डीजल कार के फायदे और नुकसान; खरीदें या ना खरीदें?
पहले डीजल कार को प्रदुषण करने वाली और बहुत ज्यादा आवाज करने वाली कार क रूप में देखा जाता था। लेकिन अब परस्थितियों में काफी सुधार आया है। टेक्नोलॉजी के कारण आज कल की डीजल कारें बेहतरीन इंजन के साथ आती हैं।

पहले के मुकाबले ये कम प्रदुषण करती हैं। इनकी ड्राइव भी काफी स्मूथ होती है। नए उत्सर्जन नियमों के आ जाने से कंपनीयां डीजल इंजन के विकास में ज्यादा प्रयत्न कर रही हैं। लेकिन इसमें अभी भी कई कमियां हैं। तो आइये जानते हैं कि डीजल डीजल कार के फायदे और नुकसान क्या क्या है।

डीजल कार के फायदे
बढियां माइलेज
डीजल कार का सबसे बड़ा फायदा तो ये है कि यह पेट्रोल कार के मुकाबले काफी अच्छा माइलेज देती है, जो कि इसकी सफलता का मुल मंत्र भी है।

डीजल की कीमत
सबको पता है कि कीमत के मामलें में अभी भी डीजल के दाम पेट्रोल के मुकाबले काफी कम है। ऐसे में ज्यादा माइलेज लोगों को अपनी ओर और भी आकर्षित करती है। अगर लोगों को लंबे सफर पर जाना हो तो आर्थिक तौर पर यह काफी सस्ता पड़ता है।

नियमित इग्निशन ट्यून-अप की जरूरत नहीं
डीजल कारों में कोई स्पार्क प्लग या डिस्ट्रीब्यूटर्स नहीं होते हैं। ऐसे में इसे नियमित ट्यून-अप की जरूरत नहीं होती। ये कार उन लोगों को ज्यादा पसंद आती है जिन्हें बार-बार अपनी कार जांच करवाना पसंद नहीं। लेकिन फिर भी ध्यान रहे कि बेहतर परफॉर्मेंस और लॉन्ग कार लाइफ के लिए रेग्यूलर मेंटेनेंस और सर्विसिंग करानी बहुत जरूरी है।

डीजल कार के नुकसान
कीमत लगभग पेट्रोल कार के ही जितनी
पहले डीजल कारों को खरीदने का एक कारण ये भी होता था कि ये पेट्रोल कारों के मुकाबले काफी सस्ती होती थी। लेकिन अब दोनों ही कारों की कीमतों में ना के बराबर या तो मामुली अंतर ही दिखता है।

डीजल की बढ़ती कीमतें
डीजल कारों की बढ़ती कीमतों के पीछे इसकी बढ़ती मांग है। गौरतलब है कि यात्री वाहनों के अलावा अन्य कमर्शियल वाहनों जैसे ट्रक, टैक्सी, बस ईत्यादि में भी डीजल का इस्तेमाल किया जाता है जिसके कारण इसकी मांग काफी बढ़ गई है। अंतर्राष्ट्रिय बाजर में भी कच्चे तेल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में संभव है कि आनेवाले दिनों में जैसे पेट्रोल और डीजल कार के दामों में को अंतर नहीं दिखता, उसी तरह पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी अंतर खत्म हो जाएगा।

रेग्यूलर मेंटेनेंस और सर्विसिंग
डीजल कारों में कोई स्पार्क प्लग या डिस्ट्रीब्यूटर्स नहीं होते हैं। ऐसे में इसे नियमित ट्यून-अप की जरूरत नहीं होती। लेकिन इन पार्ट्स के ना होने से डीजल कारों के इंजन की विशेष देखभाल की जरूरत होती है। इसके ऑयल, एयर और फ्यूल फील्टर को नियमीत तौर पर चेंज करना पड़ता है। इन सबके कारण इसे नियमित तौर पर सर्विसिंग भी करना पड़ता है।

निष्कर्ष
डीजल प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में चीजें लगातार सुधर रही हैं। लोगों कि डिमांड रहती है कि उन्हें ऐसे यात्री वाहन, ट्रक, बसों, साथ ही कृषी और कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट की जरूरत है जो कम उत्सर्जन करती हैं, जिससे चीजें और भी बेहतर हुई है।


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