WLTP Cycle: अब लोगों को मिलेगी कार की सटीक माइलेज की जानकारी, गाड़ियों के लिए सरकार ला रही सख्त नियम
WLTP Emission Testing Cycle: भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर में एक अहम बदलाव की तैयारी है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने एक नया ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है, जिसके तहत अप्रैल 2027 से भारत में WLTP (वर्ल्डवाइड हार्मोनाइज्ड लाइट व्हीकल टेस्ट प्रोसीजर) एमिशन टेस्टिंग साइकिल को अपनाने का प्रस्ताव रखा गया है। यह बदलाव खासतौर पर कार खरीदारों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। हालांकि, इस ड्राफ्ट में EV (इलेक्ट्रिक व्हीकल) को लेकर कोई जिक्र नहीं है। फिलहाल ICE यानी पेट्रोल-डीजल वाहनों के लिए ही WLTP लागू होगा, जबकि EVs पहले की तरह MIDC साइकिल के तहत ही टेस्ट किए जाएंगे।

WLTP एमिशन साइकिल क्या है?
WLTP यानी वर्ल्डवाइड हार्मोनाइज्ड लाइट व्हीकल टेस्ट प्रोसीजर (Worldwide Harmonised Light Vehicle Testing Procedure) एक ऐसा एमिशन और फ्यूल एफिशिएंसी टेस्ट है, जो रियल-वर्ल्ड ड्राइविंग कंडीशन्स के ज्यादा करीब होता है। इसमें अलग-अलग स्पीड, एक्सेलरेशन और ड्राइविंग पैटर्न को सिमुलेट किया जाता है, जिससे वाहन की माइलेज और पॉल्युशन के आंकड़े ज्यादा सटीक मिलते हैं।
अब तक भारत में गाड़ियों के लिए माइलेज और पॉल्यूशन को जानने के लिए इस्तेमाल हो रही मॉडिफाइड इंडियन ड्राइविंग साइकिल यानी MIDC टेस्टिंग प्रोसेस लैब कंडीशन्स पर आधारित थी। इसी वजह से अक्सर कंपनी द्वारा दावा की गई माइलेज और असल में मिलने वाली माइलेज में बड़ा अंतर देखा जाता था। WLTP इस गैप को काफी हद तक कम करने में मदद करेगा।
अब क्या बदलेगा?
नए ड्राफ्ट के अनुसार, WLTP टेस्टिंग प्रोटोकॉल इन कैटेगरी के वाहनों पर लागू होगा।
- M1 कैटेगरी: 9 सीटों तक वाली सभी कारें, SUVs और MPVs
- M2 कैटेगरी: 9 से ज्यादा सीट और 5 टन से कम GVW वाले कमर्शियल वाहन
- N1 कैटेगरी: 3.5 टन से कम GVW वाले गुड्स कैरियर
टेस्टिंग प्रक्रिया चेसिस डायनामोमीटर पर की जाएगी और केवल लॉन्च के समय ही नहीं, बल्कि पूरे प्रोडक्ट लाइफसाइकिल के दौरान नियमित रूप से टेस्टिंग की जाएगी, ताकि आंकड़ों की सटीकता और मॉनिटरिंग बनी रहे। इसके अलावा, वाहन निर्माताओं को E85 और E100 जैसे हाई-एथनॉल फ्यूल ब्लेंड्स के साथ वाहन की कम्पैटिबिलिटी को लेकर स्पष्ट स्टिकर लगाना भी अनिवार्य होगा।
BS6 और सेफ्टी नॉर्म्स में कोई बदलाव नहीं
यह ध्यान रखना जरूरी है कि इस बदलाव के बावजूद रेगुलेटेड एमिशन लिमिट्स में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। वाहन पहले की तरह ही BS6 मानकों का पालन करेंगे, जो 2020 से लागू हैं। साथ ही, सेफ्टी के लिए AIS-175 नॉर्म्स भी पहले जैसे ही रहेंगे। इनमें फायर रिटार्डेंट सिस्टम, इमरजेंसी एग्जिट और ड्राइवर अलर्ट जैसे जरूरी सेफ्टी फीचर्स शामिल हैं।
आम खरीदार के लिए इसका क्या मतलब है?
WLTP को अपनाने से कार खरीदारों को सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि ब्रॉशर में दी गई माइलेज और असल ड्राइविंग में मिलने वाली माइलेज के बीच का अंतर कम होगा यानी अब आंकड़े ज्यादा भरोसेमंद होंगे। इसके अलावा, कंपनियों को कारों में ऑन-बोर्ड डायग्नोस्टिक्स (OBD) सिस्टम देना अनिवार्य होगा, जो तय सीमा से ज्यादा एमिशन होने पर ड्राइवर को अलर्ट करेगा। इससे इंजन या पावरट्रेन से जुड़ी समस्याओं को समय रहते पहचाना जा सकेगा। अच्छी बात यह भी है कि यह बदलाव सिर्फ टेस्टिंग रेगुलेशन से जुड़ा है, इसलिए ज्यादातर कारों की कीमतों पर इसका असर पड़ने की संभावना नहीं है।


Click it and Unblock the Notifications








