एयरबस ए-380 : ये है दुनिया का सबसे बड़ा यात्री विमान, जानिए क्यों खास है यह
एयरबस ए-380 मौजूदा समय में सबसे बड़ा यात्री विमान है। 10 सालों से हर रोज़ विमानन सेवा में शामिल होने के बावजूद इस विमान को लेकर लोगों में ख़ासी दिलचस्पी है। एयरपोर्ट के रनवे पर इसे खड़ा देख लोग अचरज में पड़ जाते हैं। सोचते हैं कि इतना बड़ा विमान हवा में उड़ता कैसे है? इसमें इतने सारे लोग कैसे उड़ान भरते हैं...वगैरह वगैरह। ड्राइवस्पार्क हिंदी आपको एयरबस ए-380 के अंदर की दुनिया के बारे में बता भी रहा है और दिखा भी। नीचे स्लाइडशो देखें।
रिपोर्ट साभार - जैक स्टीवर्ट/बीबीसी फ़्यूचर

इस विमान में 469 यात्री एक साथ सफ़र कर सकते हैं। एयर बस के मुताबिक यदि सभी सीटें इकॉनोमी क्लास की हों तो इसमें 853 लोग सफ़र कर सकते हैं।

सैकड़ों लोगों की मांग के मुताबिक, इसमें हर तरह की सुविधा और मनोरंजन मौजूद है। ब्रिटिश एयरवेज ने अपने बेड़े के लिए 12 ए-380 विमान को खरीदने का ऑर्डर दिए है।

दुनिया में कुल 160 एयर बस ए-380 बने हैं और ब्रिटिश एयरवेज़ के लिए कुछ विमान अभी बन ही रहे हैं।

बीबीसी फ़्यूचर टीम को इस विमान के उन हिस्सों को देखने के लिए आमंत्रित किया, जो आम लोग नहीं देख पाते हैं।

ए-380 इतना बड़ा विमान है कि इसके लिए हीथ्रो एयरपोर्ट के हैंगर्स को नए सिरे से संवारा गया। 1950 के बने 76 फीट ऊंचे हैंगर की ऊंचाई को 11।5 फीट बढ़ाना पड़ा है, तब जाकर ए-380 विमान उसमें समा पाया।

हालांकि, ये अभी भी टाइट फिटिंग जैसा दिखता है। ब्रिटिश एयरवेज के एयरक्राफ्ट इंजीनियर डेरेक कॉगस्वेल ने बताया, "दोनों हैंगर्स की ऊंचाई बढ़ाने में 18 महीने का वक्त लगा।" ए-380 विमान में चार रोल्स रॉयस ट्रेंट के 900 टर्बोफैन के इंजन लगे होते हैं।

वैसे ये जेट इंजन के विकल्प में भी उपलब्ध होता है। इसके सबसे बाहरी इंजन में थ्रस्ट रिवेर्सर नहीं होता है, जिसका इस्तेमाल लैंडिंग के वक्त विमान की गति को धीमा करने में किया जाता है।

इसके चक्कों के विशाल ब्रेक का डिज़ाइन ही ऐसा होता है कि इससे विमान को रोकने के लिए ज़रूरी बल मिल जाता है।

सिस्टम नेटवर्क-कंप्यूटर इंजीनियर हर बात पर नज़र रखते हैं- रडार से लेकर एयर कंडीशनिंग पर और फ्लाइट नियंत्रण तक पर। ये सिस्टम और केबल नेटवर्क को नियंत्रित करने वाले कंप्यूटर विमान के छिपे हुए हिस्से में होता है।

वे इतने अहम होते हैं कि उनका अपना क्षेत्र निश्चित होता है, जहां आप पिछले दरवाज़े या सीढ़ियों के सहारे पहुंच सकते हैं। ए-380 विमान में काम करने वालों के सामने चुनौतियां भी अलग अलग होती हैं।

सिस्टम नेटवर्क-कंप्यूटर इंजीनियर हर बात पर नज़र रखते हैं- रडार से लेकर एयर कंडीशनिंग पर और फ्लाइट नियंत्रण तक पर।

ये सिस्टम और केबल नेटवर्क को नियंत्रित करने वाले कंप्यूटर विमान के छिपे हुए हिस्से में होता है।

वे इतने अहम होते हैं कि उनका अपना क्षेत्र निश्चित होता है, जहां आप पिछले दरवाज़े या सीढ़ियों के सहारे पहुंच सकते हैं।

ए-380 विमान में काम करने वालों के सामने चुनौतियां भी अलग अलग होती हैं। कॉगस्वेल बताते हैं, "सबसे महत्वपूर्ण है हवाई जहाज़ का आकार। सब कुछ बड़ा होता है, इसलिए भारी भी होता है। अगर आप किसी कोने में जाते हैं तो आपको काफी दूरी तय करनी होती है।"

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