जानिए उन 10 बातों के बारे में जो हम पुरानी कारों के बारे में याद कर नॉस्टैल्जिक फील करते हैं
आधुनिकता हर पल एक नए आविष्कार के साथ आ रही है। ऐसे में आएदिन यूनीक फीचर्स के साथ दुनियाभर में नई कारें लॉन्च होती रहती हैं। टच स्क्रीन, इलेक्ट्राॅनिक साधन, चाबी रहित एंट्री, कार्बन फाइबर बॉडी पैनल्स वगैरह वगैरह, आजकल की कारों में ये सब चीज़ें ही सब नियंत्रण करती हैं, ड्राइवर केवल स्टीयरिंग ही कंट्रोल करने तक सीमित रह गया है। अब तो ड्राइवर तक को दूर करने की बात हो रही है! सेल्फ ड्राइविंग कारें इसका सुबूत हैं। ये सभी चीज़ें आधुनिक कारों का हिस्सा हैं। यदि हम पीछे मुड़कर देखें तो क्या कभी किसी ने सोचा कि उन पुरानी अच्छी कारों का क्या हुआ और तब ड्राइविंग किस तरह हुआ करती होगी? हम आपको भारतीय कारों की ऐसी ही 10 बातें बता रहे हैं जिन्हें हम आज अगर याद करें तो नॉस्टैल्जिक फील करेंगे।

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Picture credit: order_242 via Commons Wiki

मजबूत और ठीक करने के लिए सस्ती बॉडी
किसी के भी विचार में सबसे पहले अम्बेस्डर या फिएट गाड़ी आती है। जी हाँ, इन गाड़ियों की बॉडी बहुत मज़बूत थी तथा उनमें सुधार करना भी बहुत सस्ता था। यहाँ तक कि आज भी ये गाड़ियां भारत की ड्राइविंग स्थिति के लिए उपयुक्त हैं। एक छोटी सी खरोंच या बंप पर शायद ही कुछ खर्च होता होगा।

पिछली सीट का आराम
अम्बेस्डर तथा कॉन्टेसा गाड़ियों में यह बात देखने को मिलती थी, जो इतनी अधिक आरामदायक थी कि इसकी तुलना आजकल की आधुनिक गाड़ियों से की जा सकती है। ये आरामदायक होने के साथ साथ बड़ी भी थी।

पूरे आकार का अतिरिक्त पहिया
पुरानी भारतीय कारें उचित आकार का अतिरिक्त पहिया प्रदान करती थी। पंक्चर होने पर टायर बदला जा सकता था तथा उसी पहिये में लगाया भी जा सकता था और लोगों को इसका पता भी नहीं चलता था कि अतिरिक्त पहिया लगा हुआ है। आधुनिक कारें जगह बचाने वाली होती हैं तथा इनमें अतिरिक्त पहिया सिर्फ कहने के लिए होता है कि आप अतिरिक्त पहिये के साथ कार चला रहे हैं।

कोई इलेक्ट्रॉनिक्स साधन न होना
संभवत: यही वह बात है जो अधिकाँश लोग मिस करते हैं। ड्राइव करने या इंजन को चलाने के लिए कोई इलेक्ट्रानिक्स नहीं थे। केवल आप, मशीन और एक दूसरे के प्रति प्रेम।

कम वज़न वाली कारें
कार कम वज़न की होती थी। इसके कारण ईंधन की खपत कम होती थी क्योंकि छोटा इंजन पर्याप्त था। हल्की कारों को चलाने में मज़ा भी बहुत आता था।

मरम्मत में आसानी
कार के इंजन कम जटिल हुआ करते थे। मरम्मत और सुधार के काम को कोई भी मैकेनिक बहुत आसानी से यहाँ तक कि हम भी आसानी से कर सकते थे। कार में खराबी ढूँढने के लिए किसी लैपटॉप की आवश्यकता नहीं होती थी। केवल कुछ स्क्रूड्राइवर और पाने से काम हो जाता था। पुरानी कारों में सुधार करना सस्ता भी होता था।

उचित, वास्तविक चाबियां
आज के आधुनिक विश्व की आश्चर्यजनक बात यह है कि कार निर्माताओं ने यह निश्चय किया कि आपके कार की चाबी कार के इग्नीशन के बजाय आपकी जेब में रहे। मुझे नहीं लगता कि पुश बटन से कार को शुरू करने में और चाबी से शुरू करने में किसी प्रकार से भी समय की बचत होती है।

सीधी, सरल आंतरिक सज्जा
इनमें एक या दो नॉब होते थे जिन्हें घुमाया जा सकता था। कभी कभी ये भी नहीं होते थे। आज की कार में इतने सारे बटन होते हैं कि ये सुरक्षा देने के स्थान पर ड्राइवर को कन्फ्यूज़ (भ्रमित) करते हैं। यह ऐसा है कि "ओह इस बटन से क्या होगा?"

मैनुअल गियरबॉक्स
इस बात का आश्चर्य होता है कि कार निर्माताओं ने कार के इस सबसे रोचक वैशिष्ट्य को क्यों दूर कर दिया - एक मैनुअल गियर शिफ्ट लीवर। यहाँ तक कि जब हम बच्चे थे और कार चलाने की नक़ल करते थे तो हमारा एक हाथ स्टीयरिंग रिंग की नक़ल करता था तथा दूसरा हाथ गियर लीवर की नक़ल करता था।

पतलेे पिलर्स
पुरानी कारों में पतले ए पिलर होते थे जिसके कारण गाड़ी मोड़ते समय सब कुछ स्पष्ट दिखाई देता था। ये स्मार्ट भी दिखते थे। आधुनिक कारों में मोटे ए पिलर्स लगे होते हैं जो हमारे व्यू को प्रतिबंधित करते हैं। सुरक्षा के लिए दृश्यता को छोड़ दें? आश्चर्य है कि यह किस प्रकार सहायक है..



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