मुंबई की सड़को पर ये लड़की चलाती है बस, आरटीओ ऑफिसर बनने का है सपना

भारत में महिलाओं को लेकर कई धारनाएं है। यहां पुरूष और महिलाओं को हमेशा से ही अलग- अलग कार्य करते देखा गया है। भारतीय समाज में यह धारणा आम है कि एक महिला घर के काम ही कर सकती है।

मुंबई की सड़को पर ये लड़की चलाती है बस, आरटीओ ऑफिसर बनने का है सपना

हालांकि हाल के दिनों में समाज में आ रहे बदलावों से लोगों की सोच में भी तबदीली देखेने को मिली है। अब भारतीय समाज महिलाओं के साथ हर क्षेत्र में कदम से कदम मिलाकर चलना चाहता है। इसमें महिलाओं ने भी अपनी भागीदारी को समझा है और हर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति मजबूती से दर्ज की है।

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हाल के दिनों में आपको कई ऐसे उदहारण देखने को मिल जाएंगे जहां महिलाओं ने अपने कार्य क्षेत्र में सफलता की बुलंदियों को छूआ है। देश की महिलाएं अब गृहणी और कॉर्पोरेट की जिम्मेदारियों से अलग हटकर हर छोटे-बड़े क्षेत्र में काम कर रही है। महिलाएं अब फाइटर जेट उड़ाने के साथ सड़को पर ऑटो रिक्शा चलाते भी दिख जाएंगी।

मुंबई की सड़को पर ये लड़की चलाती है बस, आरटीओ ऑफिसर बनने का है सपना

ऐसी ही एक कहानी है मुंबई की रहने वाली प्रतिक्षा दास की। प्रतिक्षा मैकेनिकल इंजिनीयर रह चुकी है। लेकिन अब उन्होंने बस ड्राइवर बनना स्वीकार्य किया है। शायद ही आपने आज से पहले भारत में किसी महिला को बस ड्राइवर की जिम्मेदारी निभाते देखा होगा।

मुंबई की सड़को पर ये लड़की चलाती है बस, आरटीओ ऑफिसर बनने का है सपना

24 साल की प्रतिक्षा दास मुंबई के मलाड स्थित ठाकुर कॉलेज से मैकेनिकल इंजीनीयरिंग की ड्रीगी को पूरा किया है और अब उन्हें बेस्ट की ब्रिहानमुंबई इलेक्ट्रिक स्पलाई और ट्रांसपोर्ट की बस सर्विस में बस ड्राइवर के पद पर नियुक्त किया गया है।

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यह शायद पहली बार ही होगा, जब कोई लड़की भारी वाहन को चलाने की जिम्मेदारी निभा रही है। प्रतिक्षा दास भी एक आम लड़की की तरह ही है। उन्हें भी अपने दोस्तों के साथ घूमना, खाना और सिनेमा देखना पसंद है। लेकिन जो एक चीज उन्हें बाकि लड़कियों से अलग करती है वो है बेस्ट की भारी भरकम 6 चक्कों वाली बस को चलाना, वो देश की सबसे भीड़ वाली शहर के सड़को पर।

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एक इंटरव्यू में प्रतिक्षा ने अपने भारी वाहनों के प्रति लगाव को व्यक्त किया है। प्रतिक्षा कहती है कि वे हमेशा से भारी वाहनों को चलाना चाहती थी। पिछले 6 सालों से वह इसके लिए प्रयास कर रही थी। उन्होंने सबसे पहले टू व्हीलर से इसकी शुरूआत की, फिर बाद में कार और अब वो बस, ट्रक जैसे वाहनों को भी बखूबी से चलाना जानती है। प्रतिक्षा बताती है कि उन्होंने अपने कक्षा 8 में सिर्फ दो दिनों में ही मोटरसाइकल चलाना सिखा था।

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दरअसल प्रतिक्षा अपनी इजिनयरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद आरटीओ ऑफिसर बनना चाहती थी। इस पद के लिए भारी वाहन चलाने की योग्यता के साथ लाइसेंस होना अनिवार्य है। इस वजह से प्रतिक्षा को भारी वाहन चलाने का अवसर प्राप्त हुआ है। हालांकि प्रतिक्षा ने अपने आरटीओ ऑफिसर बनने के सपने को आगे पूरा करना चाहेंगी या नहीं इस पर कुछ भी नहीं कहा है।

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भारत में जहां नौकरी मिलना मुश्किल है और वो भी ऐसे पेशें में जहां हमेशा से पुरूषों का वर्चस्व रहा है। वहां प्रतिक्षा को अपने सहकर्मियों से यह भी सुनना पड़ा कि "ये लड़की चला पायगी या नहीं?" कुछ लोगों ने उनकी कद को लेक उनकी ड्राइविंग क्षमता पर भी सवाल उठाए है।

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साथ ही बस में सफर करने वाले यात्री भी प्रतिक्षा को ड्राइविंग सीट पर देख चौक जाते है। इन सभी तरह की परेशानियों और सवालों के बीच वो आगे बढ़ती जा रही है।प्रतिक्षा हर रोज अपने काम को बेहतरीन तरीके और लगन के साथ पूरा करती है।प्रतिक्षा कई मोटरसाइकल रेसिंग चैपियनशिप में भाग ले चुकी है। इनमें से टीवीएस रेसिंग चैपियनशिप के दो ट्रॉफी को भी जीता है। 2019 में आयोजित एशिया मोटरसाइकल चैपियनशिप में उन्होंने भाग लिया था।

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Hindi
English summary
mechanical engineer becomes Mumbai’s first woman bus driver. Read in Hindi.
 
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