एयरबैग कैसे काम करता है और ये क्यों जरूरी है?
कार में एयरबैग कितना महत्वपूर्ण होता है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दुनिया के अधिकतर देशों में इसको मैंडेटरी कर दिया गया है। भारत में भी सभी कार निर्माताओं के लिए कार में एबीएस के साथ एयरबैग देना अनिवार्य है।

एबीएस, ब्रेक ईत्यादी की तरह ही एयरबैग कार में लगा एक सेफ्टी फीचर है। यह कार के कई हिस्सों में लगा हो सकता है। एक्सीडेंट के दौरान ये एबीएस एक सुरक्षा कवर की तरह काम करते हैं।

आज-कल कई प्रकार के एयरबैग आते हैं और ये कार के अनेक हिस्सों में लगे होते हैं। ये एयरबैग कार के स्टियरिंग व्हील, दरवाजे, डैशबोर्ड, छत ईत्यादि में लगा हो सकता है।

एयरबैग कॉटन का बना होता है और इस पर सिलिकॉन की कोटिंग की जाती है। दुर्घटना के समय जब यह फूलता है तो उस वक़्त इसमें नाइट्रोजन गैस भर जाती है।

ऐसे काम करता है एयरबैग
जब कार किसी चीज से टकराकर दुर्घटनाग्रस्त होता है तब टकराने की स्पीड के अनुसार ही कार का एयरबैग खुलता है। किसी चीज से टकराने पर कार का एक्सिलेरोमीटर सर्किट सक्रीय हो जाता है और सर्किट एक इलेक्ट्रिकल करेंट भेजता है जिससे आगे लगा सेंसर एयरबैग को सिगनल देता है और एक सेकंड से भी कम समय (लगभग 1/20 सेकंड) में लगभग 320 किमी/घंटा की रफ़्तार से बंद एयरबैग फूलता है।

एक बात को नोट कर लें कि सीट बेल्ट और एयरबैग का सीधा संबंध होता है। एयरबैग खुलने के लिए जरूरी है कि घटना के वक्त आप सीट बेल्ट पहनें हों। इसलीए हमेशा सीट बेल्ट पहनकर ही यात्रा करें।

एयरबैग को विभिन्न नामों से जाना जाता है जैसे सप्लीमेंट्री रिस्ट्रेन सिस्टम, एयर कुशन रिस्ट्रेन सिस्टम या सप्लीमेंटल इंफ्लेटेबल रिस्ट्रेन सिस्टम।

समय पर एयरबैग चेंज करवा लें
कई कार निर्माता एयरबैग रिप्लेसमेंट के लिए एक समय सीमा तय करते हैं। ये बहुत हद तक एयरबैग इग्नाइटर पर निर्भर करता है। अगर किसी कारण वश कार का एयरबैग खुल जाता है या क्षतिग्रस्त हो जाता है तो ऑथोराइज्ड डीलरशिप या वर्कशॉप से उसे ठीक करवा लें।

एक बात का हमेसा ध्यान रखें कि कभी भी चाइल्ड सीट को कभी भी एयरबैग के सामने ना रखें। संभव हो तो 13 साल या उससे कम उम्र के बच्चों को आगे की सीट पर ना बैठाएं। उन्हें हमेशा पीछे की सीट पर बैठाएं। क्योंकि एयरबैग खुलने की स्थिति में बच्चे एयरबैग की चोट से गंभीर रूप से घायल हो सकते हैं।


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