बैटरी स्वैपिंग से इलेक्ट्रिक वाहन चार्ज करना होगा आसान, सरकार ने की ड्राफ्ट नीति की घोषणा
बैटरी से चलने वाले इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की थिंक टैंक नीति आयोग ने ईवी बैटरी स्वैपिंग के लिए मसौदा नीति जारी की है। इसके तहत पहले चरण में 40 लाख या उससे ज्यादा की आबादी वाले शहरों में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बैटरी स्वैपिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास को प्राथमिकता दी जाएगी। दूसरे चरण में सभी राज्यों और केंद्र प्रशासित प्रदेशों की राजधानी और 5 लाख से ज्यादा जनसंख्या वाले क्षेत्रों को विकसित किया जाएगा।

इसके अलावा, शहरों में दोपहिया या तिपहिया वाहनों की संख्या के अनुसार भी स्वैपिंग स्टेशन उपलब्ध किए जाएंगे। मसौदा नीति में यह भी कहा गया है कि डिटैचेबल बैटरी वाले इलेक्ट्रिक स्कूटरों को बिना बैटरी के बेचने की अनुमति दी जाएगी। इससे इलेक्ट्रिक वाहनों का अधिग्रहण लागत कम हो जाएगा।

इस नीति के तहत निजी संस्थानों और व्यक्तियों को निजी या सार्वजनिक इलेक्ट्रिक स्टेशन लगाने की अनुमति भी दी जाएगी। इलेक्ट्रिक स्टेशन लगाने के लिए आवेदकों को इस नीति के तहत तय किये गए कुछ तकनीकी, सुरक्षा और प्रदर्शन मानकों का पालन करना होगा। नीति आयोग ने इस मसौदा नीति पर अपने हितधारकों से 5 जून तक टिप्पणी मांगी है।

केंद्र सरकार ने 1 फरवरी को पेश किये गए बजट 2022-2023 में बैटरी स्वैपिंग नीति लाने की घोषणा की थी। इस नीति के तहत देश भर में इलेक्ट्रिक स्कूटर, मोटरसाइकिल और तिपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों लिए बैटरी स्वैप नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा। ईवी मालिकों को बैटरी के सब्सक्रिप्शन या लीज पर 20 फीसदी तक का इंसेंटिव दिया जा सकता है।

क्या है बैटरी स्वैपिंग?
इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज करने का सबसे आसान तरीका बैटरी स्वैपिंग है। इस प्रक्रिया में डिस्चार्ज बैटरी को इलेक्ट्रिक स्कूटर से निकाल कर उसमें पूरी तरह चार्ज बैटरी को लगाया जाता है। इससे बैटरी को चार्ज कर में लगने वाले समय की बचत होती है। बैटरी स्वैपिंग के लिए ईवी मालिक अपने बैटरी स्वैप पार्टनर के किसी भी आउटलेट पर जा सकता है और डिस्चार्ज बैटरी को पूरी तरह से चार्ज बैटरी से बदल सकता है। उसे इसके लिए बस बैटरी के सर्विस शुल्क का भुगतान करना होता है। यह प्रणाली उसी तरह है जैसे उपभोक्ता एलपीजी सिलेंडर का उपयोग करते हैं।

एक इलेक्ट्रिक स्कूटर की बैटरी को स्वैप करने में लगने वाला समय एक बाइक में पेट्रोल भरवाने के समय जितना है। हालांकि, पेट्रोल वाहनों में किसी भी पेट्रोल पंप पर ईंधन भरा जा सकता है, जबकि बैटरी स्वैप करने के लिए ईवी ग्राहक को एक निश्चित ऑपरेटर के पास जाना होगा।
देश में बाउंस जैसी कुछ इलेक्ट्रिक स्कूटर कंपनियां अपने ग्राहकों को सब्सक्रिप्शन के तौर पर बैटरी दे रही है। इससे बाउंस स्कूटर ग्राहक कंपनी के किसी भी स्वैप स्टेशन पर जाकर बैटरी को बदल सकता है। इसके लिए उसे सिर्फ स्वैपिंग के शुल्क का भुगतान करना होगा, जो चार्जिंग में लगने वाले खर्च से काफी सस्ता है।

खराब बैटरी का क्या होता है?
एक रिपोर्ट के अनुसार, 2021 और 2030 के बीच 12 मिलियन टन से अधिक लिथियम-आयन बैटरी के समाप्त होने की संभावना है। बैटरियों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे माल जैसे लिथियम, निकल और कोबाल्ट की आवश्यकता होती है जिसके खनन से पर्यावरण पर प्रभाव पड़ता है। खराब बैटरी से बहुत सारा इलेक्ट्रॉनिक कचरा निकलता है इसलिए इन्हें ठीक तरह से रीसायकल करने की जरूरत होती है।

खराब बैटरियों को रीसायकल कर बड़े पैमाने पर मूल्यवान धातुओं को निकाला जाता है। रीसायकल की गई बैटरियों का इस्तेमाल दोबारा वाहनों में नहीं किया जाता, लेकिन इनका उपयोग सौर या पवन पॉवर प्लांट से उत्पन्न अतिरिक्त बिजली के भंडारण के लिए किया जाता है।


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