घाट पर गाड़ी चलाते हुए इन बातों का रखें ध्यान
भारतीय दुनिया के सबसे खराब ड्राइवरों में से कहे जाते हैं, और यह बात सच के काफी करीब है। खासतौर पर जब आप सड़कों पर वाहन चलाने वालों के मन में नियमों के लिए असम्मान देखते हैं। कई नियम तो बिलकुल कॉमन सेंस के होते हैं, लेकिन लोग अकसर उनकी अनदेखी करते नजर आते हैं। लोग गाड़ी चलाते हुए अकसर इतनी जल्दी में होते हैं जैसे उन्हें लड़ाई के मैदान में जाना हो। यदि लोगों की इस मानसिकता में कोई बदलाव नहीं आया तो वह दिन दूर नहीं कि देश में दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले लोगों की तादाद दो लाख प्रति वर्ष का आंकड़ा पार कर जाएगी।
शहरी ट्रैफिक में वाहन चलाते हुए छोटी-मोटी गलतियों के लिए फिर भी थोड़ी बहुत गुंजाइश बचती है, क्योंकि आमतौर पर यहां गाडि़यों की रफ्तार बहुत कम होती है। साथ ही हमें शहरी परिस्थितियों में गाड़ी चलाने की आदत होती है। हालांकि, पहाड़ों में गाड़ी चलाना इस सबसे अलग होता है। सपाट सड़कों और पहाड़ों की ऊंची-नीची सड़कों में काफी फर्क होता है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें सड़कों की कम चौड़ाई, खड़ी चढ़ाई व ढलान, तीखे मोड़ और इसके साथ ही घाटी की सड़कों का अनुभव न होना भी कई लोगों के लिए काफी खतरनाक साबित हो सकता है।
लोगों को पहाड़ों पर गाड़ी चलाने को लेकर जागरुक बनाने के मकसद से, हमने कुछ जरूरी बातों की लिस्ट बनायी है, जिन्हें पहाड़ों पर गाड़ी चलाने वालों को जरूर याद रखना चाहिए।
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हैंड ब्रेक का करें अधिक इस्तेमाल
यह बहुत बुनियादी सी बात लग सकती है, लेकिन हैंडब्रेक का इस्तेमाल उन लोगों के लिए अधिक उपयोगी होती है, जिन्हें खड़ी सड़कों पर गाड़ी चलाने का अनुभव न हो। इससे क्लच और रफ्तार को संभालना काफी मुश्किल हो जाता है। घाट पर गाड़ी चलाने वाले कई अनुभवहीन लोग इस बुनियादी नियम को भूल जाते हैं और अपने लिए तथा लोकल ट्रैफिक के लिए मुश्किलें पैदा करते हैं।

सही गियर का इस्तेमाल है जरूरी
सपाट सड़कों पर आप टॉप गियर में भी चालीस की रफ्तार से गाड़ी चला सकते हैं। लेकिन, बात जब घाटों पर गाड़ी चलाने की हो, तो आपको सामान्य से एक गियर ऊपर गाड़ी चलानी चाहिए।
उदाहरण के लिए मद्धम ढलान से नीचे उतरते समय आपको अपनी कार को तीसरी गियर में रखना चाहिए, क्योंकि इससे आपको अधिक टॉर्क मिलता है और ब्रेक की जरूरत कम हो जाती है। भूलकर भी न्यूट्रल में गाड़ी न चलायें क्योंकि इससे ब्रेक फेल होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। इस दौरान फ्यूल इकोनॉमी की चिंता न करें और अपनी सुरक्षा के बारे में पहले सोचें।

मोड़ पर गियर का रखें ध्यान
तीव्र मोड़ पर अपनी गाड़ी कम से कम तीसरी गियर में ले आएं (छोटी पेट्रोल इंजन कारों के लिए दूसरा गियर ज्यादा सही रहेगा)। इससे आप सड़क के कोने में जाने से बचेंगे। आपने ध्यान किया होगा कि कई कारें बहुत तेजी से कोने में आते हैं, तेजी से झुकती हैं और आपकी लेन में आ जाती हैं। यह इसलिए होता है क्योंकि ड्राइवर अधिक गियर में गाड़ी चला रहा होता है। और अधिक टॉर्क होने की वजह से उसके लिए सही लेन में चलना मुश्किल हो जाता है।

