बाइक इंश्योरेंस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को कैसे करें ट्रांसफर, जानें पूरी प्रोसेस
बाइक इंश्योरेंस करना ज्यादातर लोगों को पता होता है। लेकिन क्या आप बाइक इश्योरेंस को एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में कैसे ट्रांसफर करते हैं इसके बारे में जानते हैं, यदि नहीं तो आज हम इसी के बारे में आपको बता रहे हैं, तो चलिए विस्तार से जानते हैं। बाइक के शौकीन समय-समय पर अपनी गाड़ियां बदलते रहते हैं। ऐसे में वे बाइक की ओनरशिप ट्रांसफर तो करा लेते हैं पर इंश्योरेंस नहीं कराते हैं लेकिन यह भी बहुत जरूरी है।

स्टेप-1
बाइक के अपने ऑफिशियली ट्रांसफर के 15 दिनों के भीतर इंश्योरेंस ट्रांसफर के लिए आवेदन करें। सबसे अच्छा तरीका यह है कि जैसे ही आप ओनरशिप ट्रांसफर करने की प्रक्रिया शुरू करते हैं वैसे ही इंश्योरेंस ट्रांसफर की औपचारिकताएं भी शुरू कर दें।

स्टेप 2
बाइक इंश्योरेंस पॉलिसी के ट्रांसफर के लिए जरूरी दस्तावेज जैसे आरसी, ओनरशिप ट्रांसफर की तारीख बताने वाला दस्तावेज, ओरिजनल इंश्योरेंस पॉलिसी, अपने डीलर का नाम और पॉलिसी के प्रीमियम के पुराने भुगतान का इतिहास सहित दस्तावेज अपने पास रख लें

स्टेप 3
मालिक और खरीदार दोनों के केवाईसी पेपर अनिवार्य हैं। इस ट्रांसफर का रिकॉर्ड बनाए रखने के लिए पैन कार्ड, आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और बहुत कुछ ले जाएं।

स्टेप 4
एक विक्रेता के रूप में, आप अपनी नई बाइक या दोपहिया वाहन का कवरेज बढ़ाने के लिए अपनी वर्तमान नीति में किसी अन्य वाहन का नाम जोड़ सकते हैं। ध्यान रखें कि प्रीमियम दर में परिवर्तन हो सकता है।

स्टेप 5
पॉलिसी के इस ट्रांसफर के दौरान एक विक्रेता को अपना थर्ड पार्टी इंश्योरेंस जमा करना होगा। यह आगे की की प्रीमियम में मदद करता है।

बीमा ट्रांसफर करवाने के क्या हैं फायदे?
जब भी आप अपनी गाडी बेचें तो बीमा ट्रांसफर करवा लें या कोई सेकंड हैंड गाड़ी खरीद रहे हैं तो इंश्योरेंस अपने नाम करवा ले। इससे आप भविष्य में होने वाली देनदारियों से बच सकेंगे। अगर आपकी सेकंड हैंड बाइक दुर्घटनाग्रस्त हो जाती है और उससे थर्ड पार्टी लायबिलिटी हो जाती है।

अगर आपने बाइक अपने नाम पर हस्तांतरित नहीं कराई होगी तो आप थर्ड पार्टी दावा नहीं कर पाएंगे। नतीजतन इसे आपको भरना होगा। इसी तरह अगर आप अपनी गाडी किसी को बेचने पर बीमा पॉलिसी उसके नाम ट्रांसफर नहीं करवाते तो नए मालिक से हुई किसी भी दुर्घटना की लायबिलिटी भरने के जिम्मेदार आप होंगे।

वहीं इंश्योरेंस ट्रांसफर करने पर नो क्लेम बोनस (एनसीबी) का फायदा मिलेगा। यह बीमा कंपनी द्वारा ड्राइवर चालकों को कोई क्लेम न करने के लिए दिया गया एक इनाम है। अगर एक पुरानी बीमा पॉलिसी अमान्य हो जाती है तो वह नयी गाड़ी में इसे ट्रांसफर कर सकता है।


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