Video: एंबुलेंस में 5 महीने का बच्चा जिंदगी और मौत के बीच था...तभी कार से उतर 3 लोगों ने ड्राइवर पर किया हमला
दुनियाभर में एम्बुलेंस को रास्ता देना आम बात है। यह प्रथा केवल भारत तक ही सीमित नहीं है; बल्कि कई देशों में ड्राइवर सबसे पहले एम्बुलेंस के लिए रास्ता देते हैं। कुछ देशों में तो आपातकालीन वाहनों के लिए अलग से लेन भी होती है। हालांकि भारत में ऐसी लेन नहीं है, लेकिन एम्बुलेंस को रास्ता देने की आदत सभी में विकसित होना जरूरी है।
हाल ही में बैंगलोर में एक इनोवा कार सवार लोगों द्वारा एंबुलेंस को ओवरटेक करने का मामला सामने आया है। यह घटना तब हुई जब इनोवा सवार 3 लोगों ने एक एम्बुलेंस को ओवरटेक किया और उसके ड्राइवर के साथ मारपीट भी किया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद काफी निंदा हुई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कथित रूप से इनोवा में सवार लोग नशे में धुत थे। कहा जा रहा है कि हमले से पहले से ही उन्होंने एम्बुलेंस का पीछा करना शुरू कर दिया था।
ऐसा लगता है वे एम्बुलेंस की तेज रफ्तार से नाराज थे और शायद यहीं वजह रही कि उन्होंने टोल प्लाजा पर रुकने से पहले एम्बुलेंस का 5-6 किलोमीटर तक पीछा किया। जब ये घटना हुई तब एंबुलेंस में 5 महीने का बच्चा जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा था।

लेकिन हमलावरों ने कोई दया नहीं दिखाई। स्थिति तब और खराब हो गई जब उन्होंने टोल प्लाजा पर मौजूद पुलिस अधिकारियों के सामने ही एम्बुलेंस चालक को मारना शुरू कर दिया।
एंबुलेंस ड्राइवर ने उन लोगों को बच्चे की गंभीर हालत के बारे में बताया, लेकिन उन्होंने हमला करना बंद नहीं किया। जिसके बाद एक पुलिस वाला घटनास्थल पर पहुंचकर हमलावरों को रोका और एंबुलेंस को आगे जाने दिया।
इस घटना पर लोगों ने नाराजगी जताई है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद गाड़ी में सवार युवराज सिंह, मंजनाथ और लतीश को गिरफ़्तार कर लिया गया।
फुटेज में 5 महीने के बच्चे और उसकी मां को इलाज के लिए एम्बुलेंस में लें जाते हुए दिखाया गया है। बच्चे को ऑक्सीजन सपोर्ट के लिए बैंगलोर के एक अस्पताल में ले जाया गया।

आपातकालीन वाहनों के लिए छूट: आपको यहां बता दें कि एम्बुलेंस और दमकल गाड़ियों जैसे आपातकालीन वाहनों को कुछ यातायात नियमों में छूट दी गई है। उदाहरण के लिए, जब तक कोई दुर्घटना न हो, एम्बुलेंस को लाल सिग्नल पर रुकने की ज़रूरत नहीं है।
एम्बुलेंस चालक भी तेज़ गति से गाड़ी चला सकते हैं, बशर्ते कि वे नुकसान न पहुंचाएं। मोटर चालकों को हमेशा एम्बुलेंस को रास्ता देना चाहिए, चाहे वह प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति का वाहन ही क्यों न हो।
एम्बुलेंस चालकों को उन वाहनों को ओवरटेक करने की अनुमति है जो रास्ता नहीं देते हैं, लेकिन उन्हें ऐसा करने से पहले दूसरे चालक को चेतावनी देने के लिए हॉर्न और सायरन का उपयोग करना चाहिए।
ड्राइवस्पार्क की राय: यह घटना एम्बुलेंस को रास्ता देने और आपातकालीन वाहनों का सम्मान करने के महत्व को उजागर करती है। हमलावरों की हरकतें न केवल खतरनाक थीं, बल्कि एम्बुलेंस के अंदर की गंभीर स्थिति के प्रति पूरी तरह से लापरवाही भी दिखाती हैं।
लोगों का गुस्सा और पुलिस की त्वरित कार्रवाई इस बात की याद दिलाती है कि ऐसा व्यवहार अस्वीकार्य है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सोशल मीडिया पर युजर्स पुलिस द्वारा की गई गिरफ्तारी को बहुत सपोर्ट कर रहे हैं।


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