ओवरटेकिंग करते हुए रखें ध्यान
हमारे हाईवे से अलग, घाट की सड़कों पर दूर तक देख पाना आसान नहीं होता। सड़कों की चौड़ाई कम होती है और मोड़ भी काफी तीखे होते हैं, इसलिए ड्राइवर बहुत आगे तक नहीं देख पाता। तो, अगर आप किसी धीमे ट्रक के पीछे फंस गए हैं, तो धैर्य रखें और तब तक ओवरटेक करने की कोशिश न करें जब तक ऐसा करना पूरी तरह सुरक्षित न हो। इस बात का पूरा ध्यान रखें कि आपके पास ओवरटेक करने के लिए पर्याप्त जगह है और आप पर्याप्त दूरी तक सड़क को देख पा रहे हैं।
इसके साथ ही लगातार हॉर्न न बजायें। ट्रक अथवा बस ड्राइवर को मालूम है कि आप उनके पीछे चल रहे हैं, और पर्याप्त जगह होने पर वे अकसर खुद साइड दे देते हैं। भूलकर भी किसी तेज मोड़ पर ओवरटेक करने की कोशिश न करें, क्योंकि हो सकता है कि यह आपके जीवन का आखिरी पास हो।

तेज मोड़ पर करें हॉर्न का इस्तेमाल
दिन के समय यह नियम बहुत जरूरी होता है। इस दौरान आगे से आने वाली गाडि़यों को किसी प्रकार की चेतावनी देने के लिए हैडलाइट नहीं होती। मोड़ पर हॉर्न बजाने से बाकी गाडि़यों को आपकी मौजूदगी के बारे में पता चल जाता है। और वे इस हिसाब से आपको पास करने की जगह दे देते हैं। यदि आप किसी और का हॉर्न सुनें तो एक बार फिर हॉर्न सुनें और अपनी रफ्तार कम कर लें।

ऊपर जाने वाली गाडि़यों को जगह दें
घाट पर ड्राइविंग करने का यह गोल्डन नियम है। नीचे से ऊपर जा रही कारों, बाइक और भारी गाडि़यों को रुकने में ज्यादा जोर लगाना पड़ता है। उनके लिए स्थिर खड़े रहना ज्यादा चुनौतीपूर्ण होता है। आप अपनी रफ्तार कम करें और नीचे से आ रहीं गाडि़यों को पास होने दें। भले ही इसके लिए आपको कुछ दूर रुककर उन्हें जाने की जगह ही क्यों न देनी पड़े।

सुरक्षित जगह पर रुकें
भले ही आपको थोड़ी देर के लिए ही क्यों न रुकना हो, लेकिन कभी भी अपनी कार को संकरी जगह पर न रोकें। इससे यातायात तो प्रभावित होता है, लेकिन दुर्घटना का खतरा भी काफी बढ़ जाता है। ऐसे स्थान पर गाड़ी रोकें जहां दोनों ओर से आने वाले वाहन आपको देख सकें। भले ही इसके लिए आपको पक्की सड़क से उतर कर पत्थरों बजरी अथवा ढीले पत्थरों पर ही क्यों न गाड़ी खड़ी करनी पड़े।

रेस लाइन नहीं
रेसिंग लाइन सबसे कोने वाली लाइन होती है। इसके लिये यह नाम इसलिये होता है क्योंकि इसका इस्तेमाल रेसट्रेक पर किया जाता है, सार्वजनिक सड़कों पर नहीं। कई ड्राइवर ऐसी गलती करते हैं। वे जल्दबाजी के चक्कर में एक लेन छोड़कर दूसरी लेन में जाने लगते हैं।
हमेशा अपनी लेन में ही रहें क्योंकि इसके और तीखे मोड़ पर ओवरटेक करने के कारण आमने-सामने की कई टक्कर होती हैं, जिसके कारण हर साल कई लोग अपनी जान से हाथ धो बैठते हैं।

शांत रहें
अगर आपने ध्यान दिया हो, तो ट्रक और बस वाले पहाड़ों पर एक दूसरे को पास करते समय तेज हॉर्न बजाते हैं। ऐसा करके ड्राइवर दूसरे को शुक्रिया अदा करते हैं कि उसने उन्हें ओवरटेक करने दिया, या पास करने का रास्ता दिया। कार ड्राइवरों को भी ओवरटेक के लिए जगह मिलने के बाद ऐसा करना चाहिए। ट्रक और बस ड्राइवर इस छोटे से संकेत को समझेंगे और आपके लिए एक बार फिर हॉर्न बजायेंगे। इससे आपके चेहरे पर एक मुस्कान जरूरआ जाएगी।

हमें उम्मीद है कि पहाड़ों पर गाडी़ चलाने की इन तकनीकों से आप जरूर फायदा उठायेंगे। इसके अलावा यदि आपको ऐसा लगे कि हम कुछ भूल गए हैं, तो उसे कमेंट बॉक्स में डालकर हमारे साथ जरूर साझा करें। यदि हम सब हिल्स में सुरक्षित गाड़ी चलायें तो हम सब खुश रहेंगे। आखिर किसने कहा कि छुट्टियों में ड्राइविंग मजेदार नहीं होनी चाहिए।


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