सड़कों को दुरुस्त करने में खर्च होंगे 7,270 करोड़ रुपये, 14 राज्यों को होगा फायदा
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) देश की सड़कों पर शून्य सड़क दुर्घटना के दृष्टिकोण को साकार करने का काम कर रही है। मंत्रालय ने देश के सर्वाधिक सड़क दुर्घटनाओं वाले 14 राज्यों को चिन्हित किया है जहां सड़क सुरक्षा बढ़ाने के लिए 7,270 करोड़ रुपये की योजना शुरू की जाएगी। इन चौदह राज्यों से देश भर के कुल सड़क दुर्घटनाओं के 85 प्रतिशत मामले सामने आते हैं।

योजना के लिए आवंटित मूल्य में से, परिवहन मंत्रालय 3,635 करोड़ रुपये की बजटीय सहायता देगा, जबकि 1,818 करोड़ की राशि विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक से ऋण के रूप में ली जाएगी। कुल लागत में से 6,725 करोड़ रुपये 14 राज्यों को उनके प्रदर्शन के आधार पर वितरित किए जाएंगे, जबकि क्षमता निर्माण गतिविधियों के लिए 545 करोड़ रुपये खर्च किये जाएंगे।

सड़क सुरक्षा कार्यक्रम के लिए लक्षित राज्यों में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, राजस्थान, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, गुजरात, बिहार, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, हरियाणा और असम शामिल हैं। यह योजना राज्य सरकारों को सड़क दुर्घटनाओं को रोकने और मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से जमीनी स्तर पर सड़क सुरक्षा में सुधार लाने में मदद करेगी।

कार्यक्रम एक आउटपुट और परिणाम-संचालित योजना है जिसमें प्रदर्शन के आधार पर राज्यों को अनुदान वितरित किया जाएगा। प्रदर्शन का मूल्यांकन 11 अनिवार्य और तीन वैकल्पिक संकेतकों पर किया जाएगा।

आपको बता दें कि, भारत में वर्ष 2019 में 4.49 लाख सड़क दुर्घटनाओं में लगभग 1.51 लाख लोगों की मौत हुई। कुल मौतों में से 1,27,379 मौतें 14 लक्षित राज्यों से थे। पिछले पांच वर्षों में मरने वालों की संख्या स्थिर बनी हुई है। पिछले साल, देश भर में 1.32 लाख सड़क दुर्घटनाएं हुईं क्योंकि कोविड-19 लॉकडाउन के कारण संख्या में गिरावट आई थी।

नई सड़क सुरक्षा योजना का उद्देश्य मार्च 2027 तक सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु दर को 30 प्रतिशत तक कम करना है। कार्यक्रम के तहत, 2022-23 तक सभी राज्यों में एकीकृत सड़क दुर्घटना डेटाबेस (IRAD) शुरू किया जाएगा। इसके तहत सभी प्रमुख हाईवे और जिला सड़कों पर दुर्घटना की संभावना वाले ब्लैक स्पॉट को ठीक किया जाएगा। नई नीति के तहत सभी राज्यों को हाईवे और शहरी सड़कों का सड़क सुरक्षा ऑडिट करना अनिवार्य होगा।

इसके अलावा, साल 2022-23 से परिवहन मंत्रालय 'चैलेंज राउंड' शुरू करेगा जिसका मुख्या उद्देश्य राज्यों को सड़क सुरक्षा और गुणवत्ता के आधार पर प्रोत्साहन प्रदान करना होगा। मंत्रालय का मानना है कि इससे राज्यों के बीच सड़क सुरक्षा को लेकर प्रतिस्पर्धा की शुरू होगी।

राष्ट्रीय राजमार्गों का चल रहा है ऑडिट
देश में पिछले साल नवंबर से राष्ट्रीय राजमार्गों का ऑडिट चल रहा है। इसके तहत सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों की टीम देश के विभिन्न राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का ऑडिट कर रही है। इससे राजमार्गों में दुर्घटना संभावित क्षेत्र (black spot) का पता लगाया जा रहा है। ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर कंपनियों को निर्माण में बदलाव करना होगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य हाईवे पर दुर्घटनाओं में कमी लाना है।

गडकरी ने कार कंपनियों से की अपील
पिछले दिनों नितिन गडकरी ने SIAM (सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स) के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की थी, जिसमें उन्होंने वाहन निर्माताओं से कारों की सुरक्षा को बढ़ाने के लिए उनमें 6 एयरबैग्स लगाने का सुझाव दिया। गडकरी ने समूह से कहा कि इससे सड़क हादसों में होने वाली मृत्यु दर को प्रभावी रूप से कम किया जा सकता है।

देश में 1 अप्रैल 2021 से कार कंपनियों को सभी नई कारों में डुअल एयरबैग अनिवार्य कर दिया गया है जबकि पुरानी कारों में डुअल एयरबैग लगवाने की समय सीमा को 31 दिसंबर 2021 तक बढ़ाया गया है। बता दें कि फ्रंट सीट पैसेंजर एयरबैग की अनिवार्यता सुप्रीम कोर्ट की समिति के सुझावों पर आधारित है। इसे भारतीय सड़कों पर वाहनों के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा विशेषता के रूप में जारी किया गया था।


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