35 साल की सर्विस के बाद रिटायर हुई रेलवे की आखिरी एंबेसडर कार, नम आंखों से दी गई विदाई
एक जमाना था जब एंबेसडर कारें सरकारी अधिकारियों की शान हुआ करती थी और अधिकारी बड़ी रौब से इसकी सवारी किया करते थे। यह कार नेताओं से लेकर सरकारी अफसरों तक, सब की चहेती कार थी। वक्त बदला तो नई गाड़ियां आईं और एंबेसडर कारें उनके सामने फीकी पड़ने लगीं। हाल में मुंबई सेंट्रल रेलवे के दफ्तर में तैनात आखिरी सरकारी एंबेसडर कार को विदाई दी गई। लेकिन इस कार को जिस तरह से विदाई दी गई वह काफी दिलचस्प रहा।

दरअसल, इस आखिरी एंबेसडर कार को 35 साल की सर्विस के बाद मुंबई सेंट्रल रेलवे के दफ्तर से सेवा मुक्त किया गया। कार के सेवा मुक्त होने के साथ ही कार का ड्राइवर मुथु पांडी नादर भी रिटायर हो गया। यह एंबेसडर 22 जनवरी, 1985 को मुंबई सेंट्रल रेलवे के कमर्शियल मैनेजर की सेवा में लगाई गई थी। करीब 35 साल की सर्विस के बाद एंबेसडर कार और उसके ड्राइवर दोनों एक साथ रिटायर हो गए।
अपने सर्विस के दौरान सेंट्रल रेलवे के 16 कमर्शियल मैनेजरों ने इस कार की सेवा ली। पिछले सप्ताह मंगलवार को सेंट्रल रेलवे डिवीजन में इस एंबेसडर कार का आखिरी दिन था। रेलवे कर्मचारियों और अधिकारियों ने नम आंखों से एंबेसडर कार को विदाई दी। इस कार को 35 साल तक चलाने वाले ड्राइवर मुथु पांडी नादर भी इसके साथ रिटायर हो गए।

इस कार को चलाने वाले ड्राइवर मुथु पांडी नादर की इस कार से कई यादें जुड़ी हैं। ड्राइवर ने बताया कि 35 साल की सर्विस में इस कार से एक बार भी कोई हादसा नहीं हुआ और यह कार चलते-चलते बीच रास्ते में भी कभी बंद नहीं हुई। कार ड्राइवर ने बताया कि उन्हें इस कार से बेहद लगाव था और इसे चलाने के साथ इसका रख-रखाव भी करते थे। बुधवार को यह एंबेसडर कार सेंट्रल रेलवे की रोड डिपो में स्क्रैप के लिए भेजी जाएगी।
भारत में हिंदुस्तान एंबेसडर काफी लोकप्रिय कार रही। यह कार 1970-80 के दशक की सबसे पाॅपुलर कारों में एक थी। इस कार का इस्तेमाल अधिकतर सरकारी अफसरों के आधिकारिक वाहन के रुप में किया जाता था। हिंदुस्तान मोटर्स की एंबेसडर 57 साल तक प्रोडक्शन में रही। इतने साल में बहुत कम बार ही इसे अपडेट किया गया।


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