कार लोन लेने से पहले जान लें ये 5 जरूरी बातें, बैंक नहीं करेगा आपकी अप्लीकेशन रिजेक्ट
आज के समय में कार खरीदना सिर्फ शौक नहीं बल्कि कई लोगों के लिए एक जरूरत बन चुका है। नौकरी, परिवार और रोजमर्रा के कामों के लिए अपनी कार होना काफी सुविधाजनक होता है। लेकिन हर किसी के पास एक साथ बड़ी रकम देकर कार खरीदने की क्षमता नहीं होती। ऐसे में कार लोन एक आसान विकल्प बन जाता है, जिसकी मदद से लोग नई या सेकेंड हैंड कार खरीद सकते हैं। हालांकि कई बार लोग बिना पूरी जानकारी के लोन के लिए आवेदन कर देते हैं, जिसके कारण बैंक उनकी फाइल को रिजेक्ट कर देता है। अगर आप भी कार लोन लेने की योजना बना रहे हैं, तो आवेदन करने से पहले कुछ जरूरी बातों को समझना बेहद जरूरी है। सही तैयारी और जानकारी के साथ लोन लेने की प्रक्रिया आसान हो सकती है।

1. सिबिल स्कोर का रखें खास ध्यान
किसी भी प्रकार का लोन देने से पहले बैंक सबसे पहले आवेदक का क्रेडिट स्कोर या सिबिल स्कोर जांचता है। यह स्कोर यह बताता है कि आपने पहले लिए गए लोन या क्रेडिट कार्ड की किस्तें समय पर चुकाई हैं या नहीं। आमतौर पर कार लोन के लिए 750 या उससे अधिक का सिबिल स्कोर अच्छा माना जाता है। यदि आपका स्कोर इससे कम होता है, तो बैंक लोन देने से मना कर सकता है या फिर ज्यादा ब्याज दर पर लोन दे सकता है। इसलिए कार लोन के लिए आवेदन करने से पहले अपना क्रेडिट स्कोर जरूर जांच लें। यदि किसी पुराने लोन या क्रेडिट कार्ड का बकाया है तो उसे समय पर चुकाकर स्कोर बेहतर बनाना चाहिए।
2. आय और नौकरी की स्थिरता
कार लोन देते समय बैंक केवल क्रेडिट स्कोर ही नहीं बल्कि आपकी आय और नौकरी की स्थिरता को भी ध्यान में रखता है। बैंक यह सुनिश्चित करना चाहता है कि आप लोन की EMI समय पर चुका सकें। आमतौर पर कार लोन लेने वाले व्यक्ति की उम्र 21 से 65 वर्ष के बीच होनी चाहिए। अगर आप सैलरीड कर्मचारी हैं तो कम से कम एक साल की स्थायी नौकरी और लगभग ₹25,000 या उससे अधिक मासिक आय होना जरूरी माना जाता है। वहीं अगर आप स्वयं का व्यवसाय करते हैं, तो बैंक आपसे पिछले 2 से 3 साल का स्थिर व्यवसाय और आयकर रिटर्न यानी ITR की जानकारी मांग सकता है।
3. आय और EMI का संतुलन
लोन देते समय बैंक यह भी जांच करता है कि आपकी मासिक आय का कितना हिस्सा पहले से चल रहे लोन की EMI में जा रहा है। अगर आपकी आय का बड़ा हिस्सा पहले ही अन्य लोन की किस्तों में खर्च हो रहा है, तो बैंक नए लोन को जोखिम भरा मान सकता है। आमतौर पर यह माना जाता है कि आपकी कुल EMI आपकी मासिक आय के 50 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। अगर आपके ऊपर पहले से कई लोन चल रहे हैं, तो कार लोन के लिए आवेदन करने से पहले उन्हें कम करना या बंद करना बेहतर विकल्प हो सकता है। इससे बैंक को भरोसा होता है कि आप नई EMI को आसानी से चुका पाएंगे।
4. डाउन पेमेंट करने से बढ़ती है लोन मिलने की संभावना
कई बैंक कार की पूरी कीमत तक लोन देने का दावा करते हैं, लेकिन अगर आप कार खरीदते समय कुछ राशि खुद से भुगतान करते हैं तो लोन मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है। आमतौर पर कार की कीमत का लगभग 15 से 20 प्रतिशत हिस्सा डाउन पेमेंट के रूप में देना फायदेमंद माना जाता है। इससे बैंक का जोखिम कम हो जाता है और आपको कम राशि पर लोन लेना पड़ता है। इसका सीधा फायदा यह होता है कि आपकी EMI कम हो सकती है और कुल ब्याज लागत भी कम हो जाती है।
5. ब्याज दर और अन्य चार्ज की जानकारी जरूर लें
कार लोन लेते समय केवल ब्याज दर को ही ध्यान में रखना पर्याप्त नहीं होता। कई बार बैंक लोन के साथ प्रोसेसिंग फीस, फाइल चार्ज, प्रीपेमेंट या फोरक्लोजर शुल्क भी लेते हैं। इसलिए लोन लेने से पहले इन सभी शुल्कों के बारे में सही जानकारी लेना जरूरी है। कई बैंक त्योहारों या विशेष ऑफर्स के दौरान प्रोसेसिंग फीस में छूट भी देते हैं। अगर आप इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर लोन चुनते हैं, तो कार लोन की प्रक्रिया काफी आसान हो सकती है और भविष्य में किसी भी प्रकार की वित्तीय परेशानी से बचा जा सकता है।
हमारी राय
अगर आप कार खरीदने के लिए लोन लेने की योजना बना रहे हैं, तो जल्दबाजी करने के बजाय पहले अपनी वित्तीय स्थिति और बैंक की शर्तों को अच्छी तरह समझना जरूरी है। सिबिल स्कोर बेहतर रखना, स्थिर आय दिखाना, EMI और आय का संतुलन बनाए रखना, सही डाउन पेमेंट करना और सभी चार्ज की जानकारी लेना जैसे कदम आपकी लोन फाइल को मजबूत बनाते हैं। इससे बैंक द्वारा लोन मंजूर होने की संभावना काफी बढ़ जाती है।


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