पिछले दस साल में इन 5 वाहन कंपनियों ने भारत को कहा ‘अलविदा’, जानिए क्यों जा रही हैं दिग्गज कंपनियां
भारत दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा ऑटो बाजार है और यह तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन अवसरों के साथ चुनौतियां भी आती हैं और यह निश्चित नहीं है कि हर कोई सफलता ही हासिल कर पाए। हाल ही में फोर्ड मोटर्स ने भारत में कम सेल्स और कारोबार में हो रहे घाटे के कारण कारों का उत्पादन बंद करने की घोषणा की है। देखा जाए तो पिछले एक दशक में भारत से कई ऑटोमोबाइल कंपनियों ने अपना कारोबार समेट लिया है। यहां हम आपको बताएंगे उन ऑटोमोबाइल कंपनियों के बारे में जो पिछले कुछ सालों में भारत छोड़कर जा चुकी हैं।

1. जनरल मोटर्स
दुनिया की सबसे बड़ी ऑटोमोबाइल ग्रुप में से एक और अमेरिका की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी जनरल मोटर्स (GM) का सफर भारत में घाटे का रहा। GM ने 1996 में ओपल (Opel) के साथ भारत में अपना परिचालन शुरू किया था। जिसके बाद कंपनी ने 2003 में अपनी एक और कार ब्रांड शेव्रोले (Chevrolet) को लॉन्च किया।

हालांकि, दोनों ही कंपनियां कुछ खास कमाल नहीं दिखा पायीं। कम बिक्री के कारण जनरल मोटर्स ने ओपल को कुछ साल बाद बंद कर दिया। वहीं शेव्रोले भी मारुति सुजुकी, हुंडई और होंडा से बढ़ती प्रतिस्पर्धा का मुकाबला नहीं कर पायी। आखिरकार 2017 में, शेव्रोले की उत्पादन और बिक्री बंद करते हुए जनरल मोटर्स ने भारतीय बाजार को पूरी तरह छोड़ने की घोषणा कर दी।

2. फिएट
प्रतिष्ठित इतालवी कार ब्रांड फिएट (Fiat) ने काफी लंबे समय से असंतोषजनक बिक्री प्रदर्शन के कारण पिछले साल (2020) भारत में अपना परिचालन समाप्त कर दिया। कार निर्माता भारत में फिएट पुंटो, लिनिया, पुंटो ईवो जैसे कुछ लोकप्रिय मॉडलों की बिक्री कर रही थी। फिएट को 1990 के दशक की शुरुआत में काफी अच्छी प्रतिक्रिया मिली। हालांकि, जैसे-जैसे समय के साथ प्रतिस्पर्धा बढ़ती गई, फिएट ने अपनी पकड़ खोनी शुरू कर दी।

फिएट कारों का पुराना डिजाइन, कम माइलेज और खराब आफ्टर सेल्स सर्विस कार ब्रांड के लिए मुसीबत बन गया। बाजार में आधुनिक फीचर्स और बेहतर डिजाइन वाली कारों के आने के बाद फिएट की बिक्री गिरती चली गई। भारतीय बाजार में नए मॉडल लाने में ऑटोमेकर की रुचि की कमी एक और कारण था जिसने इसके बिक्री प्रदर्शन को प्रभावित किया। कार निर्माता ने जनवरी 2019 में उत्पादन बंद करते हुए मार्च 2020 में पूरी तरह से परिचालन बंद कर दिया।

3. यूएम मोटरसाइकिल्स
अमेरिका की यूनाइटेड मोटर्स (UM) ने भारत की लोहिया ऑटो की साझेदारी से 1990 में मोटरसाइकिल उत्पादन शुरू किया था। इसने भारत में कुछ शानदार क्रूजर मोटरसाइकिलें लाईं जिनमें रेनेगेड कमांडो, रेनेगेड स्पोर्ट एस और रेनेगेड क्लासिक शामिल हैं। हालांकि, दिखने में आकर्षक होने के बावजूद, खराब गुणवत्ता के कारण मोटरसाइकिलों की आलोचना की गई। इसके अलावा भारी बाइक बनाने वाली घरेलू निर्माता रॉयल एनफील्ड ने सस्ती और बेहतर मोटरसाइकिल लाकर यूएम मोटरसाइकिल्स का बाजार समाप्त कर दिया।

कंपनी भारतीय बाजार में रॉयल एनफील्ड और अन्य बाइक निर्माताओं से मुकाबला करना चाहती थी, लेकिन पूंजी और तकनीक की कमी के कारण इसने अक्टूबर 2019 में भारतीय बाजार को छोड़ दिया। वर्तमान में, यूएम फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) से कानूनी मुकदमों का सामना कर रही है।

4. हार्ले-डेविडसन
हार्ले डेविडसन का भारतीय बाजार से बाहर निकलना भारतीय मोटरसाइकिल उत्साही और ऑटो उद्योग के हितधारकों के लिए एक बड़ा झटका था। यूएस-आधारित प्रीमियम मोटरसाइकिल निर्माता ने सितंबर 2020 में भारतीय परिचालन बंद कर दिया। हार्ले ने अनुसार, भारत में इम्पोर्टेड बाइक पर भारी टैक्स और कम सेल्स के कारण कंपनी को नुकसान उठाना पड़ रहा था। इसके अलावा घरेलू बाजार में सस्ती क्रूजर मॉडलों के आने से कंपनी की हाई-एंड बाइक्स की बिक्री बुरी तरह प्रभावित होने लगी थी।

हार्ले ने बाद में भारत की सबसे बड़ी दोपहिया वाहन कंपनी हीरो मोटोकॉर्प के साथ एक समझौता किया। समझौते के अनुसार, हीरो मोटोकॉर्प अब हार्ले-डेविडसन मोटरसाइकिलों की बिक्री और सेवा का जिम्मा संभाल रही है। हीरो मोटोकॉर्प अपनी कुछ चुनिंदा डीलरशिप और हार्ले के मौजूदा डीलरशिप नेटवर्क के माध्यम से हार्ले बाइक्स के पुर्जे, एक्सेसरीज और मर्चेंडाइज भी बेच रही है।

5. प्रीमियर ऑटोमोबाइल्स
प्रीमियर ऑटोमोबाइल्स लिमिटेड भारत में सबसे सफल और प्रसिद्ध ऑटोमोबाइल ब्रांडों में से एक थी, जिसे कम बिक्री के कारण परिचालन बंद करना पड़ा। कंपनी रियो और पद्मिनी जैसी कारों के लिए सबसे ज्यादा मशहूर थी। प्रीमियर पद्मिनी अभी भी मुख्य रूप से मुंबई में टैक्सियों के रूप में चालू है। कंपनी ने 1940 के दशक के अंत में अपना परिचालन शुरू किया था।

यह प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय ब्रांडों जैसे प्लायमाउथ, डॉज, फिएट, प्यूज़ो आदि से लाइसेंस प्राप्त वाहनों को बेचती थी। हालांकि, भारतीय अर्थव्यवस्था के उदारीकरण के साथ, प्रतिस्पर्धा बढ़ गई और प्रीमियर के लिए संचालन जारी रखना कठिन हो गया। आखिरकार, पुणे स्थित ऑटो कंपनी ने अपना परिचालन बंद कर दिया। दिसंबर 2018 में प्रीमियर ऑटोमोबाइल्स दिवालिया घोषित कर दी गई थी।


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