टिप्स जो आपकी कार और पर्यावरण का रखें खयाल
इंटरनेशल काउंसिल ऑफ क्लीन ट्रांसपोर्ट यानी आईसीसीटी द्वारा करवाये गए एक हालिया शोध में भारत में वाहनों की संख्या में बेहताशा बढ़ोत्तरी होने की बात सामने आयी। इस शोध में बताया गया कि वर्ष 2003 में जहां भारत में सड़कों पर दौड़ने वाली गाडि़यों की संख्या 50 मिलियन यानी पांच करोड़ थी, वहीं 2013 में यह आंकड़ा बढ़कर 130 मिलियन यानी 13 करोड़ के लगभग पहुंच गया। व्हीकल पर्टिक्यलट मैटर यानी पीएम उत्सर्जन भी खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है। इसके कारण होने वाली बीमारियों के चलते देश में हर वर्ष 40 हजार लोग समय से पहले मौत का ग्रास बन रहे हैं।
पर्यावरण की देखभाल करना हमारी आदतों में शुमार नहीं है। और जब हम अपनी कार चलाते हैं, तो इस पहलु को लगभग अनदेखा ही कर देते हैं। हालांकि, हम ऐसी बहुत सी चीजें कर सकते हैं, जिनके कारण हम ईको-फ्रेंडली रह सकें। और इस ग्रह को सुरक्षित रख सकें। हम आपके साथ कुछ ऐसे टिप्स साझा कर रहे हैं, जिनकी मदद से आप अपने वाहन को पर्यावरण-हितैषी बना पायेंगे। और इस धरती को सुरक्षित रखने में अपनी भूमिका अदा कर पाएंगे। इनमें से कुछ से आप पहले से परिचित होंगे। लेकिन, हमारी कोशिश है कि इन टिप्स को आपकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाया जा सके। अपनी आने वाली पीढ़ी के लिए हम कम से कम इतना तो कर ही सकते हैं।
कहानी अगले हिस्से में जारी है। विस्तृत जानकारी के लिए आगे की स्लाइड्स पर क्लिक करें।

कहानी अगले हिस्से में जारी रहेगी।

अपनी कार को मैनटेन करें
कार को ईको-फ्रेंडली रखने का पहला नियम है कि आप उसकी सेहत का पूरा खयाल रखें। जिस कार की नियमित सर्विस करवायी जाती है, और जिसकी देखभाल का पूरा खयाल रखा जाता है, वह कार कम धुंआ उत्सर्जित करती है। वहीं, यदि कार की देखभाल सही तरीके से न की जाए, तो वह अधिक धुआं छोड़ती है, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है। कार को ट्यून करवाने से उसकी क्षमता में चार फीसदी का इजाफा होता है। वही जाम एयर फिल्टर को बदलने से कार की क्षमता में 10 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की जा सकती है। आपको शायद अंदाजा न हो, लेकिन एक खराब ऑक्सीजन सेंसर से कार की माइलेज 40 प्रतिशत तक कम हो सकती है। तो, अपनी कार की सेहत का अच्छी तरह खयाल रखें।

टायरों में हवा का सही दबाव
यदि कार के टायरों में हवा का सही दबाव न हो, तो वे अधिक चक्र घूमते हैं। इससे इंजन को अधिक काम करना पड़ता है। और नतीजतन ईंधन की खपत भी बढ़ जाती है। यदि कार में हवा का दबाव सही हो, तो टायर लंबे समय तक काम करते हैं। इससे पर्यावरण को भी कम नुकसान पहुंचता है। और इससे हमारे पैसों की भी बचत होती है।

ड्राइविंग का अंदाज बदलें
कार की फ्यूल इकोनॉमी काफी हद तक कार चलाने के आपके अंदाज पर निर्भर करती है। कार को अचानक रोकना या चलाना, झटके लेकर या आक्रामक होकर कार चलाने से ईंधन खपत पर बहुत अधिक असर पड़ता है। तो, कार चलाते समय एक्सीलेटर पर जरा हल्का पांव रखें और गियर भी आराम से बदलें। और यदि आपको कहीं तीस सेकेण्ड से ज्यादा समय तक रुकना हो, तो अपनी कार के इंजन को बंद कर दें।

वजन जितना कम उतना अच्छा
आपकी कार जितनी भारी होगी, उसे खींचने के लिए उतने ही अधिक ईंधन की जरूरत होगी। तो अपनी कार की डिक्की और केबिन में रखे बेकार के सामानों से छुटकारार पायें। अगर छत पर लगे कैरियर की जरूरत नहीं है, तो उसे हटा दें, और भी गैरजरूरी सामान कार में न रखें। हल्की कार चलाना जेब पर भी सकारात्मक असर डालती है।

कार धोते समय रखें खयाल
कार को घर पर ही धोने में करीब 200 लिटर तक पानी लगता है। तो, इस मामले पर जरा ध्यान दें। अपनी कार को साफ करने में कम से कम पानी इस्तेमाल करें। अपनी कार को जितना हो सके, पहले सूखे कपड़े से साफ करें। और कोशिश करें कि आप अपनी कार को धोने में बायोडिग्रेबल और सीएफसी-फ्री डिटर्जेंट का इस्तेमाल करें। आजकल ईको-फ्रेंडली क्लीनर भी मौजूद हैं। तो, पर्यावरण को सुधारने में आप अपनी ओर से यह छोटा सा योगदान तो दे ही सकते हैं।

और अंत में
हमने आपको कुछ आसान से उपाय बतायें हैं, जिन्हें अपनाकर आप अपनी कार की क्षमता बढ़ा सकते हैं। और साथ ही पर्यावरण पर पड़ने वाले बुरे प्रभाव को भी कुछ हद तक कम कर सकते हैं। अब जिम्मेदारी हम सब पर है कि हम पर्यावरण-हितैषी ड्राइविंग को अधिक गंभीरता से लें। और आने वाले वक्त को अधिक हरा-भरा बनाने में अपना योगदान दे सकें।


Click it and Unblock the Notifications








