Battery Swapping Policy: वित्त मंत्री ने बैटरी स्वैपिंग नीति की घोषणा, जानें क्या होगा लाभ
आज बजट में देश की वित्त मंत्री बैटरी स्वैपिंग नीति की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को ध्यान में रहते हुए बैटरी स्वैपिंग नीति लाने वाली है और इसकी तकनीक व स्टेशन में प्राइवेट कंपनियों की भागीदारी को बढ़ावा दिया जाएगा। यह देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना का काम करेगा। साथ ही सार्वजनिक परिवहन में भी इलेक्ट्रिक वाहन भी बढ़ जाएगा।

इसके साथ ही वित्त मंत्री ने कहा कि क्लीन तकनीक व इलेक्ट्रिक वाहनों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट में बढ़ाया जाएगा। यह देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग बढ़ाने में मदद करेगा, इसके साथ ही ईवी के सबसे बड़े उपकरण बैटरी के मांग को भी बढ़ाएगा। ऐसे में ईवी के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए बैटरी स्वैपिंग एक आसान और बेहतर तरीका है जिसका उपयोग दुनिया के कई देशों में किया जाता है।

देश में वर्तमान में ईवी के क्षेत्र में धीरे-धीरे बढ़त हो रही है लेकिन चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर एक बड़ी कमी के रूप में सामने आती है। ऐसे में बैटरी स्वैपिंग एक ऐसी तकनीक है जिससे चार्जिंग की जरूरत नहीं होती है और यात्री बिना देरी के इलेक्ट्रिक वाहन में अपनी यात्रा जारी रख सकते हैं। इस वजह से भारत सरकार ने बैटरी स्वैपिंग नीति तैयार करने की घोषणा की है।

दोपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों में रेंज की समस्या भी इसके तेजी से ना बढ़ने का कारण है और अगर ऐसे में पर्याप्त स्थानों पर बैटरी स्वैपिंग स्टेशन होने पर यात्रियों में भरोसा आएगा। सरकार के साथ साथ इस क्षेत्र के तेजी से विस्तार के लिए प्राइवेट ग्राहकों को भी इस क्षेत्र में निवेश करने को बढ़ावा दिया जाएगा ताकि भविष्य में यह दूरस्थ स्थानों पर भी आसानी से पहुंच सके।

क्या है बैटरी स्वैपिंग?
बैटरी स्वैपिंग एक ऐसी तकनीक है जिसमें डिस्चार्ज की गई इलेक्ट्रिक वाहन की बैटरी को पहले से चार्ज की गई बैटरी से बदलना होता है। जैसे आज पूरे भारत में आयल फिलिंग स्टेशन होते है ठीक उसी प्रकार आपको पुरे भारत में बैटरी स्वैपिंग स्टेशन आने वाले देखने को मिलने लगेगा ताकि बैटरी को जल्द से जल्द बदला जा सके और इलेक्ट्रिक वाहन के सफर को आसान बनाएगा।

बैटरी स्वैपिंग की क्यों है आवश्यकता?
इलेक्ट्रिक वाहनों के प्लग-इन चार्जर धीमे होते हैं और एक बार में एक वाहन को चार्ज करने में सक्षम होते हैं। वाहनों को ज्यादातर घर या काम पर चार्ज किया जा सकता है और चार्जिंग करने में बहुत अधिक समय लगता है, ऐसे में अगर पहले से ही चार्ज किये गये बैटरी को वाहन में लगाकर सफर में रेंज की चिंता नहीं करनी होगी।

बैटरी स्वैपिंग में ढेर सारी बैटरी एक साथ चार्जिंग में लगा रहेगा जब किसी यात्री को लगता है कि उसके इलेक्ट्रिक वाहन की बैटरी डिस्चार्ज होने वाली है तो वह नजदीकी बैटरी स्वैपिंग पर जाकर अपनी बैटरी रख सकते है और उसके बदले आपको दूसरा फूल चार्ज वाली बैटरी मिल जायेगी, यह लंबी यात्रा में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए फ्यूल फिलिंग स्टेशन की तरह काम करेगा।

वर्तमान में इस क्षेत्र में बहुत ही कम कंपनियों ने कदम रखा है और भारतीय बाजार में इनकी उपस्थिति नगण्य है। ऐसे में ईवी के उपयोग को बढ़ाने के लिए बैटरी स्वैपिंग बहुत जरूरी है। देश की सबसे बड़ी तेल विपणन कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड, बाउंस जैसी कंपनी इस क्षेत्र में कदम रख चुकी है।

ड्राइवस्पार्क के विचार
यह देश में ईवी को बढ़ावा देने के लिए अच्छा कदम है लेकिन इसे जल्द से जल्द लागू करना होगा ताकि ईवी को बढ़ावा मिले। वर्तमान में दुनिया के कई देशों में यह लाया जा चुका है, अब देखना होगा भारत में यह कब तक लाया जाएगा।


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