सस्ते के चक्कर में कहीं लग न जाए चूना! Second Hand Car खरीदते समय इन बातों का रखें ख्याल
हमारे देश में बड़ी संख्या में मिडिल क्लास लोग रहते हैं। जिनमें से ज्यादातर लोग कार खरीदना चाहते हैं। लेकिन बजट कम होने के कारण नई कार नहीं खरीद पाते हैं। ऐसे में उनके लिए सेकेंड हैंड या यूज्ड कार खरीदना एक किफायती ऑप्शन होता है। हालांकि यूज्ड खरीदना कई बार फायदा तो कई बार नुकसान का सौदा होता है।
ज्यादातर लोगों नहीं जानते हैं कि सेकेंड हैंड कार खरीदते वक्त किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, जिसके चलते बाद में उनके पास पछताने के सिवा कोई ऑप्शन नहीं होता है। इसलिए अगली बार जब भी सेकेंड हैंड कार खरीदने का प्लान करें, तो इन जरूरी टिप्स का ध्यान रखें।

सही कीमत की जांच करें: सेकेंड हैंड कार खरीदने से पहले सबसे बड़ी चुनौती सही कीमत जानना ही होता है। आमतौर पर सेकेंड हैंड कार की कोई निश्चित कीमत नहीं होती है। हालांकि आप इसके लिए विभिन्न ऑनलाइन कार सेलिंग पोर्टल से कीमतों को कंपेयर कर सही नतीजे पर पहुंच सकते हैं।
कार की हिस्ट्री चेक करें: आमतौर पर सेकेंड हैंड कार खरीदने फायदे का सौदा होता है, लेकिन इससे पहले कार की हिस्ट्री चेक करना बेहद जरूरी है। जो कार आप खरीदने जा रहे है, उसके एक्सीडेंट हिस्ट्री को जांचे।

इसके अलावा यह भी जांचे कि संबंधित कार किसी अपराधिक मामले में शामिल तो नहीं रही है। कई कार मालिक अपराधिक मामले में शामिल कार को कम कीमत में जल्दबाजी में बेचना चाहते हैं। इसलिए ठीक से जांच करने के बाद ही सही कार का चुनाव करें।
डॉक्यूमेंट की जांच : कोई भी सेकेंड हैंड कार खरीदने से पहले संबंधित वाहन की दस्तावेज़ों की जाँच बहुत जरूरी है। जो कार आप खरीदने जा रहे हैं, उसका रजिस्ट्रेशन, RC, इंश्योरेंस और सर्विस बुक को ध्यान से चेक करें।
ओडोमीटर की जांच: सेकेंड हैंड कार खरीदते समय सबसे बड़ी चुनौती ये जानना है कि संबंधित कार कितने किलोमीटर चली है। कई बार वाहन मालिक ओडोमीटर से छेड़छाड़ कर किलोमीटर और माइलेज संबंधी जानकारी को बदल देते हैं।
इन सारी जानकारियों से संतुष्ट होने के बाद कार को चारों तरफ से बारिकी से चेक करें। इसके लिए आप किसी कार एक्सपर्ट या मैकेनिक की भी मदद से सकते हैं। खासतौर पर साइड बॉडी और अंडर बॉडी में लगे जंग को भी चेक करें।


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