इलेक्ट्रिक व्हील चेयर के इनोवेशन से हुए प्रभावित हुए आनंद महिंद्रा, की मदद की पेशकश
दिव्यांग लोगों को कहीं आने जाने के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। खासकर जब बात ड्राइविंग की आती है तो उनके लिए वाहनों का बहुत कम विकल्प उपलब्ध होता है। इसी परेशानी को देखते हुए हाल ही में एक इन्वेंशन किया गया है। इस इन्वेंशन का वीडियो Mahindra & Mahindra ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने आपने ट्विटर अकाउंट से शेयर किया है।

इस वीडियो में दिखाई गई व्हील चेयर इलेक्ट्रिक मोटर और बैटरी पे चलती है। यह व्हील चेयर बेहद आरामदायक है और इसे कन्वर्ट भी किया जा सकता है। दरअसल, इस व्हील चेयर के अगले पहिये में इलेक्ट्रिक मोटर और बैटरी को लगाया गया है। जरूरत न होने पर बैटरी से चलने वाले पहिये को निकाला जा सकता है।

आनंद महिंद्रा ने कही ये बात
आनंद महिंद्रा ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा, "मुझे पता नहीं कि ये वीडियो कितना पुराना है और कहां का है। सिग्नल ऐप पर इसे प्राप्त किया। लेकिन यह वास्तव में एक अच्छा और विचारशील इंवेंशन है। जो वास्तव में विकलांगों के जीवन को गति देने का काम करेगा। यह समर्थन के योग्य है...और मुझे मदद करने में खुशी होगी..
आनंद महिंद्रा ने दिया मदद का भरोसा
फिलहाल इस वीडियो के बारे में ज्यादा कुछ पता नहीं चला है। लेकिन आनंद महिंद्रा ने इस व्हील चेयर का इंवेंशन करने वाले की मदद का जरूर आश्वासन दिया है। ऐसे में देखना होगा कि, आखिर कब तक इस व्हील चेयर का निर्माण करने वाला व्यक्ति सामने आता है।

जब बात दिव्यांगजनों के परिवहन की आती है तो उन्हें कहीं आने-जाने के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में बैटरी से चलने वाला ऑटोमैटिक व्हील चेयर उनके लिए काफी मददगार साबित हो सकता है। क्योंकि ये व्हील चेयर बैटरी से चलती है इसलिए इसे चलाना आसान और आरामदायक है।

ट्विटर पर रिएक्शन
फिलहाल इस आनंद महिंद्रा के इस ट्वीट को 22 हजार से ज्यादा लाइक और 3 हजार से ज्यादा बार रीट्वीट किया जा चुका है। वहीं कुछ ट्विटर यूजर्स ने आनंद महिंद्रा से विकलांग लोगों के लिए स्कूटर बनाने तक की डिमांड कर डाली है।

ट्विटर यूजर्स का कहना है ऐसे इनोवेशन को प्राइवेट या सरकारी कंपनियों की मदद मिलनी चाहिए ताकि इसका फायदा अन्य दिव्यांगजनों को भी मिल सके। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि आनंद महिंद्रा को खुद ऐसे इनोवेशन की सहायता के लिए अपील करनी चाहिए।

कुछ ट्विटर यूजर्स ने कहा कि अधिक कीमत के कारण अभी भी ऑटोमैटिक ट्राई साइकिल दिव्यांग लोगों की पहुंच से बाहर हैं। ऐसे में उन्हें साधारण ट्राई साइकिल चलनी पड़ती है।


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