अहमदाबाद पोर्श केस: डैशकैम वीडियो से मचा हड़कंप, पायलट गिरफ्तार और गाड़ी जब्त
बुधवार, 26 अगस्त (IST): अहमदाबाद के लॉ गार्डन इलाके में एक पोर्श कार की खतरनाक स्पीड का डैशकैम वीडियो वायरल होने के बाद नवरंगपुरा पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने कार को ट्रेस कर जब्त कर लिया है और 24 साल के एक पायलट को गिरफ्तार किया है। वायरल वीडियो में पोर्श कार दूसरी गाड़ी से टकराने से बाल-बाल बचती दिख रही है। पुलिस ने बताया कि 300 किमी/घंटा की रफ्तार का दावा करने वाले एक अन्य वीडियो की भी गहराई से जांच की जा रही है।
शिकायतकर्ता जब एचसीजी अस्पताल (HCG Hospital) के पास से गुजर रहा था, तब यह पोर्श कार करीब 110 किमी/घंटा की रफ्तार से उसकी गाड़ी के पास से तेजी से गुजरी। इसके बाद पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने कार के रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर मालिक को थाने तलब किया और गाड़ी को जब्त कर लिया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ नए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत तेज व लापरवाही से गाड़ी चलाने का मामला दर्ज किया है। इसके साथ ही मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) के तहत कार्रवाई करते हुए 300 किमी/घंटा की स्पीड वाले दावे की पड़ताल की जा रही है।

अहमदाबाद पोर्श डैशकैम केस: पुलिस ने आज क्या-क्या दी जानकारी
घटना का समय, स्थान और गाड़ी का नंबर मिलाने के लिए नवरंगपुरा थाने और लॉ गार्डन चौकी की सर्विलांस टीमों ने इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगाले। दर्ज शिकायत के मुताबिक, 24 वर्षीय आरोपी ने खुद को एक पायलट बताया है। सोशल मीडिया पर घटना के वीडियो लगातार वायरल हो रहे हैं, हालांकि किसी की प्राइवेसी बनाए रखने और खतरनाक ड्राइविंग को बढ़ावा न देने के उद्देश्य से हम कार की नंबर प्लेट नहीं दिखा रहे हैं।
MV Act और BNS के तहत सजा: अहमदाबाद पोर्श मामले के नियम-कानून
ओवरस्पीडिंग करने पर मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 183 के तहत कार चालकों पर ₹1,000 से ₹2,000 का जुर्माना लगाया जाता है। दोबारा यही गलती करने पर धारा 206(4) के तहत लाइसेंस जब्त किया जा सकता है। वहीं, धारा 184 के तहत खतरनाक ड्राइविंग पर ₹5,000 तक का जुर्माना और 6 महीने की जेल का प्रावधान है, जो बार-बार नियम तोड़ने पर ₹10,000 जुर्माना और 2 साल तक की जेल में बदल सकता है। इन धाराओं के साथ आमतौर पर बीएनएस (BNS) की धारा 281 (रैश ड्राइविंग) भी जोड़ी जाती है।
| त्वरित गाइड | धारा | जुर्माना/कार्रवाई |
|---|---|---|
| ओवरस्पीडिंग (कार) | MV Act 183 | ₹1,000–₹2,000; दूसरी बार पर लाइसेंस जब्त/निलंबन प्रक्रिया |
| खतरनाक ड्राइविंग | MV Act 184 | ₹5,000 तक और/या 6 माह जेल; दोहराव पर ₹10,000, 2 वर्ष |
| वाहन जब्ती/रिलीज | CrPC 102 | केस प्रॉपर्टी के रूप में ज़ब्ती; मजिस्ट्रेट आदेश/बॉन्ड, वैध कागज़ों के बाद रिलीज |
अहमदाबाद पोर्श केस: गाड़ी की जब्ती और रिलीज का पूरा कानूनी मतलब समझें
चालान और जुर्माने के अलावा, पुलिस कानूनी कार्रवाई के दौरान लाइसेंस को जब्त कर उसे सस्पेंड या रद्द करने के लिए भेज सकती है। किसी गंभीर अपराध के अंदेशे में पुलिस वाहन को 'केस प्रॉपर्टी' मानकर जब्त कर सकती है। ऐसी गाड़ियों की रिहाई आमतौर पर इंस्पेक्शन, कागजी जांच और मजिस्ट्रेट के आदेश या बॉन्ड भरने के बाद ही होती है। पुलिस ने पुष्टि की है कि जांच जारी रहने तक पोर्श कार को जब्त रखा जाएगा।


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