ट्रक ड्राइवर्स के हित में बड़ा फैसला! अक्टूबर 2025 से अनिवार्य हुआ ये जरुरी फीचर, जानिए MoRTH ने क्या कहा?
भारत सरकार ने सभी ट्रकों में एसी केबिन (AC cabins) को कंपल्सरी कर दिया है। केंद्र सरकार ने आदेश दिया है कि भारत में बनने वाले सभी नए ट्रकों को तुरंत एसी सुविधा के साथ तैयार किया जाए।
सड़क परिवहन मंत्रालय ने एक नोटिस जारी करते हुए कहा है कि 2025 से सभी नए ट्रकों में ड्राइवरों के लिए फैक्ट्री-फिटेड एसी केबिन होना अनिवार्य होगा। पिछले पांच सालों में कई बार की कवायदों के बाद आखिरकार सरकार ने इम्प्लिमेंटेशन की तारीख तय कर दी है।

मंत्रालय ने अधिसूचना जारी कर कहा कि, "1 अक्टूबर, 2025 या उसके बाद बने सभी एन2 और एन3 कैटेगरी के ट्रकों के केबिन के लिए एयर कंडीशनिंग सिस्टम लगाया जाएगा।"
कुछ महीने पहले, केंद्र सरकार ने भारत में ट्रक ड्राइवरों की मदद के लिए ट्रकों के निर्माण पर नए प्रतिबंध लगाने के लिए कानून में संशोधन लाने का फैसला किया था। इसके लिए कानूनी मसौदा तैयार कर केंद्र सरकार को भेजा गया था।

इस मसौदे का अध्ययन कर केंद्र सरकार ने अब इसे मंजूरी दे दी है। इसके मुताबिक, 1 अक्टूबर 2025 से भारत में बेचे जाने वाले ट्रकों को केवल एसी केबिन वाले ट्रक के रूप में ही बेचा जाना चाहिए।
विशेष रूप से, यह बताया गया है कि N2 और N3 वाहनों का निर्माण अब केवल AC केबिन के साथ किया जाएगा। यह भी जानकारी दी गई है कि नॉन-एसी केबिन वाले वाहनों को रजिस्ट्रेशन नंबर जारी नहीं किया जाएगा।

बताया जा रहा है कि भारत में ट्रक ड्राइवरों की सुविधा के लिए और उनके काम करने का माहौल बेहतर हो, इसके लिए केंद्र सरकार ने यह फैसला लिया है। भारत में ट्रक विभिन्न राज्यों में माल परिवहन करते हैं।
इसके कारण वहां यात्रा करने वाले ड्राइवर को जलवायु परिवर्तन के कारण विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ता है। गाड़ियों में AC न होने के कारण उन्हें अत्यधिक सर्दी और गर्मी झेलनी पड़ती है और शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
इसके लिए केंद्र सरकार ने सभी नव निर्मित ट्रकों के लिए एसी अनिवार्य कर दिया है। चाहे बहुत गर्मी हो या बहुत ठंड, यह एसी हमेशा ट्रक के अंदर एक समान तापमान सुनिश्चित कर सकता है।
यह भी बताया गया है कि इस तरह से लगाया जाने वाला AC, ISI प्रमाणित होना चाहिए। केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने घोषणा की है कि सार्वजनिक परिवहन क्षेत्र में लंबे समय से बड़े बदलाव नहीं हुए हैं।
यह मौजूदा बदलाव भारतीय ड्राइवरों के लिए बेहद जरूरी है। हालांकि इस कदम से भारत में वाणिज्यिक वाहनों की कीमत बढ़ जाएगी और इसे चलाने की लागत भी बढ़ जाएगी।


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