इंश्योरेंस गाइड : जानिए कैसे कैल्क्युलेट होता है आपकी कार का इंश्योरेंस प्रीमियम
क्या आपने कभी सोचा है कि आपकी कार का इंश्योरेंस कैसे कैल्क्युलेट किया जाता है? आपने इंश्योर्ड डिक्लेयर्ड वैल्यू यानी आईडीवी, नो क्लेम बोनस यानी एनसीबी, डेप्रिसिएशन आदि टर्म कई बार सुने होंगे। लेकिन क्या आपको इनके मायने मालूम हैं? अगर नहीं मालूम तो ड्राइवस्पार्क हिंदी आज आपको इंश्योरेंस से जुड़ी पूरी जानकारी दे रहा है। नीचे दिए गए स्लाइडशो को देखें।

ये है सिम्पल गाइड
हम आपको ऐसा सिम्पली गाइड करेंगे जिससे कि आप अपने वाहन का इंश्योरेंस आसानी से कैल्क्युलेट कर सकेंगे।

दो तरह के होते हैं इंश्योरेंस
इंश्योरेंस दो तरह के होते हैं। पहला है ओन डैमेज कॉम्प्रेहेंसिव कवर और दूसरा है थर्ड पार्टी कवर। Own Damage Comprehensive Cover जिन तीन प्रमुख फैक्टर्स पर निर्भर करता है, वे हैं लोकेशन, कार की एज और इसकी इंजन कैपेसिटी। जबकि थर्ड पार्टी कवर केवल कार की इंजन कैपेसिटी पर निर्भर करता है।

इंश्योरेंस को बारीकी से समझने के लिए हम एक साल पुरानी अल्टो को बतौर उदाहरण लेते हैं।

अगर आपकी अल्टो कार एक साल से ज्यादा पुरानी है और 2 साल से कम की है तो इसपर अप्लाई होने वाली इंश्योर्ड डिक्लेयर्ड वैल्यू कार की एक्स शोरूम कीमत की 80 फीसदी होगी। अगर कार की एक्स शोरूम कीमत 4 लाख रुपये है तो इसका 80 फीसदी हुआ 3 लाख 20 हजार रुपये।

अब इसके बाद 3.127 फीसदी के हिसाब से प्रीमियम कैल्क्युलेट किया जाएगा। यह 3 लाख 20 हजार रुपये पर लगेगा। इस हिसाब से जो धनराशि बनेगी वह होगी 10 हजार रुपये।

अब, इंश्योरेंस प्रीमियम की बारी आती है। यह कंपनी दर कंपनी अलग होती है। कई कम्पनियां प्रीमियम अमाउंट पर कुछ फीसदी का डिस्काउंट देती हैं। आइए इसे एक उदाहरण की नजर से समझें। मान लीजिए कि कोई कंपनी 50 फीसदी डिस्काउंट दे रही है तो 10 हजार रुपये की 50 फीसदी धनराशि हुई 5 हजार रुपये।

अब जो अगला और महत्वपूर्ण पड़ाव होता है, वह है नो क्लेम बोनस। इससे पता लगता है कि आपको इंश्योरेंस के लिए कितनी धनराशि देनी है। अगर आपने बीते साल इंश्योरेंस के लिए क्लेम नहीं किया होता है तो आपको प्रीमियम में तकरीबन 20 फीसदी की छूट मिल जाती है। यह छूट आगामी सालों में बढ़ती जाती है अगर आप इंश्योरेंस क्लेम नहीं करते हैं। याद रहे कि हम एक साल से ज्यादा और दो साल से कम उम्र की कार के बारे में बात कर रहे हैं। इस लिहाज से देखा जाए तो 5 हजार रुपये पर 20 फीसदी नो क्लेम बोनस के हिसाब से बनते हैं एक हजार रुपये। इस लिहाज से आपको प्रीमियम धनराशि यानी 5 हजार रुपये में 1 हजार रुपये छूट मिल जाती है और आपको महज 4 हजार रुपये बतौर प्रीमियम चुकाने होते हैं।

अगल पड़ाव है थर्ड पार्टी प्रीमियम। यह आपके अलावा किसी दूसरे शख्स की चोट या नुकसान की भरपाई के लिए होता है। प्रीमियम की धनराशि कार के इंजन की क्षमता के हिसाब से तय होती है। यह साल दर साल रिवाइज होती रहती है। उदाहरण के तौर पर अल्टो कार 1 हजार सीसी के नीचे है तो इसका प्रीमियम होगा 1,468 रुपये। 1 हजार से 1,500 सीसी क्षमता के इंजन वाली कारों के लिए 1,598 रुपये बतौर प्रीमियम शुल्क चार्ज किए जाते हैं। जबकि 1,500 सीसी से ज्यादा वाले व्हीकल्स के लिए 4,931 रुपये देने होते हैं। ऐसी स्थिति मेें आपको 1,468 रुपये, जो कि 1 हजार सीसी इंजन से ज्यादा व्हीकल के लिए है, 4 हजार रुपये में जुड़ जाएगा। ऐसे में कुल धनराशि देनी होगी 5,468 रुपये।

अब बचता है आखिरी स्टेप। इंश्योरेंस के प्रीमियम की कुल धनराशि में पर्सनल एक्सिडेंट कवर और सर्विस टैक्स भी जुड़ता है। 100 रुपये बतौर पर्सनल एक्सिडेंट कवर जुड़ते हैं। जबकि 14 फीसदी का सर्विस टैक्स लगता है। अब अगर कुल धनराशि देखी जाए तो 5,486 रुपये का 14 फीसदी और इसमें 100 रुपये एक्स्डिेंट कवर के जोड़ने होंगे। ऐसे में कुल धनराशि बनती है 6,348 रुपये।

तो ये था तरीका इंश्योरेंस कैल्क्युलेशन का। उम्मीद है कि अब आप खुद भी आसानी से इंश्योरेंस कैल्क्युलेट कर सकेंगे।



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