौथा सबसे खतरनाक शहर है बेंगलुरू, जानिए कैसे?
भारी मॉनसून बारिश के कारण सड़कों पर हजारों क्रैटर छेद हो गए हैं जिससे यहां दुर्घटना हो रही है। इसके विरोध में बंगलुरू वासियों ने सड़क पर प्रदर्शन भी किया है। आइए विस्तार से जानते हैं।
बंगलुरू को भारत की सिलिकॉन वैली कहा जाता है और सांस्कृतिक, तकनीक और उद्योग धंधों के लिहाज से भी इस शहर का नाम देश के सबसे उम्दा शहरों शुमार किया जाता है लेकिन इतनी सम्पन्नता होने के बावजूद यह शहर आज अपने मूलभूत समस्याओं को लेकर जूझ रहा है।

इकोनामिक्स टाइम्स ऑटो की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारी बारिश के कारण यहां की सड़कों में काफी गढढ़े हो गए हैं और अब यह इतना जानलेवा हो गया है कि लोगों को इसके विरोध में सड़कों पर उतरते हुए देखा जा सकता है।
इकोनामिक्स टाइम्स ने एएफपी के हवाले से बताया कि इस साल बेंगलुरू की सड़कों पर नेविगेट करने वाले करीब 500 लोगों की मौत हो गई है, जिसके यह शहर भारत में यात्री वाहन चालकों के लिए चौथा सबसे घातक शहर बन गया है।

इस समस्या के बारे में स्थानीय अधिकारियों ने शहर की कुछ सड़कों के व्यवहार बदलने का कारण और हाल-फिलहाल हुई असामान्य बारिश को दोषी ठहराया है और अपना सारा ठिकरा बरसात पर ही फोड़ दिया है जबकि अब इन गढ़्ढ़ों के कारण यहां पर दुर्घटनाएं होना अब आम हो गया है।
इस बारे में बेंगलुरू नगरपालिका के आयुक्त एन. मंजूनाथ प्रसाद ने एएफपी को बताया कुछ दिनों में सड़कों गड्ढे से होने वाली दुर्घटनाओं में कुछ मोटरसाइकिलियों ने अपना जीवन गंवा दिया है लेकिन हम इस समस्या के समाधान के लिए कार्य कर रहे हैं।
वहीं दूसरी ओर एक स्थानीय कलाकार ने इन गढ्ढ़ों पर लोगों का ध्यानाकर्षण करने के लिए इन्हें कलर से चारों ओर ढ़क दिया है। प्रसाद का दावा है कि शहर के कर्मचारियों ने हाल के हफ्तों में कुछ 95,000 गड्ढे भर दिए गए हैं लेकिन लोगों का आरोप है कि अधिकारी अपना कार्य ठीक से कर नहीं रहे हैं।
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खराब सड़कों से बहोने वाली मौतों के मामले में केवल बेंगलुरू ही नहीं बल्कि देश के कई अन्य शहर भी शामिल हैं और भारत में सड़क दुर्घटना में हर साल 230,000 लोगों की मौत हो जाती है। इसलिए इस बारे में सरकार से लेकर समाज तक को एक निर्णायक पहल करने की आवश्यकता है।


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