गाड़ी को लंबा चलाना है, तो कर लीजिए ये जरूरी काम; हजार के खर्च में होगी लाखों की बचत!
नमी, बारिश और धूल के कारण वाहन में जंग लगने की संभावना अधिक होती है। खासकर भारत जैसे देशों में यह समस्या ज्यादा रहती है। इस दिक्कत से बचने के लिए एंटी-रस्ट कोटिंग एक जरूरी सुरक्षा उपाय है। यह कोटिंग आपके वाहन को जंग से बचाती है। आइए जानते हैं कि एंटी-रस्ट कोटिंग कितनी तरह की होती है और इसका क्या प्रोसेस है।
एंटी-रस्ट कोटिंग के प्रकार: गाड़ियों पर आमतौर पर दो प्रकार की एंटी-रस्ट कोटिंग की जाती है। इसमें अंडरबॉडी एंटी-रस्ट कोटिंग और बॉडी एंटी-रस्ट कोटिंग शामिल है। अंडरबॉडी एंटी-रस्ट कोटिंग कार के निचले हिस्से पर लगाई जाती है, क्योंकि वहां नमी और गंदगी के कारण जंग लगने की संभावना अधिक होती है।

वहीं, बॉडी एंटी-रस्ट कोटिंग को कार के बाहरी हिस्से, दरवाजों के अंदरूनी भागों व अन्य मेटल्स पर लगाई जाती है। इसमें सिंथेटिक पेंट, इलेक्ट्रोस्टैटिक कोटिंग और गैल्वेनाइजेशन तकनीकों का उपयोग किया जाता है। आइए अब एंटी-रस्ट कोटिंग करवाने की स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस जान लेते हैं।
सही कोटिंग चुनें: सबसे पहले आपको यह तय करना होगा कि गाड़ी में अंडरबॉडी कोटिंग, बॉडी कोटिंग या दोनों करवानी है। अगर आप तटीय इलाकों में रहते हैं या अक्सर बारिश में गाड़ी चलाते हैं, तो दोनों कोटिंग करवाना ही बेहतर होगा।
सही वर्कशॉप चुनें: कोटिंग का चुनाव करने के बाद किसी विश्वसनीय ऑटोमोबाइल सर्विस सेंटर या अधिकृत डीलरशिप को चुने। लोकल गैरेज भी यह काम करते हैं, लेकिन गुणवत्ता सुनिश्चित करना जरूरी है।
कोटिंग की प्रोसेस समझें: कोटिंग से पहले वाहन की सफाई करें, इसके लिए पहले गाड़ी को अच्छी तरह से धोकर सुखाया जाता है। इसके बाद मैकेनिक यह जांचता है कि कहीं पहले से जंग तो नहीं लगी है, फिर एंटी-रस्ट मैटेरियल को ब्रश, स्प्रे या डिपिंग तकनीक से लगाया जाता है।
कोटिंग की क्वालिटी चेक करें: कोटिंग पूरी तरह से और समान रूप से लगी होनी चाहिए। कोई सतह छूटी न हो और परत मोटी होनी चाहिए। इसके बाद सर्विस सेंटर से वॉरंटी प्राप्त करें, जो आमतौर पर 1 से 5 साल की होती है। इस प्रोसेस में आपके 20 हजार रुपये तक खर्च हो सकते हैं।


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