Axiom-4 Mission: कितना ताकतवर है Falcon 9 रॉकेट, जिससे Shubhanshu Shukla ने भरी स्पेस की उड़ान; जानें खासियत

Shubhanshu Shukla Space Axiom-4 Mission: भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने इतिहास रच दिया है। वह Axiom-4 मिशन के तहत फाल्कन 9 रॉकेट और ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के लिए रवाना हुए। यह रॉकेट नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च हुआ। शुभांशु इस मिशन में पायलट हैं और उनके साथ पोलैंड, हंगरी, और अमेरिका के तीन अन्य अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं।

इस मिशन के लिए फाल्कन रॉकेट और SpaceX Dragon का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसे दुनिया का सबसे ताकतवर रॉकेट माना जाता है। बता दें, Axiom-4 मिशन एक निजी अंतरिक्ष प्रोग्राम है, जो ISS (इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन) पर वैज्ञानिक प्रयोगों के लिए है। यह मिशन 14 दिन का होगा, जिसमें शुभांशु और उनकी टीम ISS पर कई वैज्ञानिक रिसर्च को अंजाम देंगे। आइए इस मिशन में प्रयोग हो रहे Falcon 9 रॉकेट की खासियतों पर नजर डालते हैं।

Shubhanshu Shukla Space Axiom-4 Mission

Falcon 9: दुनिया का सबसे दमदार स्पेस रॉकेट

फाल्कन 9 रॉकेट, जिससे Shubhanshu Shukla स्पेस के लिए रवाना हुए हैं उसकी सबसे बड़ी खासियत है कि यह रियूजेबल रॉकेट है। इसका मतलब है कि यह रॉकेट अंतरिक्ष में पहुंचाने के बाद वापस धरती पर आ सकता है और इसका प्रयोग दूसरे मिशन में भी किया जा सकता है।

Shubhanshu Shukla Space Axiom-4 Mission

SpaceX की रिपोर्ट के मुताबिक इस रॉकेट में लगे फर्स्ट स्टेज बूस्टर के लिए यह दूसरी उड़ान होगी। यह पहले भी एक स्टारलिंक मिशन की लॉन्चिंग में शामिल था। इसके डिटेल्स नीचे दिए गए हैं।

Falcon 9 रॉकेट की लंबाई: 70 मीटर

Falcon 9 की चौड़ाई: 3.7 मीटर

Falcon 9 इंजन: पहला हिस्सा 9 मर्लिन 1D इंजनों से चलता है, जो लिक्विड ऑक्सीजन और केरोसिन ईंधन का उपयोग करते हैं।

Falcon 9 की पेलोड कैपिसिटी: यह रॉकेट 22800 किलोग्राम तक वजन को पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) में पहुंचा सकता है।

बता दें, Falcon 9 रॉकेट को 2015 में बनाया गया था। इसका इस्तेमाल NASA और SpaceX की साझेदारी में अंतरिक्ष यात्रियों को इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन तक भेजने के लिए किया जाता है।

Dragon Spacecraft में क्या है खास

ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट को फाल्कन 9 के साथ अंतरिक्ष यात्री व सामान को ISS तक ले जाता है। इसमें ऑटोमैटिक डॉकिंग सिस्टम है। इन दोनों रॉकेट का सक्सेस रेट 98 फीसदी से अधिक है, जो इसे दुनिया के सबसे ताकतवर रॉकेट्स में से एक बनाती है।

भारत के लिए ऐतिहासिक है मिशन

यह मिशन भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की दिशा में एक बड़ा कदम है। शुभांशु शुक्ला ने अपनी इस उड़ान से भारत की ताकत दिखाई है। साल 1984 में राकेश शर्मा पहली बार अंतरिक्ष में गए थे, और अब शुभांशु का मिशन उस इतिहास को और अधिक गौरवशाली बनाता है।

कौन है इंडियन एयरफोर्स के पायलट Shubhanshu Shukla

शुभांशु शुक्ला, भारतीय वायु सेना के ग्रुप कैप्टन हैं। वह लखनऊ, उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। उन्होंने 2006 में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) से प्रशिक्षण लिया और फाइटर पायलट के रुप में वायु सेना में शामिल हुए। उन्हें ISRO के गगनयान मिशन के लिए भी सलेक्ट किया गया था।

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Article Published On: Wednesday, June 25, 2025, 13:10 [IST]
English summary
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