इस साल के अंत में आएगी बैटरी स्वैपिंग नीति, केंद्र सरकार तैयार कर रही है प्रसताव
केंद्र सरकार इस साल के अंत तक इलेक्ट्रिक वाहनों से जुड़ी बैटरी स्वैपिंग नीति (battery swapping policy) की घोषणा कर सकती है। नीति आयोग के एक उच्चाधिकारी ने मीडिया को सूचित किया कि इस साल दिसंबर तक बैटरी स्वैपिंग नीति से जुड़े प्रस्ताव को पेश किया जा सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्र सरकार 10 लाख से ज्यादा जनसंख्या वाले शहरों में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के लिए चार्जिंग और बैटरी स्वैप स्टेशन स्थापित करेगी। रेलवे और मेट्रो स्टेशन के आस-पास वाले इलाकों में चार्जिंग पॉइंट्स को शुरू करने में प्राथमिकता दी जाएगी।

क्या है बैटरी स्वैपिंग?
आजकल इलेक्ट्रिक वाहनों में अलग होने वाली बैटरी यानी डिटैचेबल बैटरी दी जा रही है। इस तरह की बैटरी को इलेक्ट्रिक वाहन से निकाल कर चार्ज किया जा सकता है या फुल चार्ज बैटरी से स्वैप भी किया जा सकता है, जो चार्जिंग में लगने वाले समय की बचत करता है। जब बैटरी डिस्चार्ज हो जाती है, तो वाहन मालिक इसे स्वैपिंग स्टेशन पर पूरी तरह से चार्ज की गई बैटरी से बदल सकता है। इससे चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की समस्या का समाधान होगा और इलेक्ट्रिक वाहन चालकों की रेंज की चिंता भी कम होगी।

देश में बाउंस जैसी इलेक्ट्रिक स्कूटर कंपनी अपने ग्राहकों को सब्सक्रिप्शन के तौर पर बैटरी दे रही है। इससे बाउंस स्कूटर ग्राहक कंपनी के किसी भी स्वैप स्टेशन पर जाकर बैटरी को बदल सकता है। इसके लिए उसे सिर्फ स्वैपिंग के शुल्क का भुगतान करना होगा, जो चार्जिंग की दर से काफी सस्ता है।

बैटरी स्वैपिंग कैसे करता है काम?
एक ईवी मालिक बैटरी स्वैप पार्टनर के किसी भी आउटलेट पर जा सकता है और डिस्चार्ज बैटरी को पूरी तरह से चार्ज बैटरी से बदल सकता है। उसे इसके लिए बस बैटरी के सर्विस शुल्क का भुगतान करना होता है। यह प्रणाली उसी तरह है जैसे उपभोक्ता एलपीजी सिलेंडर का उपयोग करते हैं।

एक इलेक्ट्रिक स्कूटर की बैटरी को स्वैप करने में लगने वाला समय एक बाइक में पेट्रोल भरवाने के समय जितना है। हालांकि, पेट्रोल वाहनों में किसी भी पेट्रोल पंप पर ईंधन भरा जा सकता है, जबकि बैटरी स्वैप करने के लिए ईवी ग्राहक को एक निश्चित ऑपरेटर के पास जाना होगा।

सरकार कैसे प्रोत्साहन देने की योजना बना रही है?
केंद्र सरकार ने 1 फरवरी को पेश किये गए बजट 2022-2023 में बैटरी स्वैपिंग नीति लाने की घोषणा की है। इस नीति में तीन पहिया इलेक्ट्रिक वाहन, इलेक्ट्रिक स्कूटर और मोटरसाइकिल के लिए बैटरी स्वैप सेवाओं पर ध्यान केंद्रित करने की संभावना है। नीति के तहत ईवी मालिकों को बैटरी के सब्सक्रिप्शन या लीज पर 20 फीसदी तक का इंसेंटिव मिल सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रोत्साहन स्वच्छ वाहन खरीदने के लिए दिए जाने वाले प्रोत्साहनों से अधिक होगा।

खराब बैटरी का क्या होता है?
एक रिपोर्ट के अनुसार, 2021 और 2030 के बीच 12 मिलियन टन से अधिक लिथियम-आयन बैटरी के समाप्त होने की संभावना है। बैटरियों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे माल जैसे लिथियम, निकल और कोबाल्ट की आवश्यकता होती है जिसके खनन से पर्यावरण पर प्रभाव पड़ता है। खराब बैटरी से बहुत सारा इलेक्ट्रॉनिक कचरा निकलता है इसलिए इन्हें ठीक तरह से रीसायकल करने की जरूरत होती है।

खराब बैटरियों को रीसायकल कर बड़े पैमाने पर मूल्यवान धातुओं को निकाला जाता है। रीसायकल की गई बैटरियों का इस्तेमाल दोबारा वाहनों में नहीं किया जाता, लेकिन इनका उपयोग सौर या पवन पॉवर प्लांट से उत्पन्न अतिरिक्त बिजली के भंडारण के लिए किया जाता है।


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