हैकर्स के निशाने पर आपकी कार! जालसाजी से बचना है, तो ध्यान रखें ये 10 बातें
मौजूदा समय में कार केवल परिवहन का साधन नहीं बची हैं। लोग अब स्टेटस सिंबल के तौर पर भी महंगी गाड़ियां खरीदते हैं और ये डिजिटल युग की स्मार्ट तकनीक से लैस मॉडर्न मशीनें बन गई हैं। अभी की गाड़ियों में इंटरनेट, ब्लूटूथ और जीपीएस जैसे वायरलेस सिस्टम हैं।
अगर आपकी कार इंटरनेट से जुड़ी है, तो यह साइबर क्राइम का शिकार बन सकती है। इससे न केवल आपकी गोपनीयता खतरे में पड़ सकती है, बल्कि कार की सेफ्टी भी प्रभावित हो सकती है। अपने इस लेख में हम आपके लिए गाड़ी को हैकिंग से बचाने के लिए कुछ जरूरी टिप्स लेकर आए हैं।

सॉफ्टवेयर अपडेट रखें: आपकी कार का इंफोटेनमेंट सिस्टम, नेविगेशन सिस्टम और अन्य डिजिटल फीचर्स सॉफ्टवेयर पर निर्भर करते हैं। अगर इनका सॉफ्टवेयर अपडेट नहीं होता है, तो इसमें सुरक्षा खामियां हो सकती हैं, जिनका फायदा हैकर्स उठा सकते हैं।
इस समस्या से बचने के लिए कार निर्माता(OEM) द्वारा जारी किए गए सॉफ्टवेयर अपडेट को समय-समय पर इंस्टॉल करते रहें। अगर कार में ऑटोमैटिक अपडेट की सुविधा है, तो इसे ऑन रखें। इसके अलावा, अनजान सोर्स के माध्यम से सॉफ्टवेयर अपडेट डाउनलोड करने से बचें।
ओबीडी-II पोर्ट (OBD-II Port) सेफ रखें: OBD-II पोर्ट (On-Board Diagnostics) वह जगह होती है जहां से मैकेनिक आपकी कार की डिटेल्स निकाल सकते हैं। साइबर अपराधी भी इस पोर्ट के जरिए कार के सिस्टम तक पहुंच सकते हैं और उसे नियंत्रित कर सकते हैं।
इस दिक्कत से बचना है, तो पोर्ट का इस्तेमाल नहीं होने पर इसे OBD-II लॉक का उपयोग करके लॉक कर दें। सावधानी बरतते हुए OBD-II डिवाइसेज को बिना सुरक्षा जांच के कनेक्ट न करें।
ब्लूटूथ और वाई-फाई का ध्यान रखें: कई स्मार्ट कारें ब्लूटूथ और वाई-फाई के जरिए मोबाइल से कनेक्ट होती हैं। हैकर्स इन नेटवर्क्स के जरिए आपकी कार के सिस्टम तक पहुंच सकते हैं। जब ब्लूटूथ या वाई-फाई की जरूरत न हो, तो इसे बंद कर दें। इसके अलावा, सार्वजनिक वाई-फाई नेटवर्क से कनेक्ट करने से बचें और थोड़ा मुश्किल पासवर्ड रखें।
कार की चाबियों को सुरक्षित रखें: स्मार्ट की (Keyless Entry System) से लैस कारों को हैकर्स बिना चाबी के ही खोल सकते हैं। इसके लिए वे रेडियो फ्रीक्वेंसी (RF) सिग्नल को इंटरसेप्ट कर सकते हैं। इस अटैक से बचने के लिए स्मार्ट की को एक फरीडे केज (Faraday Cage) या RFID ब्लॉकिंग पाउच में रखें। कार लॉक करने के बाद डोर मैनुअली चेक करें।
इंफोटेनमेंट सिस्टम को सेफ रखें: आजकल कारों में स्मार्ट इंफोटेनमेंट सिस्टम आते हैं, जिनमें ऐप्स और इंटरनेट ब्राउजिंग की सुविधा होती है। अगर इसे सही तरीके से सुरक्षित न किया जाए, तो यह हैकिंग के लिए आसान निशाना बन सकता है।
इस समस्या के बचने के लिए अज्ञात यूएसबी डिवाइसेज को इंफोटेनमेंट सिस्टम में प्लग न करें। केवल विश्वसनीय स्रोतों से ही ऐप डाउनलोड करें। इसके अलावा, कार के इंफोटेनमेंट सिस्टम को नियमित रूप से अपडेट करें।
मोबाइल ऐप्स से सतर्क रहें: कई कार निर्माता स्मार्टफोन ऐप्स प्रदान करते हैं, जिनसे आप कार को अनलॉक, लॉक, स्टार्ट या ट्रैक कर सकते हैं। अगर ये ऐप्स सही तरीके से सुरक्षित न हों, तो हैकर्स इन्हें एक्सेस कर सकते हैं।
इस दिक्कत से बचने के लिए केवल आधिकारिक ऐप स्टोर से ही ऐप डाउनलोड करें और ऐप्स को अपडेट करते रहें। स्ट्रॉन्ग पासवर्ड और टू-लेवल ऑथेंटिकेशन (2FA) का उपयोग करें।
जीपीएस और ट्रैकिंग सिस्टम को सुरक्षित करें: अगर आपकी कार में जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम है, तो यह भी हैकिंग का शिकार हो सकता है। इस समस्या से बचने के लिए किसी भी अज्ञात ट्रैकिंग डिवाइस को कार में कनेक्ट न करें। अगर कोई अनधिकृत गतिविधि मिले, तो तुरंत जीपीएस सेटिंग्स को रीसेट करें।
फिशिंग से सतर्क रहें: कई बार हैकर्स नकली ईमेल या एसएमएस भेजकर कार मालिकों को धोखा देने की कोशिश करते हैं। इस अटैक से बचने के लिए अज्ञात लिंक या अटैचमेंट पर क्लिक न करें। हमेशा कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट से जानकारी प्राप्त करें और संदेहास्पद कॉल्स और ईमेल्स से सावधान रहें।
एंटीवायरस यूज करें: अगर आपकी कार का सिस्टम इंटरनेट से जुड़ा है, तो एक स्ट्रॉन्ग फायरवॉल और एंटीवायरस इंस्टॉल करना जरूरी है। साइबर अटैक से बचने के लिए भरोसेमंद सिक्योरिटी सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करें। इसके अलावा, समय-समय पर सिक्योरिटी सेटिंग्स की जांच करें।
सिक्योरिटी चेक करते रहें: सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर कार के डिजिटल सिस्टम को चेक करते रहें। ऑथोराइज्ड सर्विस सेंटर से कार की डिजिटल सिक्योरिटी की जांच कराएं। अगर गाड़ी में कुछ असामान्य गतिविधि लगे, तो तुरंत इसे ठीक कराएं।


